25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु की 264 हेरिटेज इमारतें होंगी पुनर्जीवित, PWD ने बनाई संरक्षण और व्यावसायिक उपयोग की योजना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु की 264 हेरिटेज इमारतें होंगी पुनर्जीवित, PWD ने बनाई संरक्षण और व्यावसायिक उपयोग की योजना

सारांश

तमिलनाडु PWD की 264 हेरिटेज इमारतों को बचाने की यह योजना सिर्फ मरम्मत नहीं — यह विरासत को आय का स्रोत बनाने का प्रयास है। चोल से लेकर ब्रिटिश काल तक की ये इमारतें अब पर्यटन परिसंपत्तियों में तब्दील हो सकती हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु PWD के नियंत्रण में 264 हेरिटेज इमारतें हैं, जो चोल, नायक, मुगल और ब्रिटिश काल की हैं।
चेन्नई में सर्वाधिक 58 हेरिटेज इमारतें हैं; कोयंबटूर में 20 और तंजावुर में 17 ।
अधिकांश इमारतें स्वास्थ्य, न्यायपालिका, उच्च शिक्षा और राजस्व विभागों के उपयोग में हैं, लेकिन खराब रखरखाव से जर्जर हो रही हैं।
सरकार इन्हें पर्यटन परिसंपत्तियों में बदलने पर विचार कर रही है — लाइट-एंड-साउंड शो , हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर और कैफे जैसे मॉडल प्रस्तावित।
PWD और पर्यटन विभाग के बीच उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान के लिए बातचीत जारी है।

तमिलनाडु का लोक निर्माण विभाग (PWD) राज्य की 264 हेरिटेज इमारतों को बहाल करने, संरक्षित करने और उनका व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य इन ऐतिहासिक संरचनाओं की स्थापत्य विरासत को बचाना और साथ ही टिकाऊ आय के ज़रिए इनके दीर्घकालिक रखरखाव को सुनिश्चित करना है।

किन इमारतों की बात हो रही है

अधिकारियों के अनुसार, PWD के नियंत्रण में आने वाली ये 264 इमारतें चोल, नायक तथा दक्षिण भारत के अन्य राजवंशों के साथ-साथ मुगल और ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की स्थापत्य धरोहर को समेटे हुए हैं। इनमें से अनेक इमारतें राज्य के सांस्कृतिक और प्रशासनिक इतिहास के अपरिहार्य प्रमाण हैं।

चेन्नई में सर्वाधिक 58 हेरिटेज इमारतें हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 20, तंजावुर में 17 और कन्याकुमारी, मदुरै तथा सलेम में 12-12 इमारतें हैं। पुदुक्कोट्टई में 10, जबकि तिरुप्पुर और तिरुवन्नामलाई में 9-9 इमारतें विभाग की देखरेख में हैं। शेष ज़िलों में एक या दो हेरिटेज संरचनाएँ हैं।

मौजूदा स्थिति और चुनौतियाँ

इनमें से अधिकांश इमारतों का उपयोग फिलहाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, न्यायपालिका, उच्च शिक्षा और राजस्व जैसे सरकारी विभाग कर रहे हैं। हालाँकि, उचित रखरखाव के अभाव और संरक्षण-केंद्रित प्रबंधन की कमी के कारण कई इमारतें जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी हैं।

PWD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों में काम करने वाले कई सरकारी विभागों को इनके हेरिटेज महत्व की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्षों में किए गए संरचनात्मक बदलाव, आधुनिक जोड़-तोड़ और लापरवाह रखरखाव ने इनके मूल स्थापत्य स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।

संरक्षण की रणनीति

विभाग ने सर्वाधिक जीर्ण-शीर्ण इमारतों की पहचान शुरू कर दी है और संरक्षण कार्यों के लिए पर्याप्त निधि आवंटित की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि केवल मरम्मत कर इन्हें पुनः सरकारी दफ्तरों को सौंप देने से ये इमारतें और तेज़ी से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में हेरिटेज संपत्तियों के संरक्षण और उनके सक्रिय उपयोग के बीच संतुलन को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि राजस्थान और गोवा जैसे राज्यों ने हेरिटेज होटल और सांस्कृतिक केंद्र मॉडल से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

पर्यटन और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएँ

राज्य सरकार बहाल की गई हेरिटेज संपत्तियों को पर्यटन परिसंपत्तियों में बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है, ताकि इनसे नियमित आय भी हो और इनका ऐतिहासिक महत्व भी अक्षुण्ण रहे। पर्यटन विभाग के साथ ऐसे उपयुक्त परियोजनाओं की पहचान के लिए बातचीत जारी है जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकें।

यदि पर्यटन विभाग इन संपत्तियों की जिम्मेदारी नहीं लेता, तो PWD वैकल्पिक मॉडलों पर विचार कर रहा है — जिनमें लाइट-एंड-साउंड शो, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफे और पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएँ शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मूल लक्ष्य हेरिटेज संरक्षण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है, ताकि तमिलनाडु की ये ऐतिहासिक इमारतें उपेक्षित स्मारकों की बजाय जीवंत सार्वजनिक स्थल बनी रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। देश में हेरिटेज संपत्तियों के 'व्यावसायिक उपयोग' के नाम पर मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की मिसालें कम नहीं हैं — लाइट-एंड-साउंड शो और कैफे का आकर्षण कहीं इन इमारतों की प्रामाणिकता की कीमत पर न आए। यह भी विचारणीय है कि जिन सरकारी विभागों को इन इमारतों के हेरिटेज महत्व की जानकारी नहीं थी, उन्हें हटाकर जो नया प्रबंधन आएगा, उसके पास संरक्षण की विशेषज्ञता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का ढाँचा होना अनिवार्य है। बिना स्वतंत्र हेरिटेज ऑडिट और पारदर्शी वित्तीय मॉडल के, यह पहल एक और सरकारी घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु PWD की हेरिटेज इमारत संरक्षण योजना क्या है?
तमिलनाडु का लोक निर्माण विभाग (PWD) अपने नियंत्रण की 264 हेरिटेज इमारतों को बहाल कर उन्हें पर्यटन परिसंपत्तियों में बदलने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य स्थापत्य विरासत को संरक्षित करना और व्यावसायिक गतिविधियों से नियमित रखरखाव की लागत जुटाना है।
तमिलनाडु में किस ज़िले में सबसे ज़्यादा हेरिटेज इमारतें हैं?
चेन्नई में सर्वाधिक 58 हेरिटेज इमारतें PWD के अधीन हैं। इसके बाद कोयंबटूर में 20, तंजावुर में 17 और कन्याकुमारी, मदुरै तथा सलेम में 12-12 इमारतें हैं।
इन हेरिटेज इमारतों की खराब हालत के लिए कौन जिम्मेदार है?
PWD के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन इमारतों में काम करने वाले सरकारी विभागों को इनके हेरिटेज महत्व की जानकारी नहीं थी। वर्षों में किए गए संरचनात्मक बदलाव, आधुनिक जोड़-तोड़ और अपर्याप्त रखरखाव ने इनके मूल स्थापत्य स्वरूप को नुकसान पहुँचाया है।
इन इमारतों के व्यावसायिक उपयोग के लिए क्या विकल्प सोचे जा रहे हैं?
सरकार इन्हें पर्यटन परिसंपत्तियों में बदलने पर विचार कर रही है। यदि पर्यटन विभाग जिम्मेदारी नहीं लेता, तो PWD लाइट-एंड-साउंड शो, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफे और अन्य पर्यटक सुविधाएँ शुरू करने के मॉडल पर विचार कर रहा है।
इस योजना से आम जनता को क्या फायदा होगा?
योजना के तहत ये इमारतें उपेक्षित स्मारकों की बजाय जीवंत सार्वजनिक स्थल बनेंगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। साथ ही, आने वाली पीढ़ियों के लिए तमिलनाडु की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले