सरकारी मशीनरी धार्मिक गतिविधियों से दूर रहे — कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 3 अगस्त को अंबिकापुर में स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म से जुड़ी धार्मिक गतिविधि में सरकारी मशीनरी की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह बात कांवड़ यात्रियों के पैर दबाते पुलिसकर्मियों की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कही।
मुख्य बयान: धर्म और सरकारी तंत्र का मेल खतरनाक
सिंह देव ने कहा, 'किसी भी धर्म से जुड़ी धार्मिक गतिविधि में सरकारी मशीनरी शामिल नहीं होनी चाहिए। हमने अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन में इसके उदाहरण देखे हैं। इसीलिए धार्मिक मामलों को हमेशा राजनीतिक दुरुपयोग से दूर रखना चाहिए।' उन्होंने चेताया कि ऐसा न होने पर धर्म और धार्मिक भावनाओं को बार-बार नुकसान पहुँचेगा।
कांवड़ यात्रियों के पैर दबाने पर कड़ी आपत्ति
पुलिसकर्मियों द्वारा कांवड़ यात्रियों के पैर दबाने की घटना पर सिंह देव ने कहा कि यह कभी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को सेवा करने का मन है, तो वे अपनी तनख्वाह से नाई या अन्य लोगों को ऐसी सेवाएँ देने के लिए भुगतान कर सकते हैं — लेकिन किसी सरकारी कर्मचारी का इस तरह काम करना उचित नहीं है।'
BJP सांसद के छात्रों पर बयान और PM की चुप्पी पर निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताए जाने पर सिंह देव ने आलोचना करते हुए कहा कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक सांसद ने छात्रों के लिए अपशब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा कि उस सांसद के बयान पर प्रधानमंत्री ने किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई।
कुलगाम हमले और जम्मू-कश्मीर पर बड़ा बयान
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के कुलगाम आतंकी हमले पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह देव ने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला के बयान एक ही दिशा की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कश्मीर के ज़रिए पूरे देश में अशांति का माहौल बनाए रखना चाहते हैं और जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने सहित उसके जायज अधिकारों में बाधा डालना चाहते हैं, वही ऐसी हरकतें करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस चुनाव में BJP ने कथित तौर पर आतंकवाद से जुड़े कई लोगों को टिकट दिए या उनके साथ गठबंधन किया।
आगे क्या
सिंह देव के इस बयान से कांवड़ यात्रा और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। धर्म-राजनीति के अंतर्संबंध पर यह विमर्श आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर भी गूँज सकता है।