अरनमुला वल्लमकाली 2026: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पम्बा नदी पर किया उद्घाटन, बोले — परंपरा और आधुनिकता साथ चल सकती है
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 30 अगस्त 2026 को केरल की पम्बा नदी पर आयोजित ऐतिहासिक 'अरनमुला उथ्रित्थाथी वल्लमकाली' नौका दौड़ का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि परंपरा और आधुनिकता परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास और विरासत' के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के विविध त्योहार देश की सांस्कृतिक एकता के जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हमारी विविधता बंटवारे का कारण नहीं है — यह हमारी ताकत का स्रोत है।'
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने अरनमुला को केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भक्ति परंपरा और सदियों पुराने लोकजीवन का अनुपम प्रतीक बताया।
वल्लमकाली की विशेषता
उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ओणम और वल्लासाद्य की पवित्र परंपरा से जुड़ी यह नौका दौड़ टीम वर्क, अनुशासन और खेल भावना का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि खूबसूरती से सजाई गई पल्लियोडम नावों पर 100 से अधिक नाविक एकजुट होकर और पूर्ण तालमेल के साथ नाव खेते हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विदेशों में कार्यरत प्रवासी भारतीय भी इस पर्व में भाग लेने के लिए स्वदेश लौटते हैं — जो इस बात का प्रमाण है कि सांस्कृतिक परंपराएँ लोगों को उनकी जड़ों से जोड़े रखती हैं।
केरल के नाम परिवर्तन पर बधाई
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने केरल के नाम परिवर्तन पर राज्यवासियों को बधाई दी। उन्होंने स्मरण किया कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्हें हाल ही में संपन्न संसद सत्र में इस नाम परिवर्तन विधेयक को पारित कराने की अध्यक्षता करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उन्होंने ओणम की भी शुभकामनाएँ दीं।
पम्बा नदी और आध्यात्मिक महत्व
उपराष्ट्रपति ने पम्बा नदी के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सबरीमाला तीर्थयात्रा का अभिन्न अंग है और आस्था, शुद्धि तथा आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सांसद के रूप में नामांकन से कुछ समय पूर्व की गई सबरीमाला की पहली यात्रा उनके लिए विशेष महत्व रखती है और उनका मानना है कि भगवान अयप्पा का आशीर्वाद उनकी बाद की चुनावी सफलता में सहायक रहा।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब देश भर में ओणम उत्सव की तैयारियाँ चल रही हैं और केरल की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल रही है।