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यूपी एटीएस का उत्तर 24 परगना में छापा: टीएमसी नेता अब्दुल्ला गाजी के घर और मदरसे पर कार्रवाई, टेरर फंडिंग की जांच

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यूपी एटीएस का उत्तर 24 परगना में छापा: टीएमसी नेता अब्दुल्ला गाजी के घर और मदरसे पर कार्रवाई, टेरर फंडिंग की जांच

सारांश

यूपी एटीएस और ईडी ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में एक साथ कई स्थानों पर छापे मारे। टीएमसी नेता अब्दुल्ला गाजी के घर और मदरसे पर कार्रवाई हुई — आरोप है कि विदेशी फंड को शेल कंपनियों के ज़रिए कथित आतंकी वित्तपोषण में लगाया गया। गाजी और उनका बेटा फरार हैं।

मुख्य बातें

यूपी एटीएस और सीएपीएफ ने उत्तर 24 परगना के हसनाबाद में टीएमसी नेता अब्दुल्ला गाजी के घर और रामेश्वरपुर दारुल उलूम मदरसे पर छापा मारा।
जांचकर्ताओं के अनुसार, विदेशी फंड मदरसे के निर्माण के नाम पर जुटाया गया, लेकिन कथित तौर पर शेल कंपनियों के नेटवर्क से अन्यत्र भेजा गया।
एटीएस ने करीब दो वर्ष पूर्व भी गाजी को इन्हीं आरोपों में गिरफ्तार किया था; नए दस्तावेज़ मिलने पर ताज़ा कार्रवाई हुई।
छापे के समय अब्दुल्ला गाजी और उनका बेटा दोनों फरार थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तीन टीमों ने बसीरहाट के हारोआ में एक ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान और मदरसे पर समानांतर तलाशी अभियान चलाया — व्यवसायी अब्दुस समद के खातों में विदेशी मुद्रा के संदिग्ध लेन-देन की जांच के तहत।

उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) के जवानों के साथ मिलकर 17 जुलाई 2025 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में कथित टेरर फंडिंग मामले की जांच के तहत छापेमारी की। यह कार्रवाई स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अब्दुल्ला गाजी के आवास और रामेश्वरपुर दारुल उलूम मदरसे पर की गई। रिपोर्ट लिखे जाने तक तलाशी अभियान जारी था।

मुख्य घटनाक्रम

तलाशी अभियान हसनाबाद ब्लॉक के रामेश्वरपुर गाँव में शुरू हुआ। जांचकर्ताओं को संदेह है कि विदेश से बड़ी रकम अब्दुल्ला गाजी और उनके बेटे के बैंक खातों में भेजी गई थी। कथित तौर पर यह राशि मदरसे के विस्तार और निर्माण के नाम पर ग्रांट के रूप में प्राप्त की गई थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, जब एटीएस की टीमें गाजी के घर पहुँचीं, तो वे और उनका बेटा दोनों ही वहाँ मौजूद नहीं थे। मामले से जुड़े नए दस्तावेज़ मिलने के बाद यह ताज़ा छापेमारी की गई है।

आरोप और जांच की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार, यूपी एटीएस ने करीब दो वर्ष पूर्व भी इन्हीं आरोपों में अब्दुल्ला गाजी को गिरफ्तार किया था और मामले की जांच तब से जारी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि मदरसे के निर्माण के लिए एकत्र किया गया विदेशी फंड बताए गए उद्देश्य पर खर्च न होकर शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अन्यत्र भेजा गया। एटीएस को आशंका है कि इस फंड का एक हिस्सा कथित तौर पर टेरर फाइनेंसिंग में इस्तेमाल किया गया हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी जांच के दायरे में है।

ईडी की समानांतर कार्रवाई

इसी दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तीन टीमों ने बसीरहाट उप-मंडल के हारोआ इलाके में एक साथ तीन स्थानों — एक ट्रस्ट, एक शिक्षण संस्थान और एक मदरसे — पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई व्यवसायी अब्दुस समद से जुड़े बैंक खातों में विदेशी मुद्रा के बड़े लेन-देन का पता चलने के बाद की गई।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच अधिकार-क्षेत्र को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है। यूपी एटीएस का दूसरे राज्य में इस तरह का अभियान प्रक्रियागत दृष्टि से उल्लेखनीय है।

सरकार और दलों की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। राज्य पुलिस की भूमिका और छापेमारी की सूचना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

आगे क्या होगा

जांचकर्ता गाजी के घर से बरामद दस्तावेज़ों की जांच कर रहे थे। ईडी और एटीएस की समानांतर कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि यह मामला व्यापक वित्तीय जांच का हिस्सा है। फरार चल रहे अब्दुल्ला गाजी और उनके बेटे की तलाश जारी बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जांच की गति पर सवाल उठाता है। ईडी और एटीएस की एक साथ कार्रवाई संकेत देती है कि केंद्रीय एजेंसियां इस मामले को व्यापक वित्तीय नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं। लेकिन जब तक आरोप-पत्र और अदालती प्रक्रिया सामने नहीं आती, 'शेल कंपनियों' और 'टेरर फाइनेंसिंग' जैसे गंभीर आरोपों को साक्ष्य की कसौटी पर परखना ज़रूरी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एटीएस ने पश्चिम बंगाल में छापेमारी क्यों की?
यूपी एटीएस ने कथित टेरर फंडिंग मामले की जांच के तहत उत्तर 24 परगना के हसनाबाद में टीएमसी नेता अब्दुल्ला गाजी के घर और रामेश्वरपुर दारुल उलूम मदरसे पर छापा मारा। जांचकर्ताओं को नए दस्तावेज़ मिलने के बाद यह ताज़ा कार्रवाई की गई।
अब्दुल्ला गाजी पर क्या आरोप हैं?
जांचकर्ताओं के अनुसार, अब्दुल्ला गाजी और उनके बेटे के बैंक खातों में विदेश से बड़ी रकम भेजी गई, जो कथित तौर पर मदरसे के निर्माण के नाम पर थी। एटीएस को संदेह है कि यह राशि शेल कंपनियों के ज़रिए दूसरी जगह भेजी गई और इसका एक हिस्सा आतंकी वित्तपोषण में इस्तेमाल हुआ हो सकता है।
क्या अब्दुल्ला गाजी पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं?
हाँ, सूत्रों के अनुसार यूपी एटीएस ने करीब दो वर्ष पूर्व भी इन्हीं आरोपों में अब्दुल्ला गाजी को गिरफ्तार किया था और मामले की जांच तब से जारी है। नए दस्तावेज़ सामने आने के बाद ताज़ा छापेमारी की गई।
ईडी की कार्रवाई किसके खिलाफ है और कहाँ हुई?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तीन टीमों ने बसीरहाट उप-मंडल के हारोआ इलाके में एक ट्रस्ट, एक शिक्षण संस्थान और एक मदरसे पर एक साथ तलाशी ली। यह कार्रवाई व्यवसायी अब्दुस समद से जुड़े बैंक खातों में विदेशी मुद्रा के संदिग्ध लेन-देन का पता चलने के बाद हुई।
छापेमारी के बाद आगे क्या होगा?
जांचकर्ता गाजी के घर से बरामद दस्तावेज़ों की जांच कर रहे हैं और फरार अब्दुल्ला गाजी व उनके बेटे की तलाश जारी है। ईडी और एटीएस की समानांतर कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि यह मामला एक व्यापक वित्तीय जांच का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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