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यूपी चुनाव 2027: कौशांबी की सिराथू, चायल और मंझनपुर सीटों का 2022 में बदला सियासी परिदृश्य

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यूपी चुनाव 2027: कौशांबी की सिराथू, चायल और मंझनपुर सीटों का 2022 में बदला सियासी परिदृश्य

सारांश

2027 के यूपी चुनाव से पहले कौशांबी की तीन सीटें — सिराथू, चायल और मंझनपुर — फिर सियासी रडार पर हैं। 2022 में सिराथू में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की हार, चायल में सपा की पहली जीत और मंझनपुर में इंद्रजीत सरोज की पाँचवीं जीत ने यहाँ के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया था।

मुख्य बातें

सिराथू में 2022 में सपा गठबंधन की पल्लवी पटेल ने BJP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को 7,337 मतों से हराया था।
पल्लवी पटेल को 1,06,278 वोट मिले, मौर्य को 98,941 मत; बसपा के मुनसाब अली 10,073 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
चायल में सपा की पूजा पाल ने पहली बार जीत दर्ज की; वे बाद में BJP में शामिल हो गईं।
मंझनपुर में सपा के इंद्रजीत सरोज ने BJP के लाल बहादुर को 23,878 मतों से हराकर अपनी पाँचवीं जीत दर्ज की।
मंझनपुर में दलित मतदाता (पासी-धोबी समाज) लगभग 21 प्रतिशत हैं — जो सबसे बड़ा वर्ग है।
2027 में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता की कोशिश करेगी, विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए एकजुट हो रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं और कौशांबी जिले की सिराथू, चायल एवं मंझनपुर विधानसभा सीटें एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर ऐसे राजनीतिक उलटफेर हुए थे, जिन्होंने प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहाँ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की जुगत में है, वहीं विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ ज़मीनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।

सिराथू: केशव प्रसाद मौर्य की ऐतिहासिक हार

सिराथू विधानसभा सीट वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव की सर्वाधिक चर्चित सीटों में रही। BJP ने यहाँ से तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को प्रत्याशी बनाया था, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन की ओर से पल्लवी पटेल मैदान में उतरीं। परिणाम ने सबको चौंका दिया — पल्लवी पटेल ने केशव प्रसाद मौर्य को 7,337 मतों के अंतर से पराजित किया।

मतगणना के आँकड़ों के अनुसार, पल्लवी पटेल को 1,06,278 वोट मिले, जबकि केशव प्रसाद मौर्य को 98,941 मत ही प्राप्त हो सके। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी मुनसाब अली 10,073 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस की सीमा देवी को मात्र 845 वोट मिले, जबकि 727 मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना। यह इस बात का संकेत था कि मतदाताओं में हाई-प्रोफ़ाइल उम्मीदवार की उपस्थिति भी जीत की गारंटी नहीं होती।

चायल: सपा की पहली जीत, फिर पूजा पाल की 'घर वापसी'

चायल विधानसभा सीट पर 2022 में सपा की उम्मीदवार पूजा पाल ने जीत दर्ज कर इतिहास रचा — क्योंकि इस सीट पर आज तक सपा का खाता नहीं खुला था। उन्होंने बसपा प्रत्याशी अतुल कुमार द्विवेदी को हराया, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहीं। गौरतलब है कि पूजा पाल बाद में BJP में शामिल हो गईं, जिससे इस सीट का समीकरण एक बार फिर पेचीदा हो गया है।

इस सीट की विशेषता यह है कि यहाँ अधिकतर दलित और पिछड़े वर्ग के नेता ही विधायक बनते रहे हैं। एक समय बसपा का इस सीट पर मज़बूत कब्ज़ा था, लेकिन 2017 में मोदी लहर के सामने बसपा टिक नहीं सकी और तीसरे पायदान पर खिसक गई। 2022 में सपा ने इस सीट पर पहली बार जीत हासिल की, जो उस चुनाव में सपा के मज़बूत दलित-पिछड़ा समीकरण की सफलता को दर्शाता है।

मंझनपुर: इंद्रजीत सरोज की पाँचवीं जीत

मंझनपुर विधानसभा सीट का गठन 1974 के परिसीमन के बाद हुआ था और यहाँ पहला विधानसभा चुनाव 1977 में हुआ, जिसमें जनता पार्टी के नत्थू राम ने जीत दर्ज की थी। 2022 में सपा के वरिष्ठ नेता इंद्रजीत सरोज ने BJP के लाल बहादुर को 23,878 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। लाल बहादुर के खाते में 97,628 मत आए, जबकि बसपा की नीतू कनौजिया 25,430 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं। यह इंद्रजीत सरोज की इस सीट से पाँचवीं जीत थी, जो उनकी इस क्षेत्र में अटूट पकड़ को उजागर करती है।

जातिगत समीकरण और 2027 की चुनौती

मंझनपुर की जातिगत बुनावट की बात करें तो यहाँ के कुल मतदाताओं में दलित (पासी और धोबी समाज) सबसे बड़ा वर्ग है, जो लगभग 21 प्रतिशत है। इसके अलावा पिछड़े वर्ग और सवर्ण समुदाय की आबादी भी निर्णायक भूमिका निभाती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 2027 में सभी दल अपने जातिगत गठबंधन मज़बूत करने में लगे हैं।

तीनों सीटों पर 2022 के नतीजे यह बताते हैं कि परंपरागत वोट बैंक टूट रहे हैं और नए गठबंधन उभर रहे हैं। BJP को सिराथू में बड़ा झटका लगा था, तो सपा ने चायल में पहली बार खाता खोला था — ये दोनों घटनाएँ 2027 की रणनीति बनाने में सभी दलों के लिए अहम सबक हैं। आने वाले महीनों में इन सीटों पर उम्मीदवार चयन और गठबंधन की रणनीति तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अब सपा को वह सीट जीतना कठिन होगा जो उसने पहली बार 2022 में जीती थी। मुख्यधारा की कवरेज इन सीटों को अलग-थलग देखती है, जबकि असल कहानी यह है कि कौशांबी में दलित-पिछड़े मतदाताओं का रुझान ही 2027 का परिणाम तय करेगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिराथू विधानसभा सीट पर 2022 में क्या हुआ था?
2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा गठबंधन की पल्लवी पटेल ने BJP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को 7,337 मतों से हराया था। पल्लवी पटेल को 1,06,278 वोट मिले जबकि मौर्य को 98,941 मत प्राप्त हुए।
चायल सीट पर 2022 में किसने जीत दर्ज की थी?
2022 में चायल विधानसभा सीट से सपा की उम्मीदवार पूजा पाल ने जीत हासिल की थी — यह इस सीट पर सपा की पहली कभी जीत थी। बाद में पूजा पाल BJP में शामिल हो गईं।
मंझनपुर सीट पर इंद्रजीत सरोज की क्या खासियत है?
सपा के इंद्रजीत सरोज ने 2022 में मंझनपुर से BJP के लाल बहादुर को 23,878 मतों से हराकर इस सीट से अपनी पाँचवीं जीत दर्ज की। यह उनकी इस सीट पर अटूट पकड़ को दर्शाता है।
मंझनपुर सीट का जातिगत समीकरण क्या है?
मंझनपुर में दलित मतदाता (पासी और धोबी समाज) कुल मतदाताओं का लगभग 21 प्रतिशत हैं और सबसे बड़े वर्ग हैं। इसके अलावा पिछड़े वर्ग और सवर्ण समुदाय भी निर्णायक भूमिका में हैं।
2027 के यूपी चुनाव में इन सीटों पर मुख्य मुकाबला किनके बीच होगा?
2027 में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, जबकि सपा और अन्य विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इन सीटों पर दलित-पिछड़े मतदाताओं का रुझान और गठबंधन की रणनीति निर्णायक साबित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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