तमिलनाडु चुनावों से पहले 1,200 करोड़ की सामग्री जब्त, कार्रवाई तेज
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए 23 अप्रैल को होने वाली मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं। इस बीच, चुनाव अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई को और अधिक कड़ा कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप पूरे राज्य में भारी मात्रा में नकद, सोना, मादक पदार्थ, शराब और अन्य प्रलोभन देने वाली वस्तुओं की जब्ती की गई है। जांच और छापेमारी के दौरान अब तक कुल 1,200 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई है।
चुनाव निगरानी टीमों द्वारा सीधे तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और मूल्यवान वस्तुएं जब्त की गई हैं। आयकर विभाग और अप्रत्यक्ष कर अधिकारियों जैसे प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतंत्र अभियानों के जरिए इस कुल राशि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नकद के अलावा, अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में शराब और प्रतिबंधित पदार्थ भी जब्त किए हैं, जो यह दर्शाता है कि अवैध तरीकों से मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयत्न जारी हैं। कई क्षेत्रों से प्रलोभन बांटने की खबरें आई हैं, जिनमें कूपन और मुफ्त उपहार शामिल हैं। ये खबरें विशेषतः शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से आई हैं।
इस कार्रवाई के दौरान आदर्श आचार संहिता और अन्य चुनावी कानूनों के उल्लंघन से जुड़े लगभग 100 मामले दर्ज किए गए हैं।
तिरुवल्लूर में सबसे अधिक और इसके बाद चेन्नई में जब्ती हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उन महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां चुनावी मुकाबला कड़ा है।
अधिकारियों ने बताया कि पूरे राज्य में 95 प्रतिशत से अधिक मतदाता सूचना पर्चियां पहले ही वितरित की जा चुकी हैं। कुछ क्षेत्रों में पहचानी गई कमियों को दूर करने के प्रयास जारी हैं। मतदान के दिन से पहले लगभग पूरी कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
कुल 234 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से 105 को 'अति-संवेदनशील' श्रेणी में रखा गया है, जहां अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता है। इसके अलावा, 5,938 पोलिंग बूथों को संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां सुचारू और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों और निगरानी तंत्र की तैनाती बढ़ाई गई है।
85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों सहित दो लाख से अधिक मतदाताओं ने डाक मतपत्र प्रणाली के माध्यम से पहले ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है।
चुनावी प्रक्रिया की देखरेख के लिए अधिकारियों ने बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों को तैनात किया है, जिनमें खर्च, सामान्य आचरण और कानून-व्यवस्था की निगरानी करने वाले पर्यवेक्षक शामिल हैं। विभिन्न जिलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।