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सुहरावर्दी के हाथ बेगुनाहों के खून से रंगे थे, नाम बदलना सही: मुख्तार अब्बास नकवी

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सुहरावर्दी के हाथ बेगुनाहों के खून से रंगे थे, नाम बदलना सही: मुख्तार अब्बास नकवी

सारांश

BJP नेता नकवी ने एक साथ चार बड़े मुद्दों पर विपक्ष को घेरा — सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलना 'उचित' बताया, शिवसेना (यूबीटी) को आत्मचिंतन की सलाह दी, नीट विवाद को 'पैराशूट पॉलिटिक्स' कहा और सपा-कांग्रेस गठबंधन को '440 का झटका' लगने की भविष्यवाणी की।

मुख्य बातें

BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कोलकाता के सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने के फैसले को उचित ठहराया।
नकवी ने कहा कि हुसैन सुहरावर्दी के हाथ बेगुनाहों के खून से रंगे थे और विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने पर नकवी ने कहा — 'खानदानी विरासत झटके पर झटका खा रही है।' नीट परीक्षा विवाद को नकवी ने 'पैराशूट पॉलिटिक्स' करार देते हुए विपक्ष पर युवाओं में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन को नकवी ने '440 का झटका' लगने की भविष्यवाणी की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने 22 जून को कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि हुसैन सुहरावर्दी के हाथ बेगुनाहों के खून से रंगे थे और यह इतिहास की हकीकत है। नकवी ने नीट परीक्षा विवाद, शिवसेना (यूबीटी) में टूट और उत्तर प्रदेश चुनावी गठबंधन पर भी तीखी टिप्पणियाँ कीं।

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलना क्यों उचित

नकवी ने कहा, "आजादी की लड़ाई के दौरान सुहरावर्दी ने सैकड़ों लोगों के कत्ल कराए थे। हुसैन सुहरावर्दी के हाथ बेगुनाहों के खून से रंगे हुए थे, ये इतिहास की हकीकत है।" उन्होंने आगे कहा, "भारत का इतिहास सुहरावर्दी जैसे खलनायकों की करतूतों से भरा हुआ है। ऐसे में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदला जाना उचित था, लेकिन विपक्ष को यह बात हजम नहीं हो रही।"

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने का आदेश दिया है। इस फैसले को लेकर विपक्षी दल BJP सरकार पर निशाना साध रहे हैं। नकवी ने कहा कि "विपक्ष शर्मिंदगी की बजाय सुहरावर्दी के नाम को लेकर राजनीति कर रहा है।"

शिवसेना (यूबीटी) में टूट पर नकवी की चुटीली टिप्पणी

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने पर नकवी ने कहा, "खानदानी विरासत झटके पर झटका खा रही है। जब अपने ही लोगों को बिकाऊ कहेंगे तो वे टिकाऊ कैसे रहेंगे?" उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) गुट को आत्मचिंतन करने की सलाह दी और पूछा कि आखिर पार्टी क्यों सिमटती जा रही है और क्यों लोग छोड़कर जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधनों की स्थिरता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

नीट परीक्षा विवाद पर कड़ा प्रहार

नीट परीक्षा विवाद को लेकर नकवी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "छात्रों की परीक्षा पर छत्रपों की जो पैराशूट पॉलिटिक्स है, यह नौजवानों के भविष्य पर भय और भ्रमजाल फैलाने की कोशिश है।" उनका इशारा उन राजनीतिक दलों की ओर था जो नीट विवाद को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन पर तंज

उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के संभावित गठबंधन पर नकवी ने कहा, "दोनों पार्टियों को चुनाव में 440 का झटका लगेगा। इनके झांसे की झालर में अभी से झोल और शॉर्ट-सर्किट भी दिखाई पड़ रहा है।" उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

योग दिवस और मोदी सरकार की विरासत

इससे पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नकवी ने कहा था कि जब 2014 में लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनादेश दिया, तो भारत की हजारों साल पुरानी विरासत 'योग' को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिशें की गईं। उन्होंने कहा कि इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि आज दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। नकवी की इन टिप्पणियों से स्पष्ट है कि BJP आने वाले समय में इतिहास, शिक्षा और चुनावी गठजोड़ — तीनों मोर्चों पर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नाम-बदलाव की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक साथ चार मुद्दों पर एकसाथ हमला बोलना BJP की 'मल्टी-फ्रंट मैसेजिंग' की झलक देता है, जो मीडिया चक्र को नियंत्रित करने का आज़माया हुआ तरीका है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये बयान जमीनी स्तर पर, खासकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में, मतदाताओं की राय बदल पाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम क्यों बदला गया?
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' करने का आदेश दिया। BJP का तर्क है कि हुसैन सुहरावर्दी आजादी की लड़ाई के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के लिए जिम्मेदार थे और उनके नाम पर सड़क का नाम रखना उचित नहीं था।
मुख्तार अब्बास नकवी ने नीट विवाद पर क्या कहा?
नकवी ने नीट परीक्षा विवाद पर विपक्ष की भूमिका को 'पैराशूट पॉलिटिक्स' करार दिया और कहा कि यह नौजवानों के भविष्य पर भय और भ्रम फैलाने की कोशिश है। उनका आरोप था कि राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दे को चुनावी हथियार बना रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) में टूट पर नकवी का क्या रुख है?
नकवी ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने पर कहा कि 'खानदानी विरासत झटके पर झटका खा रही है।' उन्होंने पार्टी को आत्मचिंतन की सलाह दी और कहा कि जब अपने लोगों को ही बिकाऊ कहा जाएगा तो वे टिकाऊ कैसे रहेंगे।
उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर नकवी की क्या राय है?
नकवी ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पार्टियों को चुनाव में '440 का झटका' लगेगा। उन्होंने इस गठजोड़ में अभी से 'झोल और शॉर्ट-सर्किट' दिखाई देने की बात कही।
हुसैन सुहरावर्दी कौन थे और उनका इतिहास क्यों विवादित है?
हुसैन सुहरावर्दी ब्रिटिश भारत में बंगाल के प्रमुख राजनेता थे और बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। BJP और कुछ इतिहासकारों के अनुसार, 1946 की 'डायरेक्ट एक्शन डे' हिंसा में उनकी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाते हैं, जिसमें कलकत्ता में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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