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यूपी 2027: रायबरेली में सपा ने 2022 में जीती थीं 6 में से 4 सीटें, भाजपा की 'गढ़-भेदन' रणनीति तैयार

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यूपी 2027: रायबरेली में सपा ने 2022 में जीती थीं 6 में से 4 सीटें, भाजपा की 'गढ़-भेदन' रणनीति तैयार

सारांश

रायबरेली — राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र, कांग्रेस का पुराना गढ़ — लेकिन 2022 में सपा ने यहाँ 6 में से 4 विधानसभा सीटें जीत लीं। अब 2027 में भाजपा इस समीकरण को तोड़ने की कोशिश में है। दलित वोट बैंक (30.60%) और औद्योगिक श्रमिक वर्ग तय करेंगे कि कौन बाज़ी मारेगा।

मुख्य बातें

2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने रायबरेली की 6 में से 4 सीटें जीतीं; भाजपा को केवल 2 सीटें मिलीं।
2024 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने रायबरेली से 6,87,649 वोट से जीत दर्ज की; भाजपा उम्मीदवार को 2,97,619 वोट मिले।
जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 30.60% (8,88,004) — दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका में।
जिले में एनटीपीसी ऊंचाहार , रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री प्रमुख रोज़गार स्रोत।
2027 में सपा, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की संभावना; भाजपा की 'गढ़-भेदन' रणनीति तैयार।

रायबरेली — उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ होते ही रायबरेली जिले का सियासी तापमान चढ़ने लगा है। कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले इस जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 6 में से 4 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण पलट दिए थे। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस क्षेत्र में वापसी की रणनीति बना रही है, जबकि सपा अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है।

रायबरेली की राजनीतिक पहचान

रायबरेली को दशकों से कांग्रेस के अभेद्य किले के रूप में जाना जाता रहा है। वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इसी क्षेत्र से सांसद हैं। 2024 के आम चुनाव में राहुल गांधी ने 36-रायबरेली लोकसभा सीट से 6,87,649 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले। लोकसभा में कांग्रेस की पकड़ बनी रहने के बावजूद विधानसभा सीटों पर सपा ने अपना दबदबा कायम किया है।

2022 का चुनावी उलटफेर और सपा का प्रभुत्व

रायबरेली जिले में विधानसभा की 6 सीटें हैं — 177-बछरावां (सुरक्षित), 179-हरचंदपुर, 180-रायबरेली सदर, 182-सरेनी, 183-ऊंचाहार और 181-सलोन (सुरक्षित)। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने बछरावां सुरक्षित से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल राजपूत उर्फ राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडे को जिताया। भाजपा केवल रायबरेली सदर से अदिति सिंह और सलोन सुरक्षित से अशोक कुमार को जिताने में सफल रही। यह ऐसे समय में आया जब सपा पूरे प्रदेश में मज़बूत विपक्षी उभार दिखा रही थी।

निर्णायक जनसांख्यिकी: दलित वोट बैंक

जनगणना के आँकड़ों के अनुसार रायबरेली की कुल जनसंख्या 29,03,507 है, जिसमें ग्रामीण आबादी 26,22,247 और शहरी 2,81,260 है। इनमें 14,95,244 पुरुष और 14,08,263 महिलाएँ हैं। जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 8,88,004 है, जो कुल जनसंख्या का 30.60 प्रतिशत है। यह आँकड़ा बताता है कि दलित वोट बैंक यहाँ चुनावी नतीजों पर सीधा असर डालता है। साक्षरता दर 68.41 प्रतिशत है — पुरुष साक्षरता 78.64% और महिला साक्षरता 57.58%। लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 942 महिलाएँ है। गरीबी रेखा के नीचे 3,29,310 परिवार जीवन-यापन कर रहे हैं, जिनमें 3,16,950 ग्रामीण परिवार हैं।

औद्योगिक और ऐतिहासिक महत्त्व

आर्थिक दृष्टि से रायबरेली में एनटीपीसी ऊंचाहार, रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री जैसी बड़ी सरकारी इकाइयाँ स्थित हैं, जो हज़ारों लोगों को रोज़गार देती हैं। गौरतलब है कि जिले की स्थापना 1858 में अंग्रेजों ने की थी। 8 अगस्त 1942 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान सरेनी में पुलिस ने भीड़ पर गोलियाँ चलाई थीं, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए — यह इतिहास जिले की राजनीतिक चेतना का हिस्सा है।

2027: त्रिकोणीय संघर्ष की तैयारी

आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में रायबरेली में तीनों प्रमुख दलों — सपा, भाजपा और कांग्रेस — के बीच कड़ी टक्कर होने के संकेत हैं। सपा अपनी चारों सीटें बचाने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस के ऐतिहासिक वर्चस्व वाले इस इलाके में सेंध लगाना है। राहुल गांधी की सांसदीय उपस्थिति और गहराती सपा-कांग्रेस प्रतिद्वंद्विता यह तय करेगी कि 1 नवंबर 2026 के बाद के महीनों में रायबरेली का राजनीतिक परिदृश्य किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन लोकसभा और विधानसभा के वोटर दो अलग-अलग राजनीतिक तर्कों पर चल रहे हैं। राहुल गांधी को भारी लोकसभा बढ़त और सपा को विधानसभा बहुमत — यह विभाजन बताता है कि मतदाता 'व्यक्तित्व' और 'स्थानीय प्रशासन' में फ़र्क करना जानते हैं। भाजपा के लिए असली चुनौती सिर्फ सीटें जीतना नहीं, बल्कि 30.60% दलित वोट बैंक में से एक बड़ा हिस्सा निकालना है — जो पिछले दो चुनावों में सपा के पक्ष में झुका रहा। बिना जातीय समीकरण साधे महज़ प्रशासनिक उपलब्धियों का ढोल पीटना रायबरेली में काम नहीं आएगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली में किसने कितनी सीटें जीतीं?
2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने रायबरेली की 6 में से 4 सीटें जीतीं — बछरावां (सुरक्षित), हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार। भाजपा ने रायबरेली सदर और सलोन (सुरक्षित) सीटें जीतीं।
2024 में रायबरेली लोकसभा सीट पर क्या हुआ?
2024 के आम चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रायबरेली लोकसभा सीट से 6,87,649 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले। राहुल वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं।
रायबरेली में दलित वोट बैंक का राजनीतिक महत्त्व क्या है?
जनगणना के अनुसार रायबरेली में अनुसूचित जाति की आबादी 8,88,004 है, जो कुल जनसंख्या का 30.60 प्रतिशत है। यह अनुपात जिले की किसी भी सीट पर चुनावी नतीजे पलटने में सक्षम है, इसलिए सभी दल इस वोट बैंक को साधने की कोशिश करते हैं।
2027 चुनाव में रायबरेली की सियासी तस्वीर कैसी होगी?
2027 में रायबरेली में सपा, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत हैं। सपा अपनी 4 सीटें बचाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा 'गढ़-भेदन' की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी की सांसदीय उपस्थिति कांग्रेस के पक्ष में एक अतिरिक्त कारक हो सकती है।
रायबरेली जिले में कौन-सी प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ हैं?
रायबरेली में एनटीपीसी ऊंचाहार, रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री प्रमुख सरकारी औद्योगिक इकाइयाँ हैं। ये इकाइयाँ हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार देती हैं और क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ मानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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