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नकली बीपी दवा रैकेट का पर्दाफाश: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपी दबोचे, UP-राजस्थान तक फैला नेटवर्क

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नकली बीपी दवा रैकेट का पर्दाफाश: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपी दबोचे, UP-राजस्थान तक फैला नेटवर्क

सारांश

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने नकली बीपी दवा 'निकार्डिया रिटार्ड 10' के अंतर-राज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। लखनऊ से गुजरात तक फैली इस सप्लाई चेन में शामिल दो आरोपी पहले भी पुणे में नकली दवा मामले में पकड़े जा चुके हैं।

मुख्य बातें

अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने 26 अगस्त 2025 की रात तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया — दर्शिल संघवी (अहमदाबाद), देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी (दोनों लखनऊ)।
आरोपियों पर नकली 'निकार्डिया रिटार्ड 10' (निफेडिपाइन 10 मिलीग्राम) बीपी दवा की खरीद, वितरण और बिक्री का आरोप है।
नकली दवा की सप्लाई चेन उत्तर प्रदेश और राजस्थान से गुजरात के कई जिलों — अहमदाबाद, नडियाद, भुज, कच्छ — तक फैली थी।
देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को इससे पहले जून में पुणे में भी नकली दवा के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
FDCA की कार्रवाई में 30 से अधिक मेडिकल स्टोर और एजेंसियों का निरीक्षण हुआ; BNS 2023 की 12 धाराओं के तहत FIR दर्ज।
पुलिस टीमें जयपुर, लखनऊ और अन्य जिलों में तैनात; नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश जारी।

अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने 26 अगस्त 2025 की रात करीब 9:45 बजे एक अंतर-राज्यीय नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों पर नकली ब्लड-प्रेशर दवा 'निकार्डिया रिटार्ड 10' की खरीद, वितरण और बिक्री का आरोप है, जो उत्तर प्रदेश और राजस्थान से होते हुए गुजरात के मेडिकल आउटलेट्स तक पहुँची। जांच में सामने आया है कि यह सप्लाई चेन कई राज्यों में फैली हुई थी और इसमें शामिल कुछ आरोपी पहले भी नकली दवा के मामलों में पकड़े जा चुके हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने 19 अगस्त को गुजरात फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) में शिकायत दर्ज कराई कि बाज़ार में उनकी दवा 'निकार्डिया रिटार्ड 10 (निफेडिपाइन सस्टेन्ड रिलीज़ टैबलेट IP 10 मिलीग्राम)' की नकली प्रतियाँ चल रही हैं। कंपनी के अनुसार, नकली दवा का बैच नंबर ACG25007 था, जिसे कथित तौर पर जून 2025 में निर्मित दिखाया गया था और इसकी एक्सपायरी मई 2028 दर्शाई गई थी। इसके बाद कंपनी ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत से भी शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच और FDCA ने संयुक्त जांच शुरू की।

सप्लाई चेन का खुलासा

जांचकर्ताओं ने पाया कि नकली दवा का स्टॉक अहमदाबाद के पालड़ी इलाके की 'पार्श्व मेडिकल एजेंसी' के ज़रिए वितरित हुआ। इस एजेंसी को यह स्टॉक कथित तौर पर लखनऊ की 'सेना मेडिकल' से मिला था। इसके अलावा, कच्छ में मिले स्टॉक का संबंध जयपुर की 'एवीआर मेडिकोज़' से भी सामने आया। अधिकारियों ने नडियाद के 'किशन मेडिकल स्टोर' से उक्त बैच की 30 स्ट्रिप्स ज़ब्त कीं। भुज में 'नवकार मेडिकल एजेंसी' और 'महादेव मेडिकल एजेंसी' से भी दवा बरामद की गई। FDCA की पूर्व कार्रवाई में 30 से अधिक मेडिकल स्टोर और एजेंसियों का निरीक्षण किया गया था।

तीन आरोपी गिरफ्तार, पृष्ठभूमि

गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी हैं — अहमदाबाद के पालड़ी निवासी दर्शिल संघवी (39 वर्ष), लखनऊ निवासी देवेंद्र यादव (39 वर्ष), और लखनऊ निवासी उमंग रस्तोगी (34 वर्ष)। पुलिस के अनुसार, संघवी ने नकली स्टॉक हासिल कर उसे अहमदाबाद और अन्य शहरों में सब-डिस्ट्रीब्यूटरों को सप्लाई किया। देवेंद्र पर कम कीमत पर नकली दवाएँ खरीदकर गुजरात में सप्लाई का इंतज़ाम करने का आरोप है, जबकि उमंग ने कथित तौर पर दवाएँ खरीदकर उनकी बिक्री में मदद करते हुए कमीशन कमाया। गौरतलब है कि देवेंद्र और उमंग को इससे पहले जून में पुणे के विश्रामनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज नकली दवा के एक अलग मामले में भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उमंग के खिलाफ सितंबर 2022 में GST अधिनियम के तहत भी एक मामला दर्ज है। संघवी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

आरोपों की गंभीरता

क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपियों ने असली उत्पाद के नाम, लेबल और बैच विवरण की हूबहू नकल कर ऐसी टैबलेट तैयार कीं, जिन्हें प्रामाणिक दवा से अलग पहचानना अत्यंत कठिन था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि ऐसी नकली दवाएँ मरीज़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं या उनकी मौत का कारण बन सकती हैं, फिर भी उन्होंने आर्थिक लाभ के लिए इनकी सप्लाई जारी रखी। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 276, 277, 316(4), 336(2), 336(3), 338, 339, 340(2), 341(1), 111, 49 और 61 के तहत DCB पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।

आगे की जांच

नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में शामिल अन्य संदिग्धों का पता लगाने के लिए पुलिस टीमें जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद और अन्य जिलों में भेजी गई हैं। क्राइम ब्रांच ने उन मेडिकल स्टोर, एजेंसियों, अस्पतालों और मरीज़ों से जांच अधिकारी से संपर्क करने की अपील की है, जिन्हें गिरफ्तार आरोपियों या उनके नेटवर्क से संदिग्ध नकली दवा मिली हो। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक उभरते हुए ढाँचागत संकट का संकेत है — दो प्रमुख आरोपी पहले ही पुणे में नकली दवा के मामले में गिरफ्तार हो चुके थे, फिर भी उन्होंने नेटवर्क जारी रखा। यह सवाल उठाता है कि ज़मानत मिलने के बाद निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है। ब्लड-प्रेशर जैसी जीवन-रक्षक दवाओं की नकल करना सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं — यह सीधे मरीज़ों की जान से खिलवाड़ है। FDCA और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या आपूर्ति श्रृंखला की जड़ — निर्माण स्थल — तक पहुँचा जाएगा, या केवल वितरकों को पकड़कर मामला बंद कर दिया जाएगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में नकली बीपी दवा रैकेट क्या है?
अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जो नकली 'निकार्डिया रिटार्ड 10' ब्लड-प्रेशर दवा की खरीद, वितरण और बिक्री में लिप्त था। यह नकली दवा उत्तर प्रदेश और राजस्थान से गुजरात के मेडिकल आउटलेट्स तक पहुँचाई जा रही थी।
गिरफ्तार तीन आरोपी कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
गिरफ्तार आरोपी हैं — अहमदाबाद के पालड़ी निवासी दर्शिल संघवी (39), और लखनऊ निवासी देवेंद्र यादव (39) तथा उमंग रस्तोगी (34)। संघवी पर नकली स्टॉक हासिल कर वितरित करने, देवेंद्र पर सप्लाई का इंतज़ाम करने और उमंग पर बिक्री में मदद कर कमीशन कमाने का आरोप है।
नकली 'निकार्डिया रिटार्ड 10' की पहचान कैसे हुई?
जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स ने 19 अगस्त को FDCA में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी दवा की नकली प्रतियाँ बाज़ार में हैं। नकली दवा का बैच नंबर ACG25007 था, जिसे जून 2025 में निर्मित और मई 2028 तक वैध दिखाया गया था।
क्या इन आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड है?
हाँ, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को जून में पुणे के विश्रामनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज नकली दवा के एक अलग मामले में पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। उमंग के खिलाफ सितंबर 2022 में GST अधिनियम के तहत भी एक मामला दर्ज है।
इस मामले में आगे की जांच कहाँ तक पहुँची है?
पुलिस टीमें जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद और अन्य जिलों में तैनात की गई हैं। क्राइम ब्रांच ने उन मेडिकल स्टोर, अस्पतालों और मरीज़ों से संपर्क करने की अपील की है जिन्हें संदिग्ध नकली दवा मिली हो। जांच अभी जारी है और और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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