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चेन्नई बैंक लोन फ्रॉड: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व बैंक मैनेजर और कंपनी प्रमुख को सुनाई 7 साल की सज़ा, ₹5.29 करोड़ की धोखाधड़ी

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चेन्नई बैंक लोन फ्रॉड: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व बैंक मैनेजर और कंपनी प्रमुख को सुनाई 7 साल की सज़ा, ₹5.29 करोड़ की धोखाधड़ी

सारांश

चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने ₹5.29 करोड़ के हाउसिंग लोन फर्जीवाड़े में पूर्व बैंक मैनेजर और निजी कंपनी प्रमुख को 7 साल की कठोर सज़ा सुनाई। 2006-07 में 28 फर्जी लोन मंजूर किए गए थे; मामला 2009 में दर्ज हुआ और 15 साल बाद फैसला आया।

मुख्य बातें

चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ₹5.29 करोड़ के हाउसिंग लोन फ्रॉड में दो दोषियों को 7 साल की कठोर कैद सुनाई।
तत्कालीन सीनियर मैनेजर दीपक वी.
मेनन को 7 साल की सज़ा और ₹65,000 जुर्माना।
शिवगणेशन को 7 साल की सज़ा और ₹1.17 लाख जुर्माना; कंपनी पर ₹26,000 जुर्माना।
2006-2007 के बीच जाली दस्तावेज़ों से 28 फर्जी हाउसिंग लोन स्वीकृत किए गए थे।
सीबीआई ने मामला 29 अप्रैल 2009 को दर्ज किया; चार्जशीट 30 जून 2010 को दाखिल हुई।
वैद्यनाथन का मुकदमे के दौरान निधन हो गया, उनके विरुद्ध कार्यवाही बंद।

चेन्नई की विशेष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ ₹5.29 करोड़ की हाउसिंग लोन धोखाधड़ी के मामले में दो दोषियों को सात वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। दोषियों में बैंक की ट्रिपलिकेन शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक और एक निजी कंपनी के प्रमुख शामिल हैं, जिन्होंने 2006-2007 के बीच जाली दस्तावेज़ों के आधार पर 28 फर्जी हाउसिंग लोन स्वीकृत करवाए थे।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ट्रिपलिकेन शाखा, चेन्नई के तत्कालीन सीनियर मैनेजर दीपक वी. मेनन को दोषी करार देते हुए सात साल की कठोर कैद और ₹65,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई। साथ ही, 'श्री शास्त्रु एसोसिएट्स कदान्थेत्ती प्राइवेट लिमिटेड' के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बी. शिवगणेशन को भी सात साल की कठोर कैद और ₹1.17 लाख के जुर्माने की सज़ा दी गई। इस मामले में संबंधित कंपनी पर अलग से ₹26,000 का जुर्माना लगाया गया है।

फ्रॉड कैसे हुआ

सीबीआई ने यह मामला 29 अप्रैल 2009 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2006 और 2007 के बीच जाली एवं मनगढ़ंत दस्तावेज़ों के सहारे धोखाधड़ी से 28 हाउसिंग लोन स्वीकृत किए गए और वितरित किए गए। जाँच में यह सामने आया कि इन फर्जी लेन-देन के कारण फरवरी 2010 तक बकाया राशि ₹5.29 करोड़ से अधिक हो गई थी।

आरोपी और चार्जशीट

जाँच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 30 जून 2010 को चार आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। इनमें बैंक अधिकारी दीपक वी. मेनन, कंपनी प्रमुख बी. शिवगणेशन, श्री शास्त्रु एसोसिएट्स कदान्थेत्ती प्राइवेट लिमिटेड और एक निजी व्यक्ति एस. वैद्यनाथन शामिल थे। गौरतलब है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन का निधन हो गया, जिसके बाद उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

अदालत का फैसला और उसका महत्व

सबूतों की गहन समीक्षा और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने शेष आरोपियों को दोषी पाया। यह मामला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह बैंकिंग तंत्र के भीतर से ही की गई धोखाधड़ी का उदाहरण है, जहाँ एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने बाहरी सहयोगियों के साथ मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को करोड़ों का नुकसान पहुँचाया।

आगे की स्थिति

अदालत के इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आंतरिक अनुपालन और निगरानी तंत्र की अहमियत एक बार फिर रेखांकित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया बैंकिंग धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक के लिए तेज़ ट्रायल की ज़रूरत को उजागर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे मामले दोहराए जाते रहेंगे। सज़ा का स्वागत है, लेकिन असली सवाल यह है कि बैंकों की आंतरिक निगरानी व्यवस्था में क्या सुधार हुए।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई बैंक लोन फ्रॉड मामला क्या है?
यह मामला 2006-2007 में चेन्नई में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ट्रिपलिकेन शाखा में हुई धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें जाली दस्तावेज़ों के आधार पर 28 फर्जी हाउसिंग लोन स्वीकृत किए गए और बैंक को ₹5.29 करोड़ का नुकसान हुआ। सीबीआई ने 2009 में मामला दर्ज किया था।
इस मामले में किसे और कितनी सज़ा मिली?
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन सीनियर मैनेजर दीपक वी. मेनन और श्री शास्त्रु एसोसिएट्स कदान्थेत्ती प्राइवेट लिमिटेड के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बी. शिवगणेशन दोनों को 7-7 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई है। मेनन पर ₹65,000 और शिवगणेशन पर ₹1.17 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।
इस फ्रॉड में धोखाधड़ी कैसे की गई थी?
2006 और 2007 के बीच जाली एवं मनगढ़ंत दस्तावेज़ों के आधार पर 28 हाउसिंग लोन धोखाधड़ी से मंजूर किए गए और वितरित किए गए। जाँच में पाया गया कि फरवरी 2010 तक इन फर्जी लेन-देन के कारण बकाया राशि ₹5.29 करोड़ से अधिक हो गई थी।
चौथे आरोपी एस. वैद्यनाथन का क्या हुआ?
एस. वैद्यनाथन को 2010 में दाखिल चार्जशीट में आरोपी बनाया गया था, लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद अदालत ने उनके विरुद्ध कार्यवाही बंद कर दी।
इस मामले में सीबीआई ने कार्रवाई कब शुरू की?
सीबीआई ने 29 अप्रैल 2009 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था। जाँच पूरी होने के बाद 30 जून 2010 को चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
राष्ट्र प्रेस
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