सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम सस्पेंड: गलत अलर्ट के बाद NDMA ने 12 जून को रोकी सेवा
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने 12 जून 2026 को देशव्यापी सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (CBS) को अस्थायी रूप से निलंबित करने की एडवाइजरी जारी की। रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम हरियाणा और उत्तर प्रदेश की आपदा प्रबंधन इकाइयों द्वारा जारी एक गलत अलर्ट के बाद उठाया गया, जिसने आधी रात को नागरिकों के मोबाइल फोन बजा दिए और सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
क्या हुआ उस रात
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की डिजास्टर मैनेजमेंट इकाइयों से जारी एक अलर्ट गलत प्राप्तकर्ताओं तक पहुँच गया। कुछ रिपोर्टों में कथित तौर पर यह भी दावा किया गया है कि यह अलर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संपर्क नंबर तक पहुँचा, जिसके बाद एहतियातन सेवा को तत्काल रोका गया। हालाँकि अधिकारियों ने निलंबन के पीछे की स्पष्ट वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है।
गौरतलब है कि सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट साइलेंट मोड को भी ओवरराइड कर तेज चेतावनी ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं — जिससे आधी रात को भेजा गया कोई भी गलत अलर्ट व्यापक भ्रम और घबराहट का कारण बन सकता है।
NDMA की एडवाइजरी और तकनीकी समीक्षा
NDMA ने 12 जून 2026 को औपचारिक एडवाइजरी जारी कर सिस्टम को अस्थायी रूप से निलंबित किया। इसके बाद दूरसंचार विभाग (DoT), NDMA और गृह मंत्रालय ने मिलकर सिस्टम की तकनीकी और परिचालन समीक्षा शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सेवा की बहाली इस समीक्षा के निष्कर्षों और NDMA के अगले निर्देशों पर निर्भर करेगी।
सिस्टम की पृष्ठभूमि
इस स्वदेशी प्रणाली को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने NDMA और गृह मंत्रालय के सहयोग से विकसित किया है। इसे मई 2026 में लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य आपदाओं, खराब मौसम तथा अन्य आपात स्थितियों के दौरान नागरिकों के मोबाइल फोन पर रियल-टाइम में सूचना पहुँचाना है। लॉन्च से पहले देशव्यापी परीक्षण भी किए गए थे, जिनमें मोबाइल उपयोगकर्ताओं को बीप ध्वनि के साथ 'इमरजेंसी अलर्ट' संदेश प्राप्त हुए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने आपदा-प्रतिक्रिया ढाँचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। CBS को इस फ्रेमवर्क की रीढ़ माना जा रहा था।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी समीक्षा पूरी होने और सुरक्षा उपायों को मज़बूत किए जाने के बाद ही सेवा बहाल की जाएगी। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि सार्वजनिक चेतावनी प्रणालियों में किसी भी तकनीकी चूक के सामाजिक परिणाम कितने व्यापक हो सकते हैं — और इसीलिए इनके परिचालन प्रोटोकॉल पर कड़ी निगरानी ज़रूरी है।