ग्रीनलाइन और डाबर इंडिया की साझेदारी: एलएनजी ट्रकों से सप्लाई चेन होगी हरित, 27,000 टन CO₂ कटौती का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने 22 जुलाई 2026 को एफएमसीजी दिग्गज डाबर इंडिया लिमिटेड के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जिसके तहत एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाले हैवी कमर्शियल ट्रकों को डाबर के सड़क परिवहन नेटवर्क में तैनात किया जाएगा। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी के माल परिवहन में कार्बन उत्सर्जन घटाना और डाबर की सप्लाई चेन को टिकाऊ बनाना है।
साझेदारी में क्या है खास
एस्सार ग्रुप की अनुषंगी कंपनी ग्रीनलाइन, देश की एकमात्र ऐसी ग्रीन लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर है जो एलएनजी और इलेक्ट्रिक दोनों ईंधनों से चलने वाले हैवी कमर्शियल ट्रक संचालित करती है। इस करार के अंतर्गत ग्रीनलाइन के एलएनजी-चालित वाहन डाबर के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में शामिल होंगे, जिससे पारंपरिक डीज़ल ट्रकों की तुलना में उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि यह साझेदारी केवल पर्यावरणीय लक्ष्यों तक सीमित नहीं है — ग्रीनलाइन का दावा है कि एलएनजी परिवहन में परिचालन दक्षता और आपूर्ति विश्वसनीयता भी बनी रहती है, जो किसी भी बड़े एफएमसीजी ब्रांड की सप्लाई चेन के लिए अनिवार्य शर्त है।
कंपनियों के प्रमुखों ने क्या कहा
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स) चार्ल्स डेवलिन डी'कोस्टा ने कहा, 'डाबर इंडिया जैसी प्रतिष्ठित उपभोक्ता उत्पाद कंपनी के साथ साझेदारी करना हमारे लिए गर्व की बात है। यह उत्साहजनक है कि देश की अग्रणी कंपनियाँ कम उत्सर्जन वाले लॉजिस्टिक्स को अपनी कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की हर साझेदारी भारत के सड़क लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक है।
डाबर इंडिया के ग्लोबल डायरेक्टर (सप्लाई चेन) सम्राट सहगल ने कहा, 'हमारी सस्टेनेबिलिटी रणनीति में सप्लाई चेन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना एक प्रमुख लक्ष्य है। ग्रीनलाइन के साथ यह साझेदारी लॉजिस्टिक्स संचालन में कम उत्सर्जन वाले परिवहन को शामिल करने का अवसर देती है, जिससे दक्षता और विश्वसनीयता भी बनी रहती है।'
ग्रीनलाइन का मौजूदा परिचालन
वर्तमान में ग्रीनलाइन के बेड़े में 1,000 से अधिक वाहन हैं, जो देश के प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर पर स्टील, सीमेंट, खनन, एफएमसीजी और केमिकल क्षेत्रों को सेवाएँ दे रहे हैं। कंपनी के वाहन अब तक 10 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं और इससे ग्राहकों को 27,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन कम करने में मदद मिली है।
व्यापक संदर्भ: भारतीय लॉजिस्टिक्स में हरित बदलाव
यह सहयोग ऐसे समय में आया है जब भारत की बड़ी कंपनियाँ अपनी डिकार्बोनाइजेशन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सप्लाई चेन को हरित बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम उठा रही हैं। सड़क परिवहन क्षेत्र भारत के कुल कार्बन उत्सर्जन में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है, और एलएनजी को डीज़ल के व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है — खासकर उन रूटों पर जहाँ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पर्याप्त नहीं है।
आलोचकों का कहना है कि एलएनजी एक 'ट्रांज़िशनल फ्यूल' है और दीर्घकालिक समाधान पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन वाहनों में निहित है। इसके बावजूद, उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में एलएनजी-आधारित लॉजिस्टिक्स भारत के फ्रेट क्षेत्र की डिकार्बोनाइजेशन यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित होगा।
आगे की राह
डाबर-ग्रीनलाइन साझेदारी से मिले परिणाम भविष्य में अन्य एफएमसीजी कंपनियों के लिए एक मानदंड तय कर सकते हैं। ग्रीनलाइन का बढ़ता बेड़ा और डाबर का विस्तृत वितरण नेटवर्क मिलकर भारत में हरित माल परिवहन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं।