30 जून 2026
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रवि अग्रवाल फिर बने सीबीडीटी चेयरमैन, 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक छह महीने का कार्यकाल

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रवि अग्रवाल फिर बने सीबीडीटी चेयरमैन, 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक छह महीने का कार्यकाल

सारांश

केंद्र सरकार ने सीबीडीटी में निरंतरता बनाए रखते हुए रवि अग्रवाल को छह महीने के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त किया — ठीक उस वक्त जब प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना 14.64% की दर से बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ पर पहुँच गया है।

मुख्य बातें

रवि अग्रवाल को 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक सीबीडीटी चेयरमैन के रूप में कॉन्ट्रैक्ट आधार पर पुनर्नियुक्त किया गया।
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने 30 जून 2026 को इस नियुक्ति को मंजूरी दी।
अग्रवाल 1988 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं; उन्हें पहले जून 2024 में नितिन गुप्ता की जगह नियुक्त किया गया था।
चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64% बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हुआ।
सीबीडीटी में भारत सरकार के विशेष सचिव रैंक के छह सदस्य तक हो सकते हैं।

केंद्र सरकार ने 30 जून 2026 को रवि अग्रवाल को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन पद पर कॉन्ट्रैक्ट आधार पर अगले छह महीनों के लिए पुनर्नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। यह नया कार्यकाल 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक, या अगले आदेश तक — जो भी पहले हो — प्रभावी रहेगा।

नियुक्ति का आधिकारिक आदेश

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने इस पुनर्नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दी है। सरकारी आदेश के अनुसार, 'कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने रवि अग्रवाल को सीबीडीटी के चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर छह महीने के लिए (1 जुलाई से 31 दिसंबर तक) या अगले आदेश तक — इनमें से जो भी पहले हो — की गई है।'

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुनर्नियुक्ति दोबारा नियुक्त होने वाले केंद्र सरकार के अधिकारियों पर लागू होने वाली सामान्य शर्तों के तहत और भर्ती नियमों में छूट देते हुए की गई है।

रवि अग्रवाल का परिचय और पृष्ठभूमि

अग्रवाल इनकम टैक्स कैडर के 1988 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी हैं। उन्हें पहली बार जून 2024 में नितिन गुप्ता की जगह सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। यह पुनर्नियुक्ति उनकी कार्यशैली और नेतृत्व में सरकार के भरोसे को दर्शाती है।

सीबीडीटी की भूमिका और महत्त्व

वित्त मंत्रालय के आय विभाग के अंतर्गत कार्यरत सीबीडीटी देश की सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर नीति-निर्माण संस्था है। इसके प्रमुख चेयरमैन होते हैं और इसमें भारत सरकार के विशेष सचिव के रैंक वाले छह सदस्य तक हो सकते हैं। यह संस्था प्रत्यक्ष कर कानूनों को लागू करने, कर नीति तैयार करने, अनुपालन सुनिश्चित करने और करदाता सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी निभाती है।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि

यह पुनर्नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह मजबूत रफ्तार से बढ़ रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून की अवधि के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 14.64 प्रतिशत बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हो गया है। गौरतलब है कि यह वृद्धि उस दौर में आई है जब सरकार कर आधार विस्तार और डिजिटल अनुपालन पर विशेष जोर दे रही है।

आगे की राह

अग्रवाल की निरंतरता से सीबीडीटी के चल रहे नीतिगत कार्यक्रमों — जिनमें करदाता सेवाओं का डिजिटलीकरण और प्रत्यक्ष कर संहिता से जुड़ी प्रक्रियाएँ शामिल हैं — में बाधा नहीं आएगी। 31 दिसंबर 2026 के बाद की नियुक्ति या विस्तार पर सरकार की ओर से अलग से निर्णय लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

छह-छह महीने के अल्पकालिक कॉन्ट्रैक्ट का चलन दीर्घकालिक नीति-निर्माण के लिए अनुकूल नहीं माना जाता — आलोचकों का कहना है कि इससे संस्थागत स्वायत्तता पर सवाल उठते हैं। प्रत्यक्ष कर संग्रह में 14.64% की वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या सीबीडीटी करदाता अनुपालन को सरल बनाने और विवादों को कम करने में ठोस प्रगति दिखा पाता है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि अग्रवाल को सीबीडीटी चेयरमैन के रूप में दोबारा क्यों नियुक्त किया गया?
कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने सीबीडीटी के कामकाज में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए रवि अग्रवाल को 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक कॉन्ट्रैक्ट आधार पर पुनर्नियुक्त किया। यह नियुक्ति भर्ती नियमों में छूट देते हुए केंद्र सरकार के पुनर्नियुक्त अधिकारियों पर लागू सामान्य शर्तों के तहत की गई है।
सीबीडीटी क्या है और इसका क्या काम है?
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) वित्त मंत्रालय के आय विभाग के अंतर्गत देश की सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर नीति-निर्माण संस्था है। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों को लागू करने, कर नीति बनाने, अनुपालन सुनिश्चित करने और करदाता सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी निभाती है; इसमें विशेष सचिव रैंक के छह सदस्य तक हो सकते हैं।
रवि अग्रवाल का नया कार्यकाल कब तक है?
उनका नया कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक, या अगले सरकारी आदेश तक — जो भी पहले हो — प्रभावी रहेगा।
भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह की ताज़ा स्थिति क्या है?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 14.64 प्रतिशत बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ हो गया है।
रवि अग्रवाल से पहले सीबीडीटी के चेयरमैन कौन थे?
रवि अग्रवाल से पहले नितिन गुप्ता सीबीडीटी के चेयरमैन थे। अग्रवाल को जून 2024 में गुप्ता की जगह पहली बार इस पद पर नियुक्त किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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