मोतीलाल नेहरू जयंती: वह बैरिस्टर जिनकी धारदार दलीलों से कांपते थे अंग्रेज जज, आधुनिक भारत की नींव रखी

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मोतीलाल नेहरू जयंती: वह बैरिस्टर जिनकी धारदार दलीलों से कांपते थे अंग्रेज जज, आधुनिक भारत की नींव रखी

सारांश

मोतीलाल नेहरू सिर्फ एक बैरिस्टर या नेता नहीं थे — वे आधुनिक भारत के पहले वास्तुकार थे। 1928 में जब दुनिया के कई देशों में महिलाओं को मताधिकार नहीं था, उन्होंने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और धर्मनिरपेक्षता की वकालत की। उनकी विरासत जवाहरलाल नेहरू से कहीं आगे जाती है।

मुख्य बातें

पंडित मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई 1861 को हुआ; पिता गंगाधर की मृत्यु के तीन महीने बाद।
वकालत परीक्षा में पूरे प्रांत में प्रथम स्थान; अंग्रेज जज भी उनकी धारदार दलीलों से खौफ खाते थे।
1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद उन्होंने लाखों की वकालत छोड़ी और पंजाब में बेगुनाहों के लिए निःशुल्क केस लड़े।
दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की; संसद में 'सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक' को गिरा दिया।
1928 की नेहरू रिपोर्ट में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, महिला-पुरुष समान अधिकार और धर्मनिरपेक्षता की वकालत की।
6 फरवरी 1931 को अंतिम सांस ली; आनंद भवन राष्ट्र को दान कर दिया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान स्तंभ पंडित मोतीलाल नेहरू केवल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता नहीं थे — वे उस ऐतिहासिक सेतु थे जिसने एक पराधीन और रूढ़िवादी समाज को आधुनिक, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत की दहलीज तक पहुँचाया। 6 मई 1861 को जन्मे मोतीलाल नेहरू की जयंती पर उनके असाधारण जीवन और संघर्ष को याद करना आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब दिल्ली जल रही थी, तब उनका परिवार जान बचाकर आगरा भागने पर मजबूर हुआ। पिता गंगाधर की मृत्यु के ठीक तीन महीने बाद जन्मे इस बालक का बचपन घोर तंगहाली में बीता। लेकिन कुशाग्र बुद्धि के धनी मोतीलाल नेहरू ने अपनी अदम्य लगन से वकालत की परीक्षा में पूरे प्रांत में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी कानूनी दलीलें इतनी पैनी और तर्कसंगत होती थीं कि अंग्रेज जज भी उनसे खौफ खाते थे।

एक चर्चित प्रसंग के अनुसार, जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के दौरान एक बौखलाए ब्रिटिश सैन्य अधिकारी ने उनसे पूछा,

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक ऐतिहासिक अन्याय है। 1928 की नेहरू रिपोर्ट उस दौर का सबसे प्रगतिशील संवैधानिक दस्तावेज़ था — जब यूरोप के कई लोकतंत्र भी महिलाओं को मताधिकार देने से हिचकते थे, तब मोतीलाल ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और पूर्ण धर्मनिरपेक्षता की माँग रखी। स्वराज पार्टी की संसदीय रणनीति — व्यवस्था के भीतर रहकर व्यवस्था को ध्वस्त करना — आज भी विपक्षी राजनीति के लिए एक पाठ्यपुस्तक है। विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति ने आधुनिक भारत का संवैधानिक खाका खींचा, उसे इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में अक्सर महज एक 'पिता' के रूप में समेट दिया जाता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोतीलाल नेहरू का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
पंडित मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई 1861 को हुआ था। उनके पिता गंगाधर की मृत्यु उनके जन्म से तीन महीने पहले ही हो गई थी, और 1857 के विद्रोह के दौरान उनका परिवार दिल्ली से आगरा पलायन कर गया था।
नेहरू रिपोर्ट 1928 क्या थी और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
1928 की नेहरू रिपोर्ट मोतीलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत भारत का पहला स्व-निर्मित संवैधानिक खाका था। इसमें सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, महिलाओं को समान अधिकार और राज्य की धर्मनिरपेक्षता की स्पष्ट वकालत की गई थी — उस दौर में यह अत्यंत क्रांतिकारी दृष्टिकोण था।
स्वराज पार्टी की स्थापना क्यों और कैसे हुई?
1922 में जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया, तब मोतीलाल नेहरू ने सी.आर. दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी बनाई। इसका उद्देश्य केंद्रीय विधान सभा में प्रवेश कर अंग्रेज सरकार की नीतियों को भीतर से विफल करना था, जो काफी हद तक सफल भी रहा।
जलियांवाला बाग नरसंहार का मोतीलाल नेहरू पर क्या प्रभाव पड़ा?
1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार ने मोतीलाल नेहरू को भीतर से बदल दिया। इस घटना के बाद उन्होंने अपनी लाखों की वकालत छोड़ दी और पंजाब जाकर उन निर्दोष लोगों के लिए निःशुल्क मुकदमे लड़े जिन्हें अंग्रेजों ने फाँसी की सजा सुनाई थी।
मोतीलाल नेहरू की मृत्यु कब हुई और उनकी अंतिम विरासत क्या रही?
पंडित मोतीलाल नेहरू का निधन 6 फरवरी 1931 को हुआ। अपने अंतिम वर्षों में उन्होंने अपना प्रिय आनंद भवन राष्ट्र को दान कर दिया और 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में 69 वर्ष की आयु में खराब स्वास्थ्य के बावजूद जेल गए।
राष्ट्र प्रेस
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