ट्विशा मृत्यु मामला: '54 मिनट में बेटी चली गई' — सीबीआई जांच में सामने आई चौंकाने वाली टाइमलाइन
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व अभिनेत्री-मॉडल ट्विशा की संदिग्ध मृत्यु के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की दर्ज एफआईआर ने एक ऐसी टाइमलाइन उजागर की है जिसने परिवार को भीतर तक हिला दिया है। 12 मई 2026 की रात महज 54 मिनट के भीतर — रात 9:41 बजे माँ से हुई अंतिम व्हाट्सएप कॉल से लेकर रात 10:35 बजे मृत्यु की सूचना तक — ट्विशा का परिवार अपनी बेटी को हमेशा के लिए खो चुका था। भोपाल में दर्ज इस मामले में सीबीआई ने सोमवार को ससुराल पक्ष के बयान दर्ज करने शुरू किए हैं।
वह आखिरी कॉल और 20 मिनट का सन्नाटा
परिवार के सदस्यों ने भोपाल पुलिस को दिए बयान में बताया कि रात 9:41 बजे जब ट्विशा अपनी माँ से व्हाट्सएप पर बात कर रही थीं, तभी उनके पति समर्थ सिंह ने पीछे से चिल्लाकर पूछा कि वह किससे बात कर रही हैं और फोन दिखाने को कहा। इसके बाद ट्विशा का फोन 20 मिनट तक बंद रहा। परिजनों के बार-बार संपर्क करने के प्रयास विफल रहे।
गिरिबाला सिंह के चार शब्द जिसने सब बदल दिया
हताश होकर ट्विशा की भाभी राशि ने उनकी सास गिरिबाला सिंह का नंबर डायल किया। जब राशि ने ट्विशा से बात कराने को कहा, तो गिरिबाला सिंह ने कॉल काटते हुए कहा — 'वह अब इस दुनिया में नहीं है।' यही वे शब्द थे जिन्होंने ट्विशा के माता-पिता की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। यह पूरी जानकारी सीबीआई की एफआईआर में दर्ज है।
एम्स भोपाल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में दर्ज मूल एफआईआर संख्या 133/2026 के अनुसार, समर्थ सिंह ट्विशा को इलाज के लिए एम्स भोपाल ले गए, जहाँ उन्होंने डॉक्टर को बताया कि ट्विशा ने रात करीब 10:20 बजे आत्महत्या की। चिकित्सीय जांच में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल के डॉक्टर कार्तिक ने रात 12:05 बजे पुलिस को इसकी सूचना दी। सीबीआई की एफआईआर में उल्लिखित संक्षिप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज है: 'मृत्यु फांसी के कारण हुई है। शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटें देखी गई हैं।'
सीबीआई की जांच और कानूनी पहलू
सीबीआई ने मामला अपने हाथ में लेने के बाद सोमवार को भोपाल में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के बयान दर्ज करने शुरू किए। जांचकर्ताओं ने भोपाल पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट का अध्ययन कर पाया कि उस दिन ट्विशा ने अपने पिता से भी कई बार फोन पर बात की थी।
गौरतलब है कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार, विवाह के सात वर्ष के भीतर किसी महिला की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर और दहेज उत्पीड़न के पूर्व आरोप होने पर पति पर दहेज हत्या का मामला दर्ज किया जा सकता है, जिसमें न्यूनतम सात वर्ष और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। ट्विशा के परिवार ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
आगे क्या होगा
सीबीआई की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि मृत्यु आत्महत्या, दुर्घटना या हत्या थी। यह मामला उन हज़ारों परिवारों की पीड़ा का प्रतिनिधित्व करता है जो दहेज उत्पीड़न के आरोपों के बीच न्याय की माँग करते हैं।