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एल फाशेर में आरएसएफ ने किए मानवता के खिलाफ अपराध: एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट

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एल फाशेर में आरएसएफ ने किए मानवता के खिलाफ अपराध: एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट

सारांश

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने सूडान में वह तस्वीर उजागर की है जिसे दुनिया नज़रअंदाज़ करती रही — एल फाशेर में आरएसएफ द्वारा 18 महीने की घेराबंदी के बाद हत्या, बलात्कार और एथनिक क्लीजिंग। 247 गवाहों और उपग्रह साक्ष्यों पर आधारित यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 1 जुलाई 2025 को जारी रिपोर्ट में आरएसएफ पर एल फाशेर में मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप लगाया।
हत्या, यातना, बलात्कार, गुलामी, यौन दासता और एथनिक क्लीजिंग को सुनियोजित हमले का हिस्सा बताया गया।
रिपोर्ट 247 लोगों की गवाही पर आधारित, जिनमें 208 संघर्ष-पीड़ित शामिल; उपग्रह तस्वीरों और वीडियो का भी विश्लेषण।
अक्टूबर 2024 में 18 महीने की घेराबंदी के बाद आरएसएफ ने एल फाशेर पर कब्जा किया था।
फरवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र के तथ्य-जांच मिशन ने भी गैर-अरब समुदायों के खिलाफ नरसंहार के संकेत बताए थे।
एमनेस्टी की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने तत्काल युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की।

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 1 जुलाई 2025 को जारी अपनी रिपोर्ट में सूडान के अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) पर उत्तरी दारफुर के एल फाशेर शहर में मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएफ ने एल फाशेर पर कब्जे के दौरान 'एथनिक क्लीजिंग' को अंजाम दिया, जिसमें हत्या, यातना, बलात्कार, गुलामी और यौन दासता जैसे जघन्य अपराध शामिल हैं।

रिपोर्ट में क्या आरोप लगाए गए

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आरएसएफ द्वारा किए गए ये अपराध नागरिकों के खिलाफ व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थे। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएफ ने हमलों के दौरान बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया और गैर-अरब नागरिकों के विरुद्ध अपमानजनक तथा अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किया। जातीय आधार पर किए गए इस उत्पीड़न को भी एमनेस्टी ने मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के मध्य से 2025 के अंत तक आरएसएफ ने एल फाशेर और आसपास के इलाकों में युद्ध अपराध किए। यह ऐसे समय में आया है जब सूडान में गृहयुद्ध को दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता पर सवाल उठते रहे हैं।

एल फाशेर पर कब्जे की पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2024 के अंत में आरएसएफ ने करीब 18 महीने की घेराबंदी के बाद एल फाशेर पर कब्जा कर लिया था। यह दारफुर क्षेत्र में सूडानी सेना का अंतिम प्रमुख गढ़ था। इस कब्जे के दौरान बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ, जिसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं।

गौरतलब है कि फरवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने भी कहा था कि एल फाशेर पर आरएसएफ का कब्जा गैर-अरब समुदायों के खिलाफ नरसंहार के संकेत दिखाता है। यह एमनेस्टी की रिपोर्ट के निष्कर्षों को और अधिक विश्वसनीयता प्रदान करता है।

रिपोर्ट की पद्धति और साक्ष्य

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए 247 लोगों से बातचीत की, जिनमें संघर्ष से बचे 208 लोग शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संगठन ने दस्तावेजों, वीडियो और उत्तरी दारफुर की उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण कर अपने निष्कर्षों को पुष्ट किया। यह व्यापक साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण रिपोर्ट की विश्वसनीयता को रेखांकित करता है।

सूडान गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि

सूडान में गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में उस समय भड़का था, जब सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और आरएसएफ प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दागालो (हेमेदती) के बीच सत्ता संघर्ष हिंसक रूप ले गया। इस युद्ध में अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तत्काल युद्धविराम लागू करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की है। संगठन की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल चिंता जताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और दंड से बचने की संस्कृति को खत्म करना होगा।' आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता का आईना है — एल फाशेर में 18 महीने तक घेराबंदी होती रही और दुनिया देखती रही। संयुक्त राष्ट्र के तथ्य-जांच मिशन ने फरवरी 2025 में ही नरसंहार के संकेत दे दिए थे, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह वही पैटर्न है जो रवांडा और बोस्निया में देखा गया था — चेतावनियाँ आती रहीं, प्रतिक्रिया देर से आई। असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और सुरक्षा परिषद इस बार जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, या यह रिपोर्ट भी फाइलों में दब जाएगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमनेस्टी इंटरनेशनल की सूडान रिपोर्ट में क्या आरोप लगाए गए हैं?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरएसएफ पर एल फाशेर में हत्या, यातना, बलात्कार, गुलामी, यौन दासता और एथनिक क्लीजिंग जैसे अपराधों का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार ये अपराध नागरिकों के खिलाफ व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थे, जो मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं।
आरएसएफ ने एल फाशेर पर कब कब्जा किया और क्यों यह महत्वपूर्ण था?
अक्टूबर 2024 के अंत में आरएसएफ ने करीब 18 महीने की घेराबंदी के बाद एल फाशेर पर कब्जा किया। यह दारफुर क्षेत्र में सूडानी सेना का अंतिम प्रमुख गढ़ था, इसलिए इसका पतन रणनीतिक और मानवीय दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र ने सूडान संकट पर क्या कहा है?
फरवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने कहा था कि एल फाशेर पर आरएसएफ का कब्जा गैर-अरब समुदायों के खिलाफ नरसंहार के संकेत दिखाता है। यह निष्कर्ष एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट के आरोपों को और बल देता है।
सूडान का गृहयुद्ध कब और क्यों शुरू हुआ?
सूडान में गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ, जब सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और आरएसएफ प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दागालो के बीच सत्ता संघर्ष हिंसक रूप ले गया। इस युद्ध में अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सूडान संकट पर क्या मांगें रखी हैं?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तत्काल युद्धविराम लागू करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की है। संगठन की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कदम उठाने और दंड से बचने की संस्कृति समाप्त करने का आह्वान किया है।
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