तमिलनाडु की 264 हेरिटेज इमारतें होंगी पुनर्जीवित, PWD ने बनाई संरक्षण और व्यावसायिक उपयोग की योजना
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु का लोक निर्माण विभाग (PWD) राज्य की 264 हेरिटेज इमारतों को बहाल करने, संरक्षित करने और उनका व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य इन ऐतिहासिक संरचनाओं की स्थापत्य विरासत को बचाना और साथ ही टिकाऊ आय के ज़रिए इनके दीर्घकालिक रखरखाव को सुनिश्चित करना है।
किन इमारतों की बात हो रही है
अधिकारियों के अनुसार, PWD के नियंत्रण में आने वाली ये 264 इमारतें चोल, नायक तथा दक्षिण भारत के अन्य राजवंशों के साथ-साथ मुगल और ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की स्थापत्य धरोहर को समेटे हुए हैं। इनमें से अनेक इमारतें राज्य के सांस्कृतिक और प्रशासनिक इतिहास के अपरिहार्य प्रमाण हैं।
चेन्नई में सर्वाधिक 58 हेरिटेज इमारतें हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 20, तंजावुर में 17 और कन्याकुमारी, मदुरै तथा सलेम में 12-12 इमारतें हैं। पुदुक्कोट्टई में 10, जबकि तिरुप्पुर और तिरुवन्नामलाई में 9-9 इमारतें विभाग की देखरेख में हैं। शेष ज़िलों में एक या दो हेरिटेज संरचनाएँ हैं।
मौजूदा स्थिति और चुनौतियाँ
इनमें से अधिकांश इमारतों का उपयोग फिलहाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, न्यायपालिका, उच्च शिक्षा और राजस्व जैसे सरकारी विभाग कर रहे हैं। हालाँकि, उचित रखरखाव के अभाव और संरक्षण-केंद्रित प्रबंधन की कमी के कारण कई इमारतें जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी हैं।
PWD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों में काम करने वाले कई सरकारी विभागों को इनके हेरिटेज महत्व की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्षों में किए गए संरचनात्मक बदलाव, आधुनिक जोड़-तोड़ और लापरवाह रखरखाव ने इनके मूल स्थापत्य स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।
संरक्षण की रणनीति
विभाग ने सर्वाधिक जीर्ण-शीर्ण इमारतों की पहचान शुरू कर दी है और संरक्षण कार्यों के लिए पर्याप्त निधि आवंटित की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि केवल मरम्मत कर इन्हें पुनः सरकारी दफ्तरों को सौंप देने से ये इमारतें और तेज़ी से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में हेरिटेज संपत्तियों के संरक्षण और उनके सक्रिय उपयोग के बीच संतुलन को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि राजस्थान और गोवा जैसे राज्यों ने हेरिटेज होटल और सांस्कृतिक केंद्र मॉडल से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
पर्यटन और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएँ
राज्य सरकार बहाल की गई हेरिटेज संपत्तियों को पर्यटन परिसंपत्तियों में बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है, ताकि इनसे नियमित आय भी हो और इनका ऐतिहासिक महत्व भी अक्षुण्ण रहे। पर्यटन विभाग के साथ ऐसे उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान के लिए बातचीत जारी है जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें।
यदि पर्यटन विभाग इन संपत्तियों की जिम्मेदारी नहीं लेता, तो PWD वैकल्पिक मॉडलों पर विचार कर रहा है — जिनमें लाइट-एंड-साउंड शो, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफे और पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएँ शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मूल लक्ष्य हेरिटेज संरक्षण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है, ताकि तमिलनाडु की ये ऐतिहासिक इमारतें उपेक्षित स्मारकों की बजाय जीवंत सार्वजनिक स्थल बनी रहें।