31 जुलाई 2026
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वीएचपी का विरोध: संसद में भगवा वेश में विपक्ष के 'नाटक' से हिंदू भावनाएँ आहत, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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वीएचपी का विरोध: संसद में भगवा वेश में विपक्ष के 'नाटक' से हिंदू भावनाएँ आहत, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

संसद के मकर द्वार पर भगवा वेश में विपक्ष का 'दान चोरी' नाटक अब धार्मिक विवाद बन चुका है। वीएचपी ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, साधु-संतों ने सदस्यता रद्द करने की माँग की है — और सवाल यह है कि संसद परिसर में धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग कहाँ तक उचित है।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 31 जुलाई को संसद परिसर में विपक्ष के भगवा वेश वाले प्रदर्शन की कड़ी निंदा की।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता विपक्ष राहुल गांधी इस प्रदर्शन में शामिल थे।
वीएचपी के सुरेंद्र जैन ने लोकसभा स्पीकर से सख्त कार्रवाई की माँग की और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
अखिल भारतीय संत समिति के जितेंद्रानंद सरस्वती ने संसद परिसर के 'दुरुपयोग' का आरोप लगाया।
साधु-संतों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से सांसदों की सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 31 जुलाई को संसद परिसर में हुए विपक्ष के एक प्रदर्शन की कड़ी निंदा की, जिसमें निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और अन्य सांसदों ने भगवा वस्त्र धारण कर अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी के विरुद्ध एक नाटकीय प्रदर्शन किया। वीएचपी का आरोप है कि इस प्रदर्शन ने हिंदू धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है और संत समाज का अपमान किया है।

मकर द्वार पर क्या हुआ

संसद के मकर द्वार के सामने विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने 'चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाए। सीढ़ियों पर दान पेटियाँ रखी गईं और भगवा वस्त्र पहने पप्पू यादव उनके पास बैठ गए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों ने पेटियों में पैसे डाले, जबकि पप्पू यादव ने राम मंदिर में कथित चोरी को दर्शाने के लिए वह पैसे अपनी जेब में रख लिए।

वीएचपी की प्रतिक्रिया और कानूनी चेतावनी

एक वीडियो बयान में वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने इस प्रदर्शन को 'अभद्र' करार दिया। उन्होंने कहा कि संत का वेश धारण करके विपक्षी सांसदों ने न केवल संतों का अपमान किया, बल्कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है। जैन ने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह रावण ने सीता के अपहरण के लिए संत का वेश धारण किया था, उसी तरह विपक्ष हिंदू आस्था को 'हाईजैक' करने की कोशिश कर रहा है।

जैन ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इन सांसदों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की और यह भी स्पष्ट किया कि वीएचपी इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रही है।

साधु-संतों और धार्मिक संगठनों का आक्रोश

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने संसद परिसर का 'दुरुपयोग' कर सनातन धर्म का अपमान किया। राम मंदिर और अयोध्या के धार्मिक संस्थानों से जुड़े प्रमुख साधु-संतों और पदाधिकारियों ने भी इस प्रदर्शन की आलोचना की और प्रदर्शनकारी सांसदों को संसद से बाहर करने की माँग की।

इन धार्मिक नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया।

विपक्ष को जैन की चुनौती

जैन ने विपक्षी नेताओं को यह भी चुनौती दी कि वे 'मौलवी या पादरी का वेश धारण करें और उन धर्मों का मजाक उड़ाएं'। उनका आरोप था कि विपक्ष केवल हिंदू मान्यताओं को ही निशाना बनाता है।

आगे क्या

वीएचपी की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ सकता है। लोकसभा स्पीकर की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने संसद परिसर में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भगवा वेश का चुनाव उस संदेश को प्रतीकवाद की आग में झोंक देता है। वीएचपी की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और सदस्यता रद्द करने की माँग यह दर्शाती है कि मामला अब संसदीय विशेषाधिकार और धार्मिक भावनाओं के बीच टकराव का रूप ले सकता है — एक ऐसा मोर्चा जिसपर अदालतें और लोकसभा स्पीकर दोनों की नज़र होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद में विपक्ष ने भगवा वेश में क्या प्रदर्शन किया?
31 जुलाई को संसद के मकर द्वार के सामने विपक्षी सांसदों ने भगवा वस्त्र पहनकर अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी को उजागर करने के लिए एक नाटकीय प्रदर्शन किया। पप्पू यादव दान पेटियों के पास बैठे और अन्य सांसदों द्वारा डाले गए पैसे अपनी जेब में रखकर कथित चोरी को दर्शाया।
वीएचपी ने इस प्रदर्शन पर क्या आपत्ति जताई?
वीएचपी का कहना है कि भगवा वस्त्र — जो संतों और हिंदू धर्म का प्रतीक है — को राजनीतिक नाटक में इस्तेमाल करना हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान है। वीएचपी के सुरेंद्र जैन ने इसे 'अभद्र' प्रदर्शन करार दिया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
इस मामले में किन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है?
साधु-संतों और वीएचपी ने पप्पू यादव, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इनकी सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया गया है।
अखिल भारतीय संत समिति का इस विवाद में क्या रुख है?
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने संसद परिसर का 'दुरुपयोग' कर सनातन धर्म का अपमान किया। उन्होंने इस प्रदर्शन को धर्म के विरुद्ध एक सुनियोजित कदम बताया।
क्या इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
वीएचपी ने स्पष्ट किया है कि वह इन सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। फिलहाल लोकसभा स्पीकर की ओर से कोई औपचारिक निर्णय नहीं आया है, लेकिन यह मामला संसदीय और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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