5 नवंबर 2026
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यूपी चुनाव 2027: प्रतापगढ़ की 7 विधानसभा सीटों का सियासी समीकरण और 2022 के नतीजे

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यूपी चुनाव 2027: प्रतापगढ़ की 7 विधानसभा सीटों का सियासी समीकरण और 2022 के नतीजे

सारांश

प्रतापगढ़ की सात सीटों पर 2022 में कोई एक दल नहीं जीत सका था — सपा, BJP, कांग्रेस और जनसत्ता दल सभी ने खाता खोला। 2027 में रानीगंज जैसी 2,649 वोटों से जीती गई सीट और कुंडा जैसा 30,315 के अंतर वाला दुर्ग — दोनों अलग-अलग कहानियाँ सुनाते हैं।

मुख्य बातें

प्रतापगढ़ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं — रामपुर खास, बाबागंज, कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी और रानीगंज।
2022 चुनाव में सपा को 2 सीटें (पट्टी, रानीगंज), जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) को 2 सीटें (कुंडा, बाबागंज), BJP को 1 (प्रतापगढ़ सदर), अपना दल (सोनेलाल) को 1 (विश्वनाथगंज) और कांग्रेस को 1 (रामपुर खास) मिली थी।
कुंडा से रघुराज प्रताप सिंह ने 99,612 वोट पाकर 30,315 के अंतर से जीत दर्ज की — जिले का सबसे बड़ा विजय-अंतर।
रानीगंज में सपा की जीत महज 2,649 वोटों से हुई — जिले की सबसे करीबी लड़ाई।
पट्टी सीट पर सपा के राम सिंह को 1,08,070 वोट मिले — जिले में किसी विजेता को सर्वाधिक।
जिले की आबादी लगभग 37 लाख ; 1858 में स्थापित यह जिला भारत की 'आंवला राजधानी' के रूप में प्रसिद्ध है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की सात विधानसभा सीटें — रामपुर खास, बाबागंज (सुरक्षित), कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी और रानीगंज — 2027 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सियासी दलों की परीक्षा लेने को तैयार हैं। 2022 के चुनाव में इन सातों सीटों पर मिश्रित परिणाम रहा था — समाजवादी पार्टी (सपा), भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और क्षेत्रीय दलों ने अलग-अलग सीटों पर बाज़ी मारी थी।

रामपुर खास: कांग्रेस का गढ़

रामपुर खास विधानसभा सीट (सीट संख्या 244) से वर्तमान विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' हैं, जो कांग्रेस के टिकट पर 18वीं विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने 84,334 वोट हासिल किए और BJP के नागेश प्रताप सिंह को 14,741 मतों के अंतर से पराजित किया। यह सामान्य (अनारक्षित) सीट है, जहाँ पिछले चुनाव में 3,20,772 पंजीकृत मतदाता थे।

बाबागंज: जनसत्ता दल का दबदबा

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बाबागंज सीट (सीट संख्या 245) से विनोद सरोज जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के विधायक हैं। 2022 में उन्होंने 67,282 वोट पाकर सपा के गिरीश पासी को 15,767 वोटों से हराया था। इस सीट पर पिछले चुनाव में 3,19,665 पंजीकृत मतदाता थे।

कुंडा: रघुराज प्रताप सिंह की अभेद्य सीट

कुंडा विधानसभा सीट (सीट संख्या 246) पर जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के रघुराज प्रताप सिंह का वर्चस्व बरकरार है। 2022 में उन्होंने 99,612 वोट के साथ सपा के गुलशन यादव को 30,315 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। यह सामान्य सीट है और यहाँ 3,57,938 पंजीकृत मतदाता थे। कुंडा को रघुराज प्रताप सिंह का राजनीतिक गढ़ माना जाता है।

विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़ सदर और पट्टी: तिकोना मुकाबला

विश्वनाथगंज सीट (सीट संख्या 247) से अपना दल (सोनेलाल) के जीत लाल पटेल विधायक हैं। 2022 में उन्होंने 86,829 वोट पाकर सपा के सौरभ सिंह को 48,052 मतों के सबसे बड़े अंतर से हराया, जो प्रतापगढ़ जिले की सभी सीटों में सर्वाधिक विजय-अंतर था। यहाँ 3,99,623 पंजीकृत मतदाता थे।

प्रतापगढ़ सदर सीट (सीट संख्या 248) से BJP के राजेंद्र कुमार मौर्य विधायक हैं। 2022 में उन्होंने 89,762 वोट पाकर अपना दल (कामरावाड़ी) की कृष्णा पटेल को 25,063 वोटों से हराया। यहाँ 3,55,158 पंजीकृत मतदाता थे।

पट्टी सीट (सीट संख्या 249) से सपा के राम सिंह विधायक हैं। 2022 में उन्होंने 1,08,070 वोट पाकर BJP के राजेंद्र प्रताप सिंह को 22,051 मतों से हराया — जो जिले में किसी भी विजेता को मिला सर्वाधिक मत-योग था। यहाँ 3,66,452 पंजीकृत मतदाता थे।

रानीगंज: सपा की सबसे कड़ी जीत

रानीगंज विधानसभा सीट (सीट संख्या 250) से सपा के राकेश कुमार वर्मा उर्फ डॉ. आरके वर्मा विधायक हैं। 2022 में उन्होंने 75,583 वोट पाकर BJP के अभय कुमार को महज 2,649 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया — जो पूरे जिले का सबसे संकीर्ण मतभेद था। यहाँ 3,36,072 पंजीकृत मतदाता थे। 2027 में यह सीट सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।

प्रतापगढ़ जिले की पहचान और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रतापगढ़ जिले की स्थापना 1858 में हुई थी। इसका प्रशासनिक मुख्यालय बेल्हा प्रतापगढ़ है। जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 3,730 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ की आबादी लगभग 37 लाख है। यह प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आता है। दक्षिण-पश्चिम में गंगा नदी और जिले के बीच से सई नदी बहती है।

जिले का नाम 17वीं शताब्दी में — 1628 से 1682 के बीच — स्थानीय राजा प्रताप बहादुर सिंह द्वारा अरोर के पास बनवाए गए किले 'प्रतापगढ़' पर पड़ा। 1920 के किसान आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम में भी इस जिले की उल्लेखनीय भूमिका रही है। आंवले के बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण प्रतापगढ़ को भारत की 'आंवला राजधानी' कहा जाता है — यहाँ से मुरब्बा, कैंडी और च्यवनप्राश जैसे उत्पाद देश-विदेश में निर्यात होते हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव में प्रतापगढ़ की ये सातों सीटें बहुदलीय संघर्ष का केंद्र बनने की पूरी संभावना है, जहाँ सपा, BJP, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच वर्तमान समीकरण को चुनौती मिलना तय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

649 वोटों का अंतर बताता है कि छोटे दलों का वोट-कटान 2027 में किसी भी खेमे को पलट सकता है। कुंडा में रघुराज प्रताप सिंह की पकड़ दशकों पुरानी है, लेकिन बदलती जाति-गणित और युवा मतदाताओं की बढ़ती हिस्सेदारी उनकी 'अजेयता' को भी चुनौती दे सकती है। मुख्यधारा की चुनाव-कवरेज अक्सर लोकसभा के रुझानों को विधानसभा पर आरोपित कर देती है — प्रतापगढ़ जैसे जिले याद दिलाते हैं कि हर सीट अपनी अलग कहानी है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतापगढ़ जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं और कौन-कौन सी हैं?
प्रतापगढ़ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं — रामपुर खास, बाबागंज (सुरक्षित/SC), कुंडा, विश्वनाथगंज, प्रतापगढ़ सदर, पट्टी और रानीगंज। ये सभी UP विधानसभा की 403 सीटों में क्रमशः सीट संख्या 244 से 250 तक हैं।
2022 के चुनाव में प्रतापगढ़ की किन सीटों पर किस पार्टी ने जीत दर्ज की?
2022 में सपा ने पट्टी और रानीगंज, जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) ने कुंडा और बाबागंज, BJP ने प्रतापगढ़ सदर, अपना दल (सोनेलाल) ने विश्वनाथगंज और कांग्रेस ने रामपुर खास जीती। पाँच अलग-अलग दलों ने सात सीटों पर जीत दर्ज की।
कुंडा विधानसभा सीट से 2022 में किसने और कितने मतों के अंतर से जीत हासिल की?
कुंडा से जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के रघुराज प्रताप सिंह ने 99,612 वोट पाकर सपा के गुलशन यादव को 30,315 मतों के अंतर से हराया — जो प्रतापगढ़ जिले का सबसे बड़ा विजय-अंतर था।
2027 में प्रतापगढ़ की कौन सी सीट सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है?
रानीगंज सीट पर 2022 में सपा के राकेश कुमार वर्मा ने BJP के अभय कुमार को महज 2,649 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था। यह प्रतापगढ़ जिले का सबसे संकीर्ण मतभेद था, इसलिए 2027 में यह सीट सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।
प्रतापगढ़ जिले को 'आंवला राजधानी' क्यों कहा जाता है?
प्रतापगढ़ में बड़े पैमाने पर आंवले की खेती होती है और यहाँ से मुरब्बा, कैंडी, च्यवनप्राश जैसे उत्पाद देश-विदेश में निर्यात किए जाते हैं। इसीलिए इसे भारत की 'आंवला राजधानी' कहा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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