यूपी 2027: रायबरेली में सपा ने 2022 में जीती थीं 6 में से 4 सीटें, भाजपा की 'गढ़-भेदन' रणनीति तैयार
सारांश
मुख्य बातें
रायबरेली — उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ होते ही रायबरेली जिले का सियासी तापमान चढ़ने लगा है। कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले इस जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 6 में से 4 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण पलट दिए थे। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस क्षेत्र में वापसी की रणनीति बना रही है, जबकि सपा अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है।
रायबरेली की राजनीतिक पहचान
रायबरेली को दशकों से कांग्रेस के अभेद्य किले के रूप में जाना जाता रहा है। वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इसी क्षेत्र से सांसद हैं। 2024 के आम चुनाव में राहुल गांधी ने 36-रायबरेली लोकसभा सीट से 6,87,649 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले। लोकसभा में कांग्रेस की पकड़ बनी रहने के बावजूद विधानसभा सीटों पर सपा ने अपना दबदबा कायम किया है।
2022 का चुनावी उलटफेर और सपा का प्रभुत्व
रायबरेली जिले में विधानसभा की 6 सीटें हैं — 177-बछरावां (सुरक्षित), 179-हरचंदपुर, 180-रायबरेली सदर, 182-सरेनी, 183-ऊंचाहार और 181-सलोन (सुरक्षित)। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने बछरावां सुरक्षित से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल राजपूत उर्फ राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडे को जिताया। भाजपा केवल रायबरेली सदर से अदिति सिंह और सलोन सुरक्षित से अशोक कुमार को जिताने में सफल रही। यह ऐसे समय में आया जब सपा पूरे प्रदेश में मज़बूत विपक्षी उभार दिखा रही थी।
निर्णायक जनसांख्यिकी: दलित वोट बैंक
जनगणना के आँकड़ों के अनुसार रायबरेली की कुल जनसंख्या 29,03,507 है, जिसमें ग्रामीण आबादी 26,22,247 और शहरी 2,81,260 है। इनमें 14,95,244 पुरुष और 14,08,263 महिलाएँ हैं। जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 8,88,004 है, जो कुल जनसंख्या का 30.60 प्रतिशत है। यह आँकड़ा बताता है कि दलित वोट बैंक यहाँ चुनावी नतीजों पर सीधा असर डालता है। साक्षरता दर 68.41 प्रतिशत है — पुरुष साक्षरता 78.64% और महिला साक्षरता 57.58%। लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 942 महिलाएँ है। गरीबी रेखा के नीचे 3,29,310 परिवार जीवन-यापन कर रहे हैं, जिनमें 3,16,950 ग्रामीण परिवार हैं।
औद्योगिक और ऐतिहासिक महत्त्व
आर्थिक दृष्टि से रायबरेली में एनटीपीसी ऊंचाहार, रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री जैसी बड़ी सरकारी इकाइयाँ स्थित हैं, जो हज़ारों लोगों को रोज़गार देती हैं। गौरतलब है कि जिले की स्थापना 1858 में अंग्रेजों ने की थी। 8 अगस्त 1942 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान सरेनी में पुलिस ने भीड़ पर गोलियाँ चलाई थीं, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए — यह इतिहास जिले की राजनीतिक चेतना का हिस्सा है।
2027: त्रिकोणीय संघर्ष की तैयारी
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में रायबरेली में तीनों प्रमुख दलों — सपा, भाजपा और कांग्रेस — के बीच कड़ी टक्कर होने के संकेत हैं। सपा अपनी चारों सीटें बचाने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस के ऐतिहासिक वर्चस्व वाले इस इलाके में सेंध लगाना है। राहुल गांधी की सांसदीय उपस्थिति और गहराती सपा-कांग्रेस प्रतिद्वंद्विता यह तय करेगी कि 1 नवंबर 2026 के बाद के महीनों में रायबरेली का राजनीतिक परिदृश्य किस दिशा में जाता है।