यूपी चुनाव 2027: हमीरपुर की दोनों विधानसभा सीटों पर 2022 में भाजपा का दबदबा, जानें पूरा चुनावी समीकरण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में स्थित हमीरपुर जिला राजनीतिक मानचित्र पर भले ही छोटा दिखे, परंतु 2027 विधानसभा चुनाव की दृष्टि से इसका महत्व कम नहीं आँका जा सकता। जिले में कुल दो विधानसभा क्षेत्र हैं — हमीरपुर सदर और राठ (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) — और 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने नाम कीं। चित्रकूट धाम मंडल के अंतर्गत आने वाले इस जिले में यमुना और बेतवा नदियों का संगम है, जो न केवल भौगोलिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसे विशिष्ट बनाता है।
हमीरपुर सदर सीट: भाजपा की मजबूत पकड़
हमीरपुर सदर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 228वें क्रमांक पर है। यह एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है। वर्तमान में इस सीट के विधायक भारतीय जनता पार्टी के डॉ. मनोज कुमार प्रजापति हैं, जो 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर लगभग 4,12,700 पंजीकृत मतदाता थे। डॉ. मनोज कुमार प्रजापति ने 1,05,432 वोट हासिल कर 25,485 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी राम प्रकाश 79,947 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
राठ सीट: मनीषा अनुरागी की लगातार दूसरी जीत
राठ विधानसभा सीट का क्रमांक 229 है और यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है। इस सीट की मौजूदा विधायक मनीषा अनुरागी हैं, जो भारतीय जनता पार्टी से हैं। उल्लेखनीय है कि वे इस सीट से लगातार दूसरी बार विजयी हुई हैं, जिससे पार्टी में उनकी स्थिति और मजबूत मानी जाती है।
2022 के चुनाव में राठ सीट पर लगभग 3,99,594 पंजीकृत मतदाता थे। मनीषा अनुरागी ने 1,39,373 वोट प्राप्त कर 61,979 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। सपा की प्रत्याशी चंद्रावती वर्मा 77,394 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रत्याशी प्रसन्ना भूषण 24,266 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
हमीरपुर जिले का भौगोलिक और प्रशासनिक परिचय
हमीरपुर जिला उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का हिस्सा है और इसका मुख्यालय हमीरपुर शहर है। जिले की प्रशासनिक संरचना में 4 तहसीलें शामिल हैं — हमीरपुर, मौदहा, राठ और सरीला। इसके अतिरिक्त 7 विकास खंड हैं — गोहांड, कुरारा, मौदहा, मुस्करा, राठ, सरीला और सुमेरपुर।
जिले की भौगोलिक सीमाएँ कई जिलों से मिलती हैं। उत्तर में जालौन (उरई), कानपुर नगर और फतेहपुर, पूर्व में बांदा, दक्षिण में महोबा तथा पश्चिम में झाँसी और जालौन जिले स्थित हैं। बेतवा नदी के तट पर मिलने वाली 'मोटी रेत' की पहचान भी इस जिले को विशेष बनाती है, जिसका प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में निर्यात होता है।
कृषि और आम मतदाता के मुद्दे
हमीरपुर जिले की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित है। यहाँ गेहूँ, धान, सरसों, दलहन और सब्जियों की खेती प्रमुख रूप से होती है। बुंदेलखंड क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा होने के कारण यहाँ कृषि संकट और सिंचाई की समस्याएँ मतदाताओं के प्रमुख मुद्दों में से एक रही हैं।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति तय करने में जुट गए हैं। भाजपा के लिए हमीरपुर की दोनों सीटों पर अपनी मौजूदा बढ़त बनाए रखना और सपा व अन्य विपक्षी दलों के लिए इस इलाके में सेंध लगाना, दोनों ही कड़ी चुनौती होगी।