एआई ट्रेड में ठंडक के संकेत, भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेश प्रवाह सुधरने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
नैस्डैक के एक ही सत्र में 5% की गिरावट ने एआई ट्रेड में ठंडक के शुरुआती संकेत दिए हैं, और विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की वापसी का रास्ता खोल सकता है। 7 जून 2026 को विशेषज्ञों ने यह आकलन साझा किया। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का आँकड़ा ₹2,83,662 करोड़ के पार जा चुका है।
एफआईआई बिकवाली का दबाव
एनएसडीएल के आँकड़ों के अनुसार, मई 2026 में एफआईआई ने ₹32,963 करोड़ की बिकवाली की। जून में भी यह सिलसिला जारी रहा और महीने की शुरुआत से अब तक ₹42,926 करोड़ की बिकवाली हो चुकी है। इस तरह 2026 में कुल बिकवाली ₹2,83,662 करोड़ तक पहुँच गई है — जो घरेलू बाज़ार पर लगातार दबाव का संकेत है।
सरकार और आरबीआई के कदम
चालू खाता घाटे और भुगतान संतुलन को संभालने के लिए एफपीआई प्रवाह की अहमियत को देखते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कई नीतिगत उपाय किए हैं। इनमें सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई निवेश पर ब्याज और पूंजीगत लाभ को कर से छूट, एफएआर मार्ग के ज़रिए सरकारी बॉन्ड तक पहुँच का विस्तार, फॉरेक्स स्वैप विंडो का विस्तार, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जुटाई गई FCNR जमा पर हेजिंग लागत वहन करना, और एनआरआई व ओसीआई के लिए भारतीय शेयर बाज़ार में निवेश सीमा बढ़ाना शामिल हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, 'इन उपायों की समग्रता भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह को मज़बूत करेगी।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर विदेशी निवेशकों को भारत में वापस लाना है, तो एआई ट्रेड — जो भारत से विदेशी निवेश के बाहर जाने का मुख्य कारण रहा है — में बदलाव आना चाहिए। फिलहाल इसके शुरुआती संकेत मिल रहे हैं।'
रुपये पर असर
इन नीतिगत कदमों से रुपये को स्थिरता मिलने में भी मदद मिली है। वैश्विक अस्थिरता के चलते रुपया गिरकर ₹96.96 के निचले स्तर तक पहुँच गया था, हालाँकि 5 जून को यह सुधरकर ₹94.94 पर आ गया।
बाज़ार की मौजूदा स्थिति और आगे की राह
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बीच निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख सूचकांक पिछले सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। हालाँकि विश्लेषकों का कहना है कि मज़बूत घरेलू आर्थिक संकेतों ने गिरावट को सीमित करने में मदद की। यदि एआई ट्रेड में ठंडक की प्रवृत्ति बनी रहती है, तो वैश्विक पूँजी का रुख उभरते बाज़ारों, विशेषकर भारत की ओर हो सकता है।