4 अगस्त 2026
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नैसकॉम ने कराधान संशोधन विधेयक 2026 का स्वागत किया, डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगी बड़ी राहत

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नैसकॉम ने कराधान संशोधन विधेयक 2026 का स्वागत किया, डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगी बड़ी राहत

सारांश

नैसकॉम ने कराधान संशोधन विधेयक 2026 को डेटा सेंटर उद्योग के लिए एक निर्णायक नीतिगत बदलाव बताया है — अनुमोदन-आधारित जटिल प्रक्रिया से शर्त-आधारित पारदर्शी व्यवस्था की ओर यह कदम विदेशी क्लाउड कंपनियों, GCC और भारतीय डेटा सेंटर ऑपरेटरों, सभी के लिए राहत लेकर आएगा।

मुख्य बातें

नैसकॉम ने 4 अगस्त 2026 को कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत किया।
विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटरों के लिए अलग-अलग सरकारी अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त होगी।
स्वामित्व और लीज दोनों आधार पर संचालित डेटा सेंटर सुविधाओं को विधिवत मान्यता मिलेगी।
विदेशी क्लाउड प्रदाताओं , GCC और सीमा-पार सेवाएँ देने वाली कंपनियों को कर स्पष्टता का सीधा लाभ होगा।
विधेयक में सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर नई कर छूट का भी प्रस्ताव है।
विधेयक फिलहाल संसद के विचाराधीन है।

उद्योग संगठन नैसकॉम (NASSCOM) ने 4 अगस्त 2026 को कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए इसे भारत के डेटा सेंटर पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया। यह विधेयक भारत में स्थित निर्दिष्ट डेटा सेंटरों से सेवाएँ लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए वित्त अधिनियम, 2026 के तहत लागू कर छूट व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव रखता है।

विधेयक में क्या है खास

प्रस्तावित संशोधनों के तहत विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटरों को अलग-अलग मामलों में विशेष सरकारी अधिसूचना लेने की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्वामित्व या लीज (पट्टे) के आधार पर संचालित डेटा सेंटर सुविधाओं को भी विधिवत मान्यता दी गई है। विधेयक अभी संसद के विचाराधीन है।

यह विधेयक आयकर अधिनियम, 2025, वित्त अधिनियम, 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का भी प्रस्ताव करता है। साथ ही पात्र विदेशी निवेश फंड और फंड प्रबंधकों के लिए कर नियमों को सरल बनाने की योजना है, ताकि अनुपालन संबंधी बोझ कम हो और ज़रूरी सुरक्षा प्रावधान बरकरार रहें।

किन कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा

नैसकॉम के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से भारत में काम करने वाले विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) संचालित करने वाली कंपनियों और अन्य विदेशी संस्थाओं को विशेष लाभ होगा। कई कंपनियाँ समूह की विभिन्न इकाइयों, विदेशी रीसेलर, भारतीय वितरकों और सीमा-पार ग्राहक सेवाओं जैसे जटिल कारोबारी मॉडल पर काम करती हैं। ऐसे में अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त होने से कर संबंधी स्पष्टता बढ़ेगी और अनुमोदन-आधारित अनिश्चितता घटेगी।

नैसकॉम की दीर्घकालिक माँग पूरी

नैसकॉम ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि वह लंबे समय से इस बात की वकालत करता आ रहा था कि कर छूट का ढाँचा जटिल अनुमोदन प्रक्रिया में न बदले, बल्कि कर संबंधी निश्चितता प्रदान करने वाला सरल और पारदर्शी तंत्र बना रहे। संगठन का मानना है कि अनुमोदन-आधारित प्रणाली से शर्त-आधारित व्यवस्था की ओर यह बदलाव उसी दिशा में एक ठोस कदम है।

गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डेटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने की होड़ में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है।

भारतीय डेटा सेंटर कंपनियों को भी राहत

नए प्रावधानों से भारतीय डेटा सेंटर कंपनियों को भी प्रशासनिक राहत मिलेगी। अलग-अलग अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त होने से अनावश्यक प्रशासनिक बोझ कम होगा और भारत में संचालित डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग वैश्विक ग्राहकों के लिए और सुगम हो जाएगा।

विदेशी निवेशकों के लिए नई कर छूट

विधेयक में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर नई कर छूट देने का भी प्रस्ताव है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक निवेश आकर्षित करने और डेटा सेंटर तथा डिजिटल बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मज़बूत करने में सहायता मिल सकती है। विधेयक के संसद से पारित होने के बाद उद्योग को और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मापनीय और विवाद-मुक्त हों। भारत में GCC की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और डेटा सेंटर निवेश के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा तीखी है; ऐसे में यह सरलीकरण समय पर है। लेकिन विधेयक के संसद से पारित होने और अधिसूचना जारी होने तक उद्योग को ठोस लाभ मिलना बाकी है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह एक संसदीय विधेयक है जो आयकर अधिनियम 2025, वित्त अधिनियम 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में स्थित डेटा सेंटरों से सेवाएँ लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए कर छूट व्यवस्था को सरल बनाना है।
इस विधेयक से डेटा सेंटर उद्योग को क्या फायदा होगा?
विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटरों को अब अलग-अलग सरकारी अधिसूचना नहीं लेनी होगी, जिससे अनुमोदन-आधारित अनिश्चितता समाप्त होगी। स्वामित्व और लीज दोनों आधार पर संचालित डेटा सेंटरों को मान्यता मिलने से भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक उपयोग आसान होगा।
किन विदेशी कंपनियों को इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ मिलेगा?
विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) संचालित करने वाली कंपनियों और जटिल सीमा-पार कारोबारी मॉडल पर काम करने वाली विदेशी संस्थाओं को सबसे अधिक लाभ होगा। नैसकॉम के अनुसार, कर संबंधी स्पष्टता बढ़ने से ये कंपनियाँ भारत में अधिक आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकेंगी।
नैसकॉम ने इस विधेयक का समर्थन क्यों किया?
नैसकॉम लंबे समय से माँग कर रहा था कि कर छूट का ढाँचा जटिल अनुमोदन प्रक्रिया में न बदले। संगठन का मानना है कि अनुमोदन-आधारित प्रणाली से शर्त-आधारित व्यवस्था की ओर यह बदलाव उद्योग के विकास और निवेश आकर्षण के लिए अनुकूल है।
विधेयक कब लागू होगा?
विधेयक अभी संसद के विचाराधीन है और इसे पारित होना बाकी है। पारित होने के बाद संबंधित अधिसूचना जारी होने पर उद्योग को ठोस लाभ मिलना शुरू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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