2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उत्तराखंड में भारी बारिश से नदियां उफान पर, भूस्खलन-बाढ़ का खतरा; IMD का रेड अलर्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तराखंड में भारी बारिश से नदियां उफान पर, भूस्खलन-बाढ़ का खतरा; IMD का रेड अलर्ट

सारांश

उत्तराखंड में मानसून का कहर जारी है — हल्द्वानी में 24 घंटे में 192 मिमी बारिश, दो दर्जन घरों में पानी घुसा, कैंची धाम के पास शिप्रा नदी उग्र रूप में। IMD की चेतावनी के बीच भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बरकरार है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड में 2 सितंबर को भारी बारिश से कई जिलों में नदियां और नाले उफान पर आए।
हल्द्वानी में पिछले 24 घंटों में 192 मिमी बारिश दर्ज, गौला नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर।
नैनीताल जिले के पांडेछोड़ गांव में ककरिया नाले का पानी लगभग दो दर्जन घरों में घुसा।
कैंची धाम के पास शिप्रा नदी उग्र रूप में; मंदिर सुरक्षित, धार्मिक गतिविधियां सामान्य।
चमोली में अलकनंदा और पिंडर नदियां उफान पर; कर्णप्रयाग में तटीय इमारतों को खतरा।
IMD ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की।

उत्तराखंड में 2 सितंबर को भारी बारिश के चलते प्रमुख नदियां और नाले खतरनाक स्तर तक उफान पर आ गए हैं, जिससे कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। इससे भूस्खलन, मलबा गिरने, जलभराव और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क अवरोध का खतरा और बढ़ गया है।

नदियों का जलस्तर और बारिश की तीव्रता

ऋषिकेश में बिन नदी पहले से ही उफान पर थी, जबकि हल्द्वानी में गौला नदी के जलस्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। हल्द्वानी में पिछले 24 घंटों में 192 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो इस क्षेत्र में मानसून की असाधारण तीव्रता को दर्शाती है।

चमोली जिले में अलकनंदा और पिंडर नदियां भी उफान पर हैं और कई स्थानों पर सड़कें बंद हो गई हैं। कर्णप्रयाग क्षेत्र में पिंडर नदी का उफनता पानी और तेज लहरें नदी किनारे बनी रिहायशी इमारतों, होटलों और अन्य ढांचों तक खतरनाक रूप से करीब पहुंचती देखी गई हैं।

कैंची धाम के पास शिप्रा नदी का उग्र रूप

कैंची धाम के समीप शिप्रा नदी ने मंगलवार को अपना रौद्र रूप दिखाया। आमतौर पर मंदिर के बाहर शांत बहने वाली यह नदी लगातार बारिश के बाद भारी जलराशि से लबालब हो गई। हालांकि, पानी के तेज बहाव के बावजूद मंदिर की सुरक्षा दीवार और पुल के खंभे सुरक्षित रहे और मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। मंदिर में धार्मिक गतिविधियां और पूजा-अर्चना सामान्य रूप से जारी रही।

नैनीताल में घरों में घुसा नाले का पानी

नैनीताल जिले के अल्चौना स्थित पांडेछोड़ गांव के पीछे बहने वाले ककरिया नाले का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने लगा। दोपहर तक नाले का बहाव इतना तेज हो गया कि पानी लगभग दो दर्जन घरों में प्रवेश कर गया। प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रभावित निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके कीमती सामान को बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए।

प्रशासन की अपील और राहत कार्य

राज्य प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले निवासियों से बार-बार सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। IMD की चेतावनी को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड हर मानसून सीजन में भूस्खलन और बाढ़ की गंभीर चुनौतियों का सामना करता है।

आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है और राहत-बचाव दलों को तैनात रखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

घरों में पानी घुसता है और प्रशासन 'सतर्क रहने' की अपीलें करता है। हल्द्वानी में 24 घंटे में 192 मिमी बारिश और कर्णप्रयाग में नदी किनारे बनी इमारतों तक पानी पहुंचना यह सवाल उठाता है कि बाढ़-संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण नियंत्रण और नदी तट प्रबंधन पर दीर्घकालिक नीति कहां है। राहत-बचाव की तत्परता जरूरी है, लेकिन असली जवाबदेही उन संरचनात्मक चूकों पर होनी चाहिए जो हर साल इस संकट को और गहरा करती हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में भारी बारिश से कौन-कौन से जिले प्रभावित हैं?
2 सितंबर को हल्द्वानी (नैनीताल जिला), ऋषिकेश, चमोली और कर्णप्रयाग सहित कई जिले भारी बारिश से प्रभावित हैं। IMD ने राज्य के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है।
हल्द्वानी में कितनी बारिश दर्ज की गई?
हल्द्वानी में पिछले 24 घंटों में 192 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में मानसून की असाधारण तीव्रता को दर्शाती है। इसके चलते गौला नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है।
कैंची धाम मंदिर को बाढ़ से कोई नुकसान हुआ?
नहीं, शिप्रा नदी के उग्र रूप के बावजूद कैंची धाम मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। मंदिर की सुरक्षा दीवार और पुल के खंभे सुरक्षित रहे और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहीं।
नैनीताल जिले में बाढ़ से कितने घर प्रभावित हुए?
नैनीताल जिले के अल्चौना स्थित पांडेछोड़ गांव में ककरिया नाले का पानी लगभग दो दर्जन घरों में घुस गया। प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रभावित निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू किया।
उत्तराखंड में आगे मौसम कैसा रहेगा?
IMD ने उत्तराखंड के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने का पूर्वानुमान जताया है। इससे भूस्खलन, जलभराव और सड़क अवरोध का खतरा और बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले