आईबीसी ने दिवालिया कंपनियों के समाधान में बदलाव लाया, एसेट वैल्यू रिकवरी को मिली नई दिशा: पीएचडीसीसीआई उपाध्यक्ष
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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) ने भारत में दिवालिया प्रक्रिया के तहत कंपनियों के समाधान को तेजी से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रक्रिया के चलते एसेट वैल्यू रिकवरी में भी सुधार देखा गया है। यह जानकारी पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के उपाध्यक्ष संजय सिंघानिया ने रविवार को साझा की।
सिंघानिया ने पीएचडीसीसीआई के एक कार्यक्रम में बताया कि आईबीसी ने भारत में दिवालिया कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया में बुनियादी परिवर्तन किया है। पहले दिवालिया प्रक्रिया में कंपनियों के समाधान में बहुत अधिक समय लगता था, जिससे उनके एसेट की वैल्यू में भी भारी कमी आती थी।
उन्होंने कहा, "आईबीसी ने तेजी से समाधान, बेहतर ऋण अनुशासन और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने की दिशा में काम किया है।"
हालांकि, उन्होंने और अधिक तेज समाधान, लचीलापन और मूल्य संरक्षण पर जोर दिया, ताकि व्यवसायों के पुनरुद्धार को और सशक्त किया जा सके।
कार्यक्रम में हाल ही में पारित दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 पर चर्चा की गई, जिसमें नीति निर्माताओं, कानूनी विशेषज्ञों, दिवालियापन पेशेवरों और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाया गया।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन ने भारत में दिवालियापन कानूनों के विकास के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैसे आईबीसी के तहत खंडित तंत्रों से एकीकृत, लेनदार-संचालित प्रणाली में परिवर्तन किया गया है।
उन्होंने कहा, "2026 के संशोधन का उद्देश्य दिवालिया प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करना और लेनदारों का विश्वास बढ़ाना है।"
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने कहा कि उभरती आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए दिवालियापन कानून का निरंतर विकास आवश्यक है।
उन्होंने दोहराया कि आईबीसी का मूल उद्देश्य केवल वसूली नहीं, बल्कि समाधान और मूल्य अधिकतमकरण होना चाहिए।
इसके अलावा, नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (एनईएसएल) के प्रबंध निदेशक और सीईओ देबज्योति रे चौधरी ने पारदर्शिता बढ़ाने और चूक के प्रामाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराकर देरी को कम करने में सूचना उपयोगिताओं के महत्व को रेखांकित किया, जिससे विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लाभ मिलता है।