24 जुलाई 2026
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जेपीएससी परीक्षा घोटाला: सीआईडी ने टीडीपीएल के तीन कर्मचारी गिरफ्तार किए, अब तक 8 आरोपी हिरासत में

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जेपीएससी परीक्षा घोटाला: सीआईडी ने टीडीपीएल के तीन कर्मचारी गिरफ्तार किए, अब तक 8 आरोपी हिरासत में

सारांश

जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी की जांच तेज़ हो गई है — टीडीपीएल के तीन और कर्मचारियों की गिरफ्तारी के साथ कुल आरोपियों की संख्या आठ पहुँची। असली सवाल यह है कि जेएसएससी द्वारा ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एजेंसी को जेपीएससी का ठेका कैसे मिला।

मुख्य बातें

सीआईडी ने टीडीपीएल के कर्मचारी हेमंत वर्मा , प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को गिरफ्तार किया।
जेपीएससी परीक्षा घोटाले में अब तक कुल 8 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
पहले गिरफ्तार 5 आरोपी अदालत के आदेश पर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं।
रांची के दो होटलों में छापेमारी; बरामदगी की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं।
सीआईडी जांच कर रही है कि जेएसएससी द्वारा 2025 में ब्लैकलिस्ट की गई टीडीपीएल को जेपीएससी परीक्षाओं का ठेका कैसे मिला।
मामला बीएनएस और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के तहत कांड संख्या 16/2026 में दर्ज।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के मामले में सीआईडी ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या आठ हो गई है। गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मचारी हैं।

नई गिरफ्तारियाँ: कौन हैं तीनों आरोपी

सीआईडी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार — तीनों टीडीपीएल के कर्मचारी हैं। इन तीनों से परीक्षा संचालन और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि इनसे मिली जानकारी जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

पहले से हिरासत में पाँच आरोपी

इससे पहले सीआईडी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी तथा कंपनी के कर्मचारी मो. उस्मान और मो. एबाद को गिरफ्तार किया था। अदालत के आदेश पर इन पाँचों को पाँच दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

छापेमारी और डिजिटल साक्ष्य

सीआईडी ने जेपीएससी मुख्यालय और टीडीपीएल के कार्यालयों में छापेमारी कर सर्वर, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित कई डिजिटल उपकरण व परीक्षा संबंधी दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच के ज़रिए यह पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में ओएमआर डेटा या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई थी या नहीं। इसके अलावा, रांची पुलिस के सहयोग से शहर के दो होटलों में भी छापेमारी की गई है, हालाँकि वहाँ से क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ठेका देने की जांच

इस मामले में एक अहम पहलू यह है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा वर्ष 2025 में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी टीडीपीएल को जेपीएससी की परीक्षाओं का जिम्मा किन परिस्थितियों में सौंपा गया — इसकी भी जांच सीआईडी कर रही है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि इस प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही। यह सवाल मामले को और गहरा बनाता है, क्योंकि एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का सरकारी परीक्षाओं में बने रहना प्रशासनिक चूक या मिलीभगत, दोनों में से किसी की ओर इशारा करता है।

कानूनी ढाँचा और आगे की जांच

इस पूरे मामले में सीआईडी थाने में कांड संख्या 16/2026 दर्ज की गई है। जांच भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत की जा रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच जारी रखे हुए है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी की आशंका की ओर इशारा करता है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और ब्लैकलिस्टिंग के बावजूद ठेका देने की परिस्थितियाँ — ये दो बिंदु जांच की असली कसौटी होंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी परीक्षा घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
इस मामले में अब तक कुल 8 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। शुक्रवार को टीडीपीएल के तीन कर्मचारियों — हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार — की गिरफ्तारी के बाद यह संख्या पाँच से बढ़कर आठ हो गई।
टीडीपीएल क्या है और इसकी इस मामले में क्या भूमिका है?
टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) जेपीएससी परीक्षाओं के संचालन और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह एजेंसी जेएसएससी द्वारा 2025 में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी थी, फिर भी इसे जेपीएससी परीक्षाओं का ठेका दिया गया — जिसकी परिस्थितियों की अब जांच हो रही है।
सीआईडी ओएमआर डेटा में छेड़छाड़ की जांच क्यों कर रही है?
सीआईडी की एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में ओएमआर डेटा या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई थी या नहीं। इसके लिए जेपीएससी मुख्यालय और टीडीपीएल कार्यालयों से जब्त सर्वर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इस मामले में कौन-से कानूनों के तहत जांच हो रही है?
जांच भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत की जा रही है। सीआईडी थाने में इस मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज है।
जेपीएससी घोटाले से झारखंड के अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस मामले में ओएमआर डेटा से कथित छेड़छाड़ की आशंका के चलते जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। फॉरेंसिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित परीक्षाओं के परिणामों की समीक्षा या पुनर्मूल्यांकन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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