3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उदयनिधि स्टालिन का राज्यपाल अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण पर हमला, टीवीके सरकार पर भी निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उदयनिधि स्टालिन का राज्यपाल अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण पर हमला, टीवीके सरकार पर भी निशाना

सारांश

DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण को असंवैधानिक बताते हुए TVK सरकार पर भी निशाना साधा — आरोप लगाया कि सरकार डर के कारण राज्य के अधिकारों से समझौता कर रही है और 'कूवथुर युग' की वापसी हो रही है।

मुख्य बातें

DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने 2 जुलाई 2026 को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण को असंवैधानिक करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने केवल अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि जैसा व्यवहार किया।
सत्तारूढ़ TVK सरकार पर आरोप — राज्यपाल की कार्रवाई के डर से राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं की।
राज्यपाल के कथित बयान पर आपत्ति — वैगई नदी जीर्णोद्धार न होने पर राजभवन के हस्तक्षेप की चेतावनी को अनुचित बताया।
उदयनिधि ने याद दिलाया कि एम.के.
स्टालिन के नेतृत्व वाली पूर्व DMK सरकार ने कभी ऐसे निरीक्षण की अनुमति नहीं दी थी।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने 2 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा मदुरै दौरे के दौरान किए गए निरीक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निरीक्षण निर्वाचित राज्य सरकार की संवैधानिक शक्तियों का सीधा अतिक्रमण है।

मुख्य आरोप: राज्यपाल ने की जनप्रतिनिधि जैसी भूमिका

उदयनिधि स्टालिन ने एक बयान में कहा कि राज्यपाल अर्लेकर तमिलनाडु का केवल अतिरिक्त प्रभार संभालते हैं, फिर भी उन्होंने एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की तरह व्यवहार किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार ने राज्यपाल को संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने की खुली छूट दी।

'कूवथुर युग' की वापसी का आरोप

पूर्व अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) शासनकाल से तुलना करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि यह निरीक्षण राज्यपालों द्वारा क्षेत्रीय दौरे करने की 'कूवथुर युग' की प्रथा की वापसी का प्रतीक है। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने एक ऐसी मिसाल कायम होने दी है जो तमिलनाडु के अधिकारों को कमज़ोर करती है।

वैगई नदी और राजभवन हस्तक्षेप पर आपत्ति

उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल के उन कथित बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कहा गया था कि यदि राज्य सरकार वैगई नदी का जीर्णोद्धार करने में विफल रहती है तो राजभवन हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजभवन का रखरखाव स्वयं तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसी टिप्पणियाँ सत्ता का अनुचित प्रदर्शन हैं। उनके अनुसार, ये बयान इसलिए संभव हो पाए क्योंकि सत्तारूढ़ दल राज्य की संवैधानिक शक्तियों की रक्षा करने में विफल रहा।

तमिल थाई वझथु और दलबदल के आरोप

DMK नेता ने यह भी याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने पहले विधानसभा में सरकार से पूछा था कि राज्यपाल की उपस्थिति में आयोजित आधिकारिक समारोहों में तमिल थाई वझथु को दिए जाने वाले महत्व पर कथित समझौता क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रही। उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी एक ओर विपक्षी दलों से दलबदल कराने की कोशिश कर रही थी, वहीं दूसरी ओर राज्यपाल की कार्रवाई के डर से उनके निरीक्षण को मूक स्वीकृति दे रही थी।

DMK का ऐतिहासिक रुख और आगे की राह

पूर्व AIADMK शासनकाल का हवाला देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने बताया कि उस दौर में DMK कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन राज्यपाल के इसी तरह के निरीक्षणों के दौरान काले झंडे लहराकर विरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली पूर्व DMK सरकार के कार्यकाल में ऐसे किसी भी निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी। इस विवाद के बीच राज्य में राज्यपाल और सत्तारूढ़ दल के बीच संवैधानिक सीमाओं को लेकर तनाव और गहरा होने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ सत्तारूढ़ TVK सरकार। यह रणनीति DMK को विपक्ष की भूमिका में मज़बूत करती है, लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि क्या DMK खुद उसी संवैधानिक सतर्कता का पालन करती है जिसकी वह माँग कर रही है। तमिलनाडु में राज्यपाल बनाम निर्वाचित सरकार का टकराव नया नहीं है — लेकिन अब जब TVK सत्ता में है और DMK विपक्ष में, यह विवाद राज्य की राजनीति में एक नई परत जोड़ता है। वैगई नदी जैसे स्थानीय मुद्दे को संवैधानिक बहस से जोड़ना दर्शाता है कि यह लड़ाई केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि चुनावी ज़मीन तैयार करने की भी है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल के मदुरै निरीक्षण की आलोचना क्यों की?
उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के मदुरै निरीक्षण को असंवैधानिक बताया, यह कहते हुए कि राज्यपाल ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि की तरह व्यवहार किया जबकि वे तमिलनाडु का केवल अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। उनके अनुसार यह निरीक्षण निर्वाचित राज्य सरकार की संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण है।
'कूवथुर युग' क्या है जिसका उदयनिधि स्टालिन ने ज़िक्र किया?
'कूवथुर युग' तमिलनाडु में पूर्व AIADMK शासनकाल के दौरान राज्यपालों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण करने की उस प्रथा को कहा जाता है, जिसका DMK ने उस समय विरोध किया था। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल अर्लेकर का मदुरै निरीक्षण उसी प्रथा की वापसी है।
वैगई नदी विवाद और राजभवन हस्तक्षेप का मामला क्या है?
राज्यपाल अर्लेकर ने कथित तौर पर कहा था कि यदि राज्य सरकार वैगई नदी का जीर्णोद्धार करने में विफल रहती है तो राजभवन हस्तक्षेप करेगा। उदयनिधि स्टालिन ने इसे सत्ता का अनुचित प्रदर्शन बताया और कहा कि राजभवन का रखरखाव स्वयं तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी है।
उदयनिधि स्टालिन ने TVK सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उदयनिधि स्टालिन ने TVK सरकार पर आरोप लगाया कि उसने राज्यपाल की कार्रवाई के डर से उनके निरीक्षण को मूक स्वीकृति दी और राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार तमिल थाई वझथु के महत्व पर कथित समझौते का संतोषजनक जवाब देने में भी नाकाम रही।
पूर्व DMK सरकार ने राज्यपाल के निरीक्षण पर क्या रुख अपनाया था?
उदयनिधि स्टालिन के अनुसार, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली पूर्व DMK सरकार के कार्यकाल में ऐसे किसी भी राज्यपाल निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी। AIADMK शासनकाल में इसी तरह के निरीक्षणों के दौरान DMK कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लहराकर विरोध किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले