चिपइन सेंटर से जुड़े 1 लाख+ इंजीनियर, भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मिली नई रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार करते हुए चिपइन सेंटर ने चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के अंतर्गत देशभर के 1 लाख से अधिक इंजीनियरों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, ये इंजीनियर 500 से अधिक संगठनों से संबद्ध हैं — जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं। यह उपलब्धि 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2026 के संदर्भ में सामने आई है।
क्या मिल रहा है इंजीनियरों और संस्थानों को
इन इंजीनियरों और संस्थानों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स, चिप डिजाइन एवं फेब्रिकेशन सेवाएँ तथा विशेष प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इन संसाधनों का उपयोग अब तक 4 करोड़ घंटे से अधिक किया जा चुका है — जो इस प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुँच का संकेत है।
मंत्रालय ने बताया कि इन संस्थानों और स्टार्टअप्स ने मिलकर 300 से अधिक चिप डिजाइन विकसित किए हैं, जिन्हें भारत और विदेशों की फाउंड्री में निर्माण के लिए भेजा गया है। सरकार के अनुसार, चिपइन सेंटर अब दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीकृत चिप डिजाइन उपयोगकर्ता समूहों में से एक बन चुका है।
C2S और DLI योजना की भूमिका
चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल विकसित करना है, ताकि देश में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित चिप डिजाइनर तैयार हो सकें और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन क्षमता सुदृढ़ हो।
वहीं, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना ने वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू चिप डिजाइन परियोजनाओं को सहयोग दिया है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 और स्वीकृत परियोजनाएँ
सरकार ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें से तीन इकाइयों ने व्यावसायिक उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की होड़ तेज़ है और अमेरिका, यूरोप तथा जापान अपने-अपने चिप कार्यक्रमों में अरबों डॉलर लगा रहे हैं। भारत की यह पहल उस व्यापक भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में देश की स्थिति को मज़बूत करने का प्रयास है।
पूरी वैल्यू चेन में विकास का संकेत
सेमीकॉन इंडिया 2026 ने यह रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके लिए चिप डिजाइनर, फेब्रिकेशन यूनिट, पैकेजिंग एवं परीक्षण सुविधाएँ, उपकरण एवं सामग्री आपूर्तिकर्ता, शोध संस्थान, स्टार्टअप्स, सिस्टम कंपनियाँ और कुशल कार्यबल — सभी की समान रूप से ज़रूरत है।
सरकार के अनुसार, इस मंच ने इन सभी घटकों को एकत्रित करके यह संकेत दिया है कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम अब संपूर्ण वैल्यू चेन में विकसित हो रहा है। आगे की राह में स्वदेशी नवाचार को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की गति और तेज़ होने की उम्मीद है।