गोल्ड ईटीएफ 2% और सिल्वर ईटीएफ 4% लुढ़का, अमेरिकी फेड के संकेतों से सोने-चांदी में दबाव
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 25 जून को गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में तेज बिकवाली देखी गई — सिल्वर ईटीएफ में करीब 4 प्रतिशत और गोल्ड ईटीएफ में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने के संकेत और डॉलर इंडेक्स के 101 के पार निकलने ने घरेलू बाज़ार में धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया।
सिल्वर ईटीएफ में गिरावट का विवरण
NSE के आँकड़ों के अनुसार, निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (सिल्वर बीईईएस) दिन के दौरान 3.99 प्रतिशत गिरकर ₹202.58 पर आ गया। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ 3.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹208.26 पर, एचडीएफसी सिल्वर ईटीएफ 4 प्रतिशत घटकर ₹200.39 पर, और टाटा सिल्वर ईटीएफ 3.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹20 पर पहुँच गया।
गोल्ड ईटीएफ में भी बिकवाली
निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ (गोल्डबीईईएस) 2.21 प्रतिशत घटकर ₹114.55 पर आया। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ 2.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹117.95 पर, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ 2.8 प्रतिशत घटकर ₹118.17 पर, और एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ 2.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹117.75 पर बंद हुआ।
सोने-चांदी के भाव में गिरावट
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव ₹2,156 गिरकर ₹1,40,022 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो इससे पहले ₹1,42,178 प्रति 10 ग्राम था। 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,30,235 से घटकर ₹1,28,260 प्रति 10 ग्राम हो गई, जबकि 18 कैरेट सोना ₹1,06,634 से कम होकर ₹1,05,017 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मिलाजुला रुख
वैश्विक स्तर पर खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 0.06 प्रतिशत की मामूली मज़बूती के साथ $4,010.32 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 0.94 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ $57.51 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
गिरावट के पीछे की वजह
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत मिलने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब डॉलर इंडेक्स 101 के पार निकल गया है, जिससे डॉलर में कीमत वाली धातुएँ अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महँगी हो जाती हैं और माँग पर दबाव बनता है। गौरतलब है कि ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में सोना और चांदी जैसी गैर-ब्याज-वाली परिसंपत्तियाँ निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं।