तमिलनाडु का सौर ऊर्जा में नया कीर्तिमान: एक दिन में 60.4 मिलियन यूनिट उत्पादन
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु ने 7 जुलाई 2025 (सोमवार) को एकदिवसीय सौर ऊर्जा उत्पादन में नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया, जब राज्य के सौर संयंत्रों ने एक ही दिन में 60.4 मिलियन यूनिट (MU) बिजली का उत्पादन किया। यह उपलब्धि 18 अप्रैल को दर्ज 58.6 मिलियन यूनिट के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ती है और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तमिलनाडु की बढ़ती ताकत को रेखांकित करती है।
रिकॉर्ड उत्पादन के पीछे के कारण
ऊर्जा अधिकारियों के अनुसार, साफ आसमान, लंबे समय तक दिन का उजाला और तीव्र गर्मी की धूप इस असाधारण उत्पादन के प्रमुख कारण रहे। इन अनुकूल परिस्थितियों ने सौर संयंत्रों को पूरे दिन उच्च दक्षता के साथ संचालित होने का अवसर दिया। तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (TNGECL) के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वर्ष में लगभग 300 दिन पर्याप्त सौर विकिरण उपलब्ध रहता है, जो इसे बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत के सर्वाधिक अनुकूल क्षेत्रों में से एक बनाता है।
बिजली खपत और ताप संयंत्रों पर असर
तमिलनाडु ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TANTRANSCO) के आंकड़ों के अनुसार, उसी दिन राज्य की कुल बिजली खपत 429.057 मिलियन यूनिट रही। अधिकारियों ने बताया कि सौर उत्पादन में इस तीव्र वृद्धि ने दिन के व्यस्ततम घंटों में बिजली मांग को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाई और ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई।
स्थापित क्षमता में तेज़ विस्तार
तमिलनाडु की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता पिछले एक वर्ष में तेज़ी से बढ़ी है। 31 मार्च 2025 तक यह 10,153 मेगावाट थी, जो 31 मई 2025 तक बढ़कर 13,909 मेगावाट हो गई — यानी केवल 12 महीनों में 3,756 मेगावाट की वृद्धि। यह विस्तार बड़े सौर पार्कों, निजी क्षेत्र के निवेश और किसानों तथा वाणिज्यिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से संभव हुआ है।
आगे की योजना
TNGECL ने चालू वित्त वर्ष में कम से कम 5,000 मेगावाट नई सौर क्षमता जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और किसानों के निरंतर समर्थन से राज्य यह लक्ष्य हासिल करने में सफल होगा। यह नया कीर्तिमान तमिलनाडु को भारत के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादकों में और मज़बूती से स्थापित करता है तथा दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम है।