एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली से सालाना 250 करोड़ लीटर ईंधन बचत और 81,000 टन कार्बन कटौती: नितिन गडकरी

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एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली से सालाना 250 करोड़ लीटर ईंधन बचत और 81,000 टन कार्बन कटौती: नितिन गडकरी

सारांश

भारत के पहले बैरियर-रहित टोल प्लाजा के उद्घाटन के साथ एमएलएफएफ प्रणाली ने राजमार्ग टोलिंग की परिभाषा बदल दी — सालाना 250 करोड़ लीटर ईंधन बचत, 81,000 टन कार्बन कटौती और ₹5,000-6,000 करोड़ की परिचालन बचत का वादा लेकर। दिल्ली-एनसीआर से शुरू यह बदलाव पूरे देश के राजमार्गों पर लागू होने की राह पर है।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 11 मई 2026 को मुंडका-बक्करवाला (यूईआर-2) पर देश के पहले बैरियर-रहित टोल प्लाजा का उद्घाटन किया।
एमएलएफएफ प्रणाली से प्रतिवर्ष लगभग 250 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और 81,000 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी अपेक्षित।
टोल परिचालन लागत 15% से घटकर 3-4% होगी, जिससे सालाना ₹5,000-6,000 करोड़ की बचत संभव।
प्रणाली में फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह और एएनपीआर तकनीक का एकीकरण किया गया है।
दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ होने की उम्मीद।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 11 मई 2026 को नई दिल्ली में देश के पहले बैरियर-रहित टोल प्लाजा का उद्घाटन करते हुए कहा कि मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली भारत को विश्व स्तरीय राजमार्ग अवसंरचना की दिशा में एक निर्णायक कदम आगे ले जाएगी। इस प्रणाली से प्रतिवर्ष लगभग 250 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और 81,000 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है।

क्या है एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली

एमएलएफएफ प्रणाली एक संपर्क रहित और बैरियर-मुक्त टोल संग्रह तंत्र है, जो वाहनों को बिना रुके टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति देती है। इसमें फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के साथ स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) तकनीक को एकीकृत किया गया है। गडकरी के अनुसार, इस प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विकसित किया गया है और इसके लिए टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स तथा निजी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया गया।

मुंडका-बक्करवाला में पहला उद्घाटन

मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी विस्तार सड़क-2 (यूईआर-2) पर मुंडका-बक्करवाला में देश के पहले बैरियर-रहित टोल प्लाजा का उद्घाटन किया। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण और यातायात जाम की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। गौरतलब है कि टोल प्लाजा पर लंबी कतारें न केवल यात्रियों का समय बर्बाद करती हैं, बल्कि इंजन चालू रखने से अतिरिक्त ईंधन खपत और उत्सर्जन भी होता है।

परिचालन लागत में भारी कमी

गडकरी ने बताया कि टोल वसूली की परिचालन लागत, जो पहले लगभग 15 प्रतिशत थी, एमएलएफएफ प्रणाली के तहत घटकर मात्र 3-4 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने कहा कि इस लागत में कमी से सालाना लगभग ₹5,000-6,000 करोड़ की बचत हो सकती है। यह बचत राजमार्ग विकास में पुनर्निवेश के लिए उपलब्ध होगी।

प्रदूषण और लॉजिस्टिक पर असर

नई प्रणाली से दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ होने की उम्मीद है। बाधा रहित यातायात प्रवाह से टोल प्लाजा पर प्रतीक्षा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे लॉजिस्टिक कॉस्ट भी घटेगी। गडकरी ने कहा कि सरकार सतत विकास और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करते हुए राजमार्ग प्रौद्योगिकी को निरंतर उन्नत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे क्या होगा

एमएलएफएफ प्रणाली की सफलता के आधार पर इसे देशभर के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किए जाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित होती है, तो भारत की लॉजिस्टिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है और देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इसे देशभर में एक समान रूप से लागू किया जा सकेगा — खासतौर पर उन राज्यों में जहाँ डिजिटल बुनियादी ढाँचा अभी भी कमजोर है। फास्टैग की अनिवार्यता के बावजूद आज भी लाखों वाहन बिना टैग के सड़कों पर हैं, जो एएनपीआर-आधारित प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। ₹5,000-6,000 करोड़ की सालाना बचत का दावा तभी सार्थक होगा जब प्रणाली की तकनीकी विफलताओं और राजस्व रिसाव को रोकने के लिए एक मजबूत ऑडिट तंत्र स्थापित हो। मुंडका-बक्करवाला का यह पायलट प्रोजेक्ट सही दिशा में उठाया गया कदम है, पर इसका पैमाना और क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि यह वाकई परिवर्तनकारी है या महज एक और उद्घाटन।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली क्या है?
एमएलएफएफ (मल्टी-लेन फ्री फ्लो) एक बैरियर-मुक्त और संपर्क रहित टोल संग्रह प्रणाली है जिसमें वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं। इसमें फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) तकनीक का उपयोग किया जाता है।
एमएलएफएफ प्रणाली से ईंधन और पर्यावरण को क्या फायदा होगा?
गडकरी के अनुसार, इस प्रणाली से प्रतिवर्ष लगभग 250 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और 81,000 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ होगा।
टोल परिचालन लागत में कितनी कमी आएगी?
एमएलएफएफ प्रणाली के तहत टोल वसूली की परिचालन लागत पहले की लगभग 15 प्रतिशत से घटकर 3-4 प्रतिशत रह जाएगी। इससे सालाना लगभग ₹5,000-6,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
देश का पहला बैरियर-रहित टोल प्लाजा कहाँ खुला?
देश का पहला बैरियर-रहित टोल प्लाजा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी विस्तार सड़क-2 (यूईआर-2) पर मुंडका-बक्करवाला में खोला गया। इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 11 मई 2026 को किया।
क्या यह प्रणाली पूरे भारत में लागू होगी?
फिलहाल यह प्रणाली मुंडका-बक्करवाला में पायलट आधार पर शुरू की गई है। सफलता के आधार पर इसे देशभर के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किए जाने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस