वारिस पठान का आरोप: 'धुरंधर 2' मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बनाई गई
सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'धुरंधर 2' विवादों में है।
- वारिस पठान का आरोप है कि यह मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बनाई गई है।
- निर्माताओं पर फिल्म के सामाजिक प्रभाव की जिम्मेदारी है।
- समाज में सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों की आवश्यकता है।
- नफरत फैलाने वाली फिल्मों को बैन करने की मांग की जा रही है।
मुंबई, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' अब सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है, और दर्शकों द्वारा इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। उनका मानना है कि फिल्म भले ही लंबी है, लेकिन इसके निर्माण की गुणवत्ता के कारण कोई बोरियत महसूस नहीं होती।
जहां एक ओर फैंस रणवीर सिंह के प्रति अपने प्रेम का इज़हार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 'धुरंधर 2' को लेकर विवाद भी सामने आ रहा है। कई राजनीतिक पार्टियों ने इस फिल्म के खिलाफ आवाज उठाई है।
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि इस फिल्म का उद्देश्य मुसलमानों को बदनाम करना है। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि वे ऐसी फिल्मों को नहीं देखते जिनमें केवल नफरत को बढ़ावा दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने फिल्म का पहला भाग भी नहीं देखा है।
पठान ने कहा कि इस प्रकार की फिल्में एक साजिश के तहत बनाई जाती हैं ताकि मुसलमानों को बदनाम किया जा सके, और देश में नफरत फैलाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कई प्रोपेगेंडा फिल्में बन चुकी हैं। ऐसी फिल्मों का उद्देश्य केवल पैसा कमाना है, और फिल्म निर्माताओं को इससे समाज पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता नहीं है।
उन्होंने जोर दिया कि फिल्में बननी चाहिए, लेकिन उन्हें सकारात्मक विषयों पर आधारित होना चाहिए जो हमें मनोरंजन के साथ सच्चाई से अवगत कराएं, न कि किसी विशेष वर्ग को निशाना बनाने के लिए। 'धुरंधर 2' से पहले केरल-1 और केरल-2 भी आई थीं, जिनमें मुसलमानों को टारगेट किया गया था।
वारिस पठान ने यह सवाल उठाया कि क्या अच्छे विषयों पर फिल्म बनाने के लिए निर्माताओं की कमी है, जो 'धुरंधर 2' जैसी फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी नफरत फैलाने वाली फिल्मों को तुरंत बैन किया जाना चाहिए। वे लोगों से भी अपील करते हैं कि वे ऐसी फिल्मों को न देखें।