31 अक्टूबर 2026
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पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य, डीजल पर ₹3 और ATF पर ₹0.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी

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पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य, डीजल पर ₹3 और ATF पर ₹0.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी

सारांश

वैश्विक तेल संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया — पेट्रोल निर्यात शुल्क पूरी तरह हटाया, लेकिन डीजल और ATF पर शिकंजा कसा। ब्रेंट क्रूड $113 के पार और हॉर्मुज़ स्ट्रेट पर खतरे के बीच यह संकेत है कि सरकार घरेलू डीजल व विमान ईंधन आपूर्ति को लेकर सतर्क है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को ईंधन निर्यात शुल्क संशोधित किए।
पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹2.5 प्रति लीटर से घटाकर शून्य किया गया।
डीजल पर शुल्क ₹8.5 से बढ़कर ₹11.50 प्रति लीटर हुआ; ATF पर ₹10.50 से ₹11 प्रति लीटर ।
ब्रेंट क्रूड फिलहाल $113.10 प्रति बैरल ; पिछले तीन महीनों में करीब 26% की बढ़त।
भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 45% हॉर्मुज़ स्ट्रेट से होकर आता था, जो अब बाधित है।
इन दरों की अगली समीक्षा 15 दिनों में होगी।

केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को जारी एक अधिसूचना में पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 2.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया, जबकि डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क क्रमशः ₹3 और ₹0.50 प्रति लीटर बढ़ा दिया। वित्त मंत्रालय ने यह संशोधित दरें शनिवार को अधिसूचित कीं, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

नई संशोधित दरें

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, अब पेट्रोल निर्यात पर शुल्क शून्य है, जो पहले ₹2.5 प्रति लीटर था। डीजल के निर्यात पर शुल्क ₹8.5 प्रति लीटर से बढ़कर ₹11.50 प्रति लीटर हो गया है। ATF के निर्यात पर देय राशि ₹10.50 प्रति लीटर से बढ़कर ₹11 प्रति लीटर हो गई है।

गौरतलब है कि ये शुल्क हर 15 दिन में संशोधित किए जाते हैं — इसलिए यह नियमित समीक्षा चक्र का हिस्सा है, न कि कोई असाधारण हस्तक्षेप।

वैश्विक ऊर्जा संकट और ब्रेंट क्रूड में उछाल

यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज़ स्ट्रेट में बाधाओं के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड इस समय $113.10 प्रति बैरल पर पहुँच चुका है। बीते एक सप्ताह में इसमें 1.55%, पिछले एक महीने में 15.71% और पिछले तीन महीनों में करीब 26% की बढ़त दर्ज की गई है।

संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत के कच्चे तेल के कुल आयात का करीब 45% हिस्सा हॉर्मुज़ स्ट्रेट से होकर आता था — यह वह प्रमुख समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ता है। मार्ग में व्यवधान के चलते भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है।

निर्यात शुल्क का उद्देश्य

ये शुल्क मूल रूप से मार्च के अंत में लागू किए गए थे, जब मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई और अंतरराष्ट्रीय कीमतें चढ़ीं। इनका मकसद घरेलू रिफाइनरियों को विदेशी बाज़ारों को घरेलू बाज़ार पर प्राथमिकता देने से रोकना है — क्योंकि जब निर्यात अधिक लाभकारी होता है, तो रिफाइनरें घरेलू आपूर्ति कम कर सकती हैं, जिससे देश में ईंधन की किल्लत हो सकती है।

पेट्रोल पर शुल्क हटाने का अर्थ है कि सरकार का मानना है कि फिलहाल घरेलू पेट्रोल आपूर्ति पर्याप्त है, जबकि डीजल और ATF पर बढ़ी दरें संकेत देती हैं कि इन ईंधनों की घरेलू उपलब्धता को लेकर सावधानी बरती जा रही है।

आम जनता और उद्योग पर असर

पेट्रोल निर्यात शुल्क हटने से सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों — जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) — को निर्यात राजस्व में राहत मिल सकती है। वहीं, ATF पर बढ़ा शुल्क विमानन क्षेत्र के लिए लागत दबाव बढ़ा सकता है, हालांकि यह संशोधन मुख्यतः निर्यात पर लागू होता है, न कि घरेलू ईंधन की बिक्री पर।

यह ऐसे समय में आया है जब एयरलाइंस पहले से ही बढ़ती ईंधन लागत से जूझ रही हैं और हवाई किराए पर दबाव बना हुआ है।

आगे क्या

सरकार अगले 15 दिनों में इन दरों की फिर से समीक्षा करेगी। वैश्विक कच्चे तेल बाज़ार में जारी अनिश्चितता, विशेषकर हॉर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति को देखते हुए, आगामी संशोधनों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह 15-दिवसीय समीक्षा चक्र पर्याप्त है या नहीं? मध्यम अवधि में भारत को आपूर्ति विविधीकरण की ज़रूरत है — केवल निर्यात शुल्क की हेराफेरी से नहीं। विमानन क्षेत्र पर ATF का बोझ बढ़ना ऐसे वक्त में चिंताजनक है जब हवाई यात्रा की माँग चरम पर है और किराये पहले से दबाव में हैं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल पर निर्यात शुल्क क्यों हटाया गया?
केंद्र सरकार ने माना है कि घरेलू बाज़ार में पेट्रोल की आपूर्ति फिलहाल पर्याप्त है, इसलिए रिफाइनरियों पर निर्यात रोकने का दबाव हटाया गया। पहले यह शुल्क ₹2.5 प्रति लीटर था, जिसे 31 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना से शून्य कर दिया गया।
डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क कितना बढ़ा?
डीजल पर निर्यात शुल्क ₹8.5 से बढ़कर ₹11.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹10.50 से बढ़कर ₹11 प्रति लीटर हो गया है। यह वृद्धि 31 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है।
ये ईंधन निर्यात शुल्क पहली बार कब लगाए गए थे?
ये शुल्क मार्च के अंत में लागू किए गए थे, जब मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं। इनका मकसद रिफाइनरियों को घरेलू बाज़ार की अनदेखी करके निर्यात को प्राथमिकता देने से रोकना था।
हॉर्मुज़ स्ट्रेट का भारत के तेल आयात पर क्या असर है?
संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45% हिस्सा हॉर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते आता था। इस मार्ग में व्यवधान के कारण भारत को वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की तलाश करनी पड़ रही है।
अगली बार इन शुल्कों की समीक्षा कब होगी?
सरकार हर 15 दिनों में इन निर्यात शुल्कों की समीक्षा करती है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक स्थिति के आधार पर अगली समीक्षा मध्य नवंबर 2026 में अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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