पश्चिम बंगाल में बिजली चोरी रोकने के लिए सीएम सुवेंदु अधिकारी ने लॉन्च किया 'विद्युत प्रहरी ऐप'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 21 जुलाई को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित विद्युत भवन से 'विद्युत प्रहरी ऐप' का उद्घाटन किया, जो नागरिकों को बिजली चोरी की शिकायतें सीधे और तत्काल दर्ज कराने की सुविधा देगा। इसी अवसर पर उन्होंने बिजली विभाग में बड़े पैमाने पर पारदर्शी भर्ती अभियान की भी घोषणा की।
विद्युत प्रहरी ऐप क्या है और कैसे काम करेगा
राज्य सरकार द्वारा लॉन्च किया गया यह ऐप आम नागरिकों को बिजली चोरी की घटनाएँ रिपोर्ट करने का एक सीधा और तेज़ माध्यम देता है। अब तक कोलकाता के आसपास के जिलों और दूरदराज के गाँवों में बिजली चोरी की शिकायतें तो दर्ज होती थीं, लेकिन उनके समाधान की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। इस ऐप के ज़रिए शिकायतों के त्वरित निपटारे का वादा किया गया है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
उद्घाटन के दौरान अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'आप ऐप के ज़रिए बिजली चोरी से जुड़ी सभी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इनका जल्द समाधान किया जाएगा। बिजली विभाग बहुत महत्वपूर्ण है। भविष्य में कई और काम भी किए जाएंगे।' उन्होंने दो-टूक कहा कि बिजली चोरी को शून्य तक लाना होगा और कमर्शियल बिल्डिंग्स के बकाया बिजली बिलों पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू होगी।
अधिकारी ने यह भी माना कि कई कमर्शियल प्रतिष्ठानों के मालिक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के करीबी हैं, जिसके कारण बकाया वसूली में ढिलाई बरती जाती रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नोटिस भेजे जाएँ और बकाया वसूला जाए, हालाँकि घरेलू उपभोक्ताओं के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की भी हिदायत दी।
भर्ती में पारदर्शिता की माँग
मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग में भर्ती प्रक्रिया में व्याप्त अनियमितताओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 'भर्ती का एक नियम होना चाहिए। अगर कोई मंत्री आकर किसी से कहता है कि मेरे लोगों को देखो, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। लेकिन मैं नहीं चाहता कि भर्ती इस तरह हो। पढ़ाई पूरी करने के बाद हर किसी को सही तरीके से नौकरी मिलनी चाहिए।' उन्होंने घोषणा की कि अब बिजली विभाग की भर्ती का समस्त कार्य पब्लिक सर्विस कमीशन को सौंपा जाएगा।
आम जनता पर असर
यह ऐप विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ बिजली चोरी सामान्य घटना बन चुकी है और ईमानदार उपभोक्ताओं पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ता है। गौरतलब है कि बिजली चोरी से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान होता है, जो अंततः बुनियादी ढाँचे के विकास को प्रभावित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार के अनुसार, बकाया बिलों की वसूली के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी और पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से भर्ती का विस्तृत कार्यक्रम भी जल्द घोषित किया जाएगा। अधिकारी ने संकेत दिया कि बिजली विभाग में और भी सुधारों पर चर्चा जारी है।