उदयनिधि स्टालिन का राज्यपाल अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण पर हमला, टीवीके सरकार पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने 2 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा मदुरै दौरे के दौरान किए गए निरीक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निरीक्षण निर्वाचित राज्य सरकार की संवैधानिक शक्तियों का सीधा अतिक्रमण है।
मुख्य आरोप: राज्यपाल ने की जनप्रतिनिधि जैसी भूमिका
उदयनिधि स्टालिन ने एक बयान में कहा कि राज्यपाल अर्लेकर तमिलनाडु का केवल अतिरिक्त प्रभार संभालते हैं, फिर भी उन्होंने एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की तरह व्यवहार किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार ने राज्यपाल को संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने की खुली छूट दी।
'कूवथुर युग' की वापसी का आरोप
पूर्व अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) शासनकाल से तुलना करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि यह निरीक्षण राज्यपालों द्वारा क्षेत्रीय दौरे करने की 'कूवथुर युग' की प्रथा की वापसी का प्रतीक है। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने एक ऐसी मिसाल कायम होने दी है जो तमिलनाडु के अधिकारों को कमज़ोर करती है।
वैगई नदी और राजभवन हस्तक्षेप पर आपत्ति
उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल के उन कथित बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कहा गया था कि यदि राज्य सरकार वैगई नदी का जीर्णोद्धार करने में विफल रहती है तो राजभवन हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजभवन का रखरखाव स्वयं तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसी टिप्पणियाँ सत्ता का अनुचित प्रदर्शन हैं। उनके अनुसार, ये बयान इसलिए संभव हो पाए क्योंकि सत्तारूढ़ दल राज्य की संवैधानिक शक्तियों की रक्षा करने में विफल रहा।
तमिल थाई वझथु और दलबदल के आरोप
DMK नेता ने यह भी याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने पहले विधानसभा में सरकार से पूछा था कि राज्यपाल की उपस्थिति में आयोजित आधिकारिक समारोहों में तमिल थाई वझथु को दिए जाने वाले महत्व पर कथित समझौता क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रही। उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी एक ओर विपक्षी दलों से दलबदल कराने की कोशिश कर रही थी, वहीं दूसरी ओर राज्यपाल की कार्रवाई के डर से उनके निरीक्षण को मूक स्वीकृति दे रही थी।
DMK का ऐतिहासिक रुख और आगे की राह
पूर्व AIADMK शासनकाल का हवाला देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने बताया कि उस दौर में DMK कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन राज्यपाल के इसी तरह के निरीक्षणों के दौरान काले झंडे लहराकर विरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली पूर्व DMK सरकार के कार्यकाल में ऐसे किसी भी निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी। इस विवाद के बीच राज्य में राज्यपाल और सत्तारूढ़ दल के बीच संवैधानिक सीमाओं को लेकर तनाव और गहरा होने की आशंका है।