वाशिम के किसानों ने ₹40,000 में खरीदी नाव, खेत तक पहुँचने का रास्ता बंद होने से मजबूरी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के वाशिम जिले के मोहजा गांव के किसानों को अपने ही खेत तक पहुँचने के लिए ₹40,000 खर्च कर नाव खरीदनी पड़ी है — यह तस्वीर प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीण कृषि संकट की गहरी परतें उजागर करती है। खेत तक जाने वाला वैकल्पिक रास्ता एक अन्य किसान द्वारा बंद कर दिए जाने और मूल रास्ता बांध में समा जाने के बाद, किसानों के पास जलमार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा है। 29 अगस्त को सामने आई यह घटना महाराष्ट्र के किसानों की बदतर होती दशा पर एक बार फिर ध्यान खींचती है।
मुख्य घटनाक्रम
मोहजा गांव के किसानों की चार से पाँच एकड़ कृषि भूमि बांध के उस पार है, जहाँ इस समय हल्दी की फसल लगी हुई है। पहले एक पड़ोसी किसान के खेत से होकर रास्ता मिलता था, लेकिन उसने अनुमति देने से मना कर दिया। पुराना रास्ता पहले ही बांध में डूब चुका है। बारिश के मौसम में बांध का जलस्तर बढ़ने से खतरा और अधिक गहरा हो गया है।
अब किसान प्रतिदिन लबालब भरे बांध के बीच से नाव खेकर अपने खेत तक पहुँचते हैं — एक ऐसा जोखिम जो न केवल उनकी फसल बल्कि उनकी जान को भी दांव पर लगाता है।
किसानों की आपबीती
किसान सुभाष सरनाईक ने बताया, 'अब हमने खेत में जाने के लिए नाव खरीदी है। हमारे पास कोई रास्ता नहीं है। खेत की तीनों तरफ पानी है। पहले वह किसान हमें उसके खेत से जाने देता था, लेकिन अब जब उसने इनकार किया तो हमने प्रशासन के पास रास्ते की मांग की, जिसे 12 महीने बीत गए। प्रशासन सिर्फ तारीख पर तारीख दे रहा है, जिसके चलते हमने नाव खरीदी है।'
किसान भागवत सरनाईक ने बताया, 'मेरी 5 एकड़ खेती है, जिसमें ढाई एकड़ बांध में चला गया है। बांध के उस पार ढाई एकड़ में हल्दी की फसल है। ₹40,000 में हमने नाव खरीदी है, जिसे चलाना भी हमें नहीं आता। लेकिन खेत में लगी हल्दी की फसल बर्बाद न हो, इसलिए यह नाव लानी पड़ी।'
प्रशासन पर आरोप
किसानों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष में उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई — आवेदन दिए, शिकायतें कीं — लेकिन खेत तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक रास्ता नहीं बना। खेत तक ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और बाइक का जाना असंभव है, इसलिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मानसून के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं और कृषि भूमि तक पहुँच का संकट और गहरा हो गया है। गौरतलब है कि भूमि-मार्ग विवाद ग्रामीण महाराष्ट्र में एक पुरानी समस्या है, जिसका समाधान प्रशासनिक स्तर पर अक्सर लंबित रहता है।
आम जनता और किसानों पर असर
हल्दी एक नकदी फसल है और इसकी देखभाल में देरी सीधे किसान की आय को प्रभावित करती है। प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर नाव से खेत तक जाना न केवल शारीरिक रूप से थकाऊ है, बल्कि बांध में जलस्तर बढ़ने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
क्या होगा आगे
किसानों ने प्रशासन से स्थायी वैकल्पिक रास्ते की मांग दोहराई है। यदि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं हुआ तो बारिश के शेष महीनों में खेत तक पहुँच और जटिल हो सकती है तथा हल्दी की फसल को नुकसान का खतरा बना रहेगा।