नारायणपुर नक्सल विस्फोटक मामला: तीन दोषियों को 7 साल की कड़ी सजा, UAPA के तहत भी दंड
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सली गतिविधियों के लिए विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति करने के मामले में एनआईए एक्ट के तहत गठित स्पेशल कोर्ट ने तीन आरोपियों — चमेली बाई, रवि मरकाम उर्फ सुशील और कोस्रू वड्डे — को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। 11 अगस्त 2026 को सुनाए गए इस फैसले में विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम सात साल के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
मामले का पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
19 मार्च 2024 को नारायणपुर पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली कि तारागांव में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों ने नक्सलियों तक पहुँचाने के इरादे से विस्फोटक सामग्री को औषधीय जड़ी-बूटियों के बंडलों में छिपाकर रखी है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के पास से चार डेटोनेटर, पोटेशियम नाइट्रेट की सात बोरियाँ, सात मीटर लाल कॉर्डेक्स वायर और दो मोबाइल फोन बरामद किए।
जाँच के दौरान यह स्थापित हुआ कि इन विस्फोटकों को नारायणपुर बाज़ार से तारागांव तक रवि मरकाम और चमेली बाई के माध्यम से नक्सली कैडरों और उनके आपूर्तिकर्ताओं तक पहुँचाने की योजना थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच रायपुर स्थित राज्य जाँच एजेंसी को सौंपी गई।
तीसरे आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नारायणपुर जिले के ओरछा पुलिस स्टेशन क्षेत्र की थुलथुली पंचायत के गावड़ी गाँव निवासी कोस्रू वड्डे — जो मासा वड्डे के पुत्र हैं — की भी इस मामले में संलिप्तता सामने आई। राज्य जाँच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा और जाँच पूरी होने के बाद नारायणपुर की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
अदालत का फैसला और सजा का विवरण
स्पेशल कोर्ट ने गवाहों के बयानों और जाँच में मिले साक्ष्यों के आधार पर तीनों को दोषी पाया। सजा का विवरण इस प्रकार है:
विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4 और 5 के तहत प्रत्येक को सात साल की कड़ी सजा और ₹1,000 का जुर्माना; गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) की धारा 10(1) के तहत दो साल की कड़ी सजा और ₹500 का जुर्माना; तथा यूएपीए की अन्य धाराओं के तहत पाँच साल की कड़ी सजा और प्रत्येक पर ₹500 का जुर्माना लगाया गया है।
पुलिस और जाँच एजेंसी की प्रतिक्रिया
नारायणपुर पुलिस और राज्य जाँच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि नक्सल गतिविधियों को किसी भी रूप में समर्थन देने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने नक्सल-विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। गौरतलब है कि नारायणपुर जिला लंबे समय से माओवादी प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है और विस्फोटक आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता रही है। यह फैसला नक्सल लॉजिस्टिक नेटवर्क के विरुद्ध न्यायिक कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।