24 अगस्त 2026
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गूगल फायरबेस का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग: भारत ने 57 फर्जी वेबसाइटें हटाने का दिया आदेश

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गूगल फायरबेस का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग: भारत ने 57 फर्जी वेबसाइटें हटाने का दिया आदेश

सारांश

साइबर अपराधियों ने गूगल के भरोसेमंद फायरबेस प्लेटफॉर्म को ही हथियार बना लिया — SBI और ICICI जैसे बैंकों की नकल करने वाली 57 फर्जी वेबसाइटें बनाईं, OTP और क्रेडिट कार्ड डेटा चुराया। भारत की I4C ने गूगल को नोटिस भेज इन्हें हटवाया। यह मामला बताता है कि वैध क्लाउड सेवाएँ अब साइबर ठगी की नई आड़ बन रही हैं।

मुख्य बातें

I4C ने अगस्त 2026 में गूगल को फायरबेस पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस हटाने का आदेश दिया।
साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर SBI, ICICI बैंक और Axis बैंक की नकल करने वाले फर्जी पेज बनाए और OTP व क्रेडिट कार्ड डेटा चुराया।
पीएम-किसान के नाम पर फर्जी वेबसाइटों के ज़रिए पीड़ितों को नकली एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड कराई गई, जो फोन से डेटा चुराती थी।
फायरबेस का उपयोग फर्जी वेबसाइट होस्टिंग, मैलवेयर सपोर्ट और चोरी किए गए डेटा के बैकएंड स्टोरेज तीनों के लिए किया जा रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग इन वेबसाइटों को सुरक्षा जाँच में कम संदिग्ध दिखाता है।
फायरबेस और गूगल इन गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं — समस्या प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग में है।

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अगस्त 2026 में गूगल को फायरबेस प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को तत्काल हटाने का निर्देश दिया, क्योंकि इनका कथित तौर पर फिशिंग अभियान चलाने, मैलवेयर फैलाने और भारतीय नागरिकों की संवेदनशील वित्तीय जानकारी चुराने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। यह कार्रवाई इस बात की ओर ध्यान खींचती है कि किस तरह साइबर अपराधी वैध और भरोसेमंद क्लाउड प्लेटफॉर्म को अपने आपराधिक नेटवर्क की आड़ बना रहे हैं।

फायरबेस क्या है और यह कैसे काम करता है

फायरबेस, गूगल का क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसे दुनियाभर के डेवलपर्स मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट बनाने, संचालित करने और प्रबंधित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसमें वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज, यूजर ऑथेंटिकेशन, एनालिटिक्स और अन्य ऐप-संबंधी सेवाएँ शामिल हैं।

इसे अकसर 'बैकएंड-एज-ए-सर्विस' प्लेटफॉर्म कहा जाता है — यानी डेवलपर्स को किसी एप्लिकेशन का पूरा बैकएंड शून्य से नहीं बनाना पड़ता, बल्कि फायरबेस का तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर उपयोग में लाया जा सकता है। यह गूगल के व्यापक क्लाउड कारोबार का हिस्सा है और वैध तकनीकी उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

साइबर अपराधी फायरबेस का दुरुपयोग कैसे कर रहे हैं

I4C की ओर से गूगल को भेजे गए नोटिस के अनुसार, जालसाज कथित तौर पर फायरबेस पर होस्ट की गई वेबसाइटों का उपयोग बड़े बैंकों और भरोसेमंद संस्थाओं की नकल करने वाले फर्जी पेज बनाने के लिए कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और Axis बैंक जैसे प्रमुख बैंकों की नकल की गई।

ये फर्जी पेज असली बैंकिंग वेबसाइटों जैसे दिखाए जाते थे, ताकि उपयोगकर्ता अपने क्रेडिट कार्ड विवरण, वन-टाइम पासवर्ड (OTP) और अन्य संवेदनशील जानकारी दर्ज कर दें। इसके अलावा, कुछ वेबसाइटों का इस्तेमाल कथित तौर पर पीड़ितों के स्मार्टफोन से सीधे जानकारी चुराने के लिए भी किया जा रहा था।

गौरतलब है कि वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करने से ये फर्जी वेबसाइटें और बैकएंड सिस्टम संदेह से परे दिखती हैं — क्योंकि फायरबेस का डोमेन और सुरक्षा प्रमाणपत्र असली होते हैं, जिससे उपयोगकर्ता और कभी-कभी स्वचालित सुरक्षा प्रणालियाँ भी धोखा खा सकती हैं।

पीएम-किसान के नाम पर ठगी का मामला

एक रिपोर्ट किए गए मामले में ठगों ने कथित तौर पर पीएम-किसान भुगतान में सहायता का दावा करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाईं। इन वेबसाइटों के ज़रिए पीड़ितों को एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया गया, जो कथित तौर पर फर्जी थी और पीड़ित के फोन से जानकारी इकट्ठा करने में सक्षम थी।

इस तरह एक पूरी आपराधिक श्रृंखला तैयार होती है — फर्जी वेबसाइट पीड़ित को फंसाती है, फर्जी एप्लिकेशन डिवाइस से डेटा निकालती है, और फायरबेस डेटाबेस चोरी किए गए डेटा को प्राप्त करने और संग्रहीत करने के लिए बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर का काम करता है।

भारत की कार्रवाई और गूगल को नोटिस

भारत ने अगस्त 2026 में I4C के माध्यम से गूगल को नोटिस भेजकर फायरबेस पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने पाया कि इनका कथित तौर पर फिशिंग, मैलवेयर वितरण और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि फायरबेस और गूगल इन धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं — समस्या प्लेटफॉर्म में नहीं, बल्कि इसके वैध इंफ्रास्ट्रक्चर के आपराधिक दुरुपयोग में है। यह कार्रवाई उस व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें साइबर अपराधी विश्वसनीय प्लेटफॉर्म की आड़ लेकर पहचान से बचते हैं।

आम नागरिकों पर असर और सावधानी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, उपयोगकर्ताओं को किसी भी वेबसाइट का URL ध्यान से जाँचना चाहिए, भले ही वह सुरक्षित (HTTPS) दिखे। बैंकिंग जानकारी केवल आधिकारिक ऐप या सत्यापित वेबसाइट पर ही दर्ज करें और अज्ञात स्रोतों से एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड करने से बचें। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि डिजिटल साक्षरता और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव की पहली पंक्ति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही आकर्षक अपराधियों के लिए। फायरबेस जैसे वैध क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग पारंपरिक 'संदिग्ध URL' की पहचान को बेकार कर देता है, क्योंकि डोमेन और SSL प्रमाणपत्र असली होते हैं। भारत की I4C की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बड़े क्लाउड प्रदाताओं के लिए ऐसे दुरुपयोग की रियल-टाइम पहचान और रोकथाम की कोई स्थायी व्यवस्था बनेगी — या हर बार नोटिस-और-हटाओ का यही चक्र चलता रहेगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गूगल फायरबेस क्या है और इसका साइबर ठगी से क्या संबंध है?
फायरबेस गूगल का क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जो डेवलपर्स को वेबसाइट होस्टिंग, डेटा स्टोरेज और ऐप प्रबंधन जैसी सेवाएँ देता है। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर इसी वैध इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग फर्जी बैंकिंग वेबसाइटें होस्ट करने और चोरी किया डेटा संग्रहीत करने के लिए किया।
भारत ने फायरबेस के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अगस्त 2026 में गूगल को नोटिस भेजकर फायरबेस पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइटों और डेटाबेस को हटाने का निर्देश दिया। इन पर फिशिंग, मैलवेयर वितरण और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप था।
किन बैंकों की नकल की गई और उपयोगकर्ताओं का डेटा कैसे चुराया गया?
रिपोर्टों के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और Axis बैंक की नकल करने वाले फर्जी पेज बनाए गए। इन पेजों पर उपयोगकर्ताओं से क्रेडिट कार्ड विवरण और OTP दर्ज कराए जाते थे, जो बाद में ठगों के फायरबेस डेटाबेस में भेजे जाते थे।
पीएम-किसान के नाम पर हुई ठगी का तरीका क्या था?
ठगों ने कथित तौर पर पीएम-किसान भुगतान सहायता का दावा करने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाईं और पीड़ितों को एक नकली एंड्रॉयड एप्लिकेशन डाउनलोड कराई। यह एप्लिकेशन कथित तौर पर फोन से जानकारी इकट्ठा कर ठगों के फायरबेस डेटाबेस में भेजती थी।
क्या फायरबेस या गूगल इस धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार हैं?
नहीं। फायरबेस एक वैध तकनीकी प्लेटफॉर्म है और गूगल इन आपराधिक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार नहीं है। समस्या प्लेटफॉर्म के अस्तित्व में नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा इसके वैध इंफ्रास्ट्रक्चर के दुरुपयोग में है।
राष्ट्र प्रेस
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