टैक्स अनुपालन में टेक्नोलॉजी अपनाने वाले अग्रणी देशों में भारत शामिल, GSTN बना मिसाल: विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
भारत टैक्स अनुपालन के लिए टेक्नोलॉजी को तेज़ी से अपनाने वाले देशों में शुमार हो गया है — और जीएसटी नेटवर्क (GSTN) इस बदलाव का सबसे ठोस प्रमाण है। पीडब्ल्यूसी (PwC) में इनडायरेक्ट टैक्स के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में एसोचैम (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित 23वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन के दौरान यह बात कही। उनके अनुसार, GSTN ने करदाताओं और कर प्रशासन दोनों के लिए व्यवस्था को सुगम बनाया है।
GSTN और इनकम टैक्स: टेक्नोलॉजी का दोहरा मोर्चा
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि GSTN एक ऐसा मंच बन चुका है जहाँ करदाता और प्रशासन मिलकर काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यही स्थिति इनकम टैक्स प्रणाली के साथ भी है, जहाँ डिजिटल प्रक्रियाओं ने अनुपालन बोझ को काफी हद तक कम किया है। उनके अनुसार, आज के दौर में टेक्नोलॉजी कर प्रणाली का अभिन्न अंग बन चुकी है और सरकारी नीतियों में इस पर केंद्रित ध्यान दिया जाना ज़रूरी है।
अंतरराष्ट्रीय कराधान में संरचनात्मक बदलाव
एसोचैम में इंटरनेशनल टैक्स पर टास्क फोर्स के चेयरमैन राकेश नांगिया ने सम्मेलन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान अब केवल तेज़ी से बदलने वाले दौर में नहीं, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि टाइगर ग्लोबल फैसला, नया आयकर कानून, वैश्विक न्यूनतम कर व्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय की कर व्यवस्था को आकार देंगे।
करदाताओं और सरकारों की अपेक्षाएँ
नांगिया ने यह भी कहा कि हर पक्ष कर प्रणाली को सरल, विवाद-मुक्त और त्वरित रिफंड वाला देखना चाहता है। साथ ही सभी यह चाहते हैं कि वैश्विक कारोबार पर अचानक या आक्रामक तरीके से कर न लगाया जाए — हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसा समय-समय पर होता रहता है और यह कर प्रणाली का एक स्वाभाविक हिस्सा है।
एसोचैम की डायरेक्ट टैक्स पर नेशनल काउंसिल के चेयरमैन संदीप चौफला ने कहा कि सरकारें अपने कर आधार को सुरक्षित रखना चाहती हैं, जबकि करदाता स्पष्टता और नीतिगत निश्चितता की अपेक्षा रखते हैं — यह तनाव वैश्विक कर नीति की केंद्रीय चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की टेक्नोलॉजी-संचालित कर प्रणाली वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में उभर रही है। वैश्विक न्यूनतम कर और AI-आधारित अनुपालन उपकरणों के साथ, भारत का अगला कदम यह होगा कि वह इन नीतियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ कैसे संरेखित करता है।