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डिजिटल गिरफ्तारी गैंग का सरगना अमन सिंह गोवा के समुद्र तट से गिरफ्तार, पश्चिम बंगाल पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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डिजिटल गिरफ्तारी गैंग का सरगना अमन सिंह गोवा के समुद्र तट से गिरफ्तार, पश्चिम बंगाल पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सारांश

डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी से देशभर में ठगी करने वाले गिरोह का सरगना अमन सिंह गोवा के समुद्र तट पर तंबू में छिपा मिला। पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने उसे रंगे हाथों दबोचा — मुंबई और कोलकाता दोनों जगह उस पर मामले दर्ज हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने अमन सिंह को गोवा के समुद्र तट पर रविवार को गिरफ्तार किया।
अमन सिंह पर 'डिजिटल गिरफ्तारी' की धमकी देकर देशभर में साइबर ठगी करने का आरोप है।
गिरोह ने कोलकाता व साल्ट लेक सहित कई शहरों में अवैध कॉल सेंटर और सिम बॉक्स नेटवर्क संचालित किया।
मुंबई पुलिस में भी उसके विरुद्ध साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज है; कोलकाता में यौन उत्पीड़न का भी आरोप है।
आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है; नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने 27 जुलाई 2026 को देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के मुख्य आरोपी अमन सिंह को गोवा के एक समुद्र तट पर तंबू में छिपे हुए अवस्था में गिरफ्तार किया। यह गिरोह 'डिजिटल गिरफ्तारी' की धमकी देकर देश भर के नागरिकों को ठगता था।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, बिधाननगर (साल्ट लेक) के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स थाने में दर्ज शिकायत के आधार पर जाँच शुरू हुई। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ और उनके मोबाइल फोन के तकनीकी विवरण की जाँच के बाद अमन सिंह की पहचान मुख्य आरोपी के रूप में हुई। सूचना मिली कि वह गोवा के एक समुद्र तट पर तंबू में छिपा है, जिसके बाद साइबर अपराध शाखा के जासूसों ने रविवार को वहाँ छापा मारकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

गिरोह का तरीका और नेटवर्क

अधिकारियों के अनुसार, अमन सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर कोलकाता, साल्ट लेक सहित देश के कई हिस्सों में अवैध कॉल सेंटर संचालित किए थे। इन केंद्रों से लोगों को 'डिजिटल गिरफ्तारी' का भय दिखाकर ठगा जाता था। अवैध दूरसंचार ढाँचा खड़ा करने के लिए गिरोह ने सिम बॉक्स तकनीक का भी इस्तेमाल किया था, जिससे कॉल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जा सके।

एकाधिक राज्यों में दर्ज हैं मामले

अमन सिंह के विरुद्ध केवल पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि मुंबई पुलिस में भी इसी प्रकार का साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इसके अतिरिक्त, कोलकाता में उस पर यौन उत्पीड़न का भी आरोप है। दोनों शहरों की पुलिस से बचने के लिए वह लंबे समय से फरार था। पुलिस के मुताबिक, वह विभिन्न राज्यों में दर्ज अनेक साइबर धोखाधड़ी मामलों का मास्टरमाइंड है।

आगे की जाँच

अमन सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि उससे पूछताछ के आधार पर इस राज्य और देश भर में फैले साइबर अपराध नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से गिरोह के व्यापक तार उजागर हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक वह कई राज्यों की पुलिस से कैसे बचता रहा। मुंबई और कोलकाता — दोनों जगह मामले दर्ज होने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय की कमी स्पष्ट दिखती है। सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल बताता है कि ये गिरोह अब परिष्कृत दूरसंचार उपकरणों तक पहुँच रखते हैं, जो साधारण कानून प्रवर्तन से कहीं आगे की चुनौती है। जब तक केंद्रीय स्तर पर साइबर अपराध नेटवर्क की रियल-टाइम ट्रैकिंग का ढाँचा नहीं बनता, ऐसे सरगना राज्य की सीमाओं का फायदा उठाते रहेंगे।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल गिरफ्तारी साइबर धोखाधड़ी क्या होती है?
डिजिटल गिरफ्तारी एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें जालसाज खुद को पुलिस, CBI या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'डिजिटल हिरासत' में रखने का डर दिखाते हैं और पैसे ऐंठते हैं। यह भारत में तेज़ी से बढ़ता साइबर अपराध है जिसमें देशभर के नागरिक शिकार हुए हैं।
अमन सिंह को कहाँ और कैसे गिरफ्तार किया गया?
अमन सिंह को गोवा के एक समुद्र तट पर तंबू में छिपे हुए रविवार को गिरफ्तार किया गया। पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा को मोबाइल फोन के तकनीकी विवरण और पहले गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ के आधार पर उसके ठिकाने का पता चला।
अमन सिंह पर कौन-कौन से मामले दर्ज हैं?
अमन सिंह के विरुद्ध पश्चिम बंगाल के बिधाननगर थाने और मुंबई पुलिस में साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा कोलकाता में उस पर यौन उत्पीड़न का भी आरोप है। वह इन सभी मामलों में लंबे समय से फरार था।
इस गिरोह ने ठगी के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
गिरोह ने कोलकाता, साल्ट लेक सहित कई शहरों में अवैध कॉल सेंटर स्थापित किए और सिम बॉक्स तकनीक का उपयोग कर अवैध दूरसंचार ढाँचा तैयार किया। इससे कॉल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाकर पीड़ितों को 'डिजिटल गिरफ्तारी' की धमकी दी जाती थी।
गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा?
अमन सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है जहाँ उससे विस्तृत पूछताछ होगी। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की देशभर में तलाश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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