नैसकॉम ने कराधान संशोधन विधेयक 2026 का स्वागत किया, डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगी बड़ी राहत
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन नैसकॉम (NASSCOM) ने 4 अगस्त 2026 को कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए इसे भारत के डेटा सेंटर पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया। यह विधेयक भारत में स्थित निर्दिष्ट डेटा सेंटरों से सेवाएँ लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए वित्त अधिनियम, 2026 के तहत लागू कर छूट व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव रखता है।
विधेयक में क्या है खास
प्रस्तावित संशोधनों के तहत विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटरों को अलग-अलग मामलों में विशेष सरकारी अधिसूचना लेने की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्वामित्व या लीज (पट्टे) के आधार पर संचालित डेटा सेंटर सुविधाओं को भी विधिवत मान्यता दी गई है। विधेयक अभी संसद के विचाराधीन है।
यह विधेयक आयकर अधिनियम, 2025, वित्त अधिनियम, 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का भी प्रस्ताव करता है। साथ ही पात्र विदेशी निवेश फंड और फंड प्रबंधकों के लिए कर नियमों को सरल बनाने की योजना है, ताकि अनुपालन संबंधी बोझ कम हो और ज़रूरी सुरक्षा प्रावधान बरकरार रहें।
किन कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा
नैसकॉम के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से भारत में काम करने वाले विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) संचालित करने वाली कंपनियों और अन्य विदेशी संस्थाओं को विशेष लाभ होगा। कई कंपनियाँ समूह की विभिन्न इकाइयों, विदेशी रीसेलर, भारतीय वितरकों और सीमा-पार ग्राहक सेवाओं जैसे जटिल कारोबारी मॉडल पर काम करती हैं। ऐसे में अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त होने से कर संबंधी स्पष्टता बढ़ेगी और अनुमोदन-आधारित अनिश्चितता घटेगी।
नैसकॉम की दीर्घकालिक माँग पूरी
नैसकॉम ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि वह लंबे समय से इस बात की वकालत करता आ रहा था कि कर छूट का ढाँचा जटिल अनुमोदन प्रक्रिया में न बदले, बल्कि कर संबंधी निश्चितता प्रदान करने वाला सरल और पारदर्शी तंत्र बना रहे। संगठन का मानना है कि अनुमोदन-आधारित प्रणाली से शर्त-आधारित व्यवस्था की ओर यह बदलाव उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डेटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने की होड़ में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है।
भारतीय डेटा सेंटर कंपनियों को भी राहत
नए प्रावधानों से भारतीय डेटा सेंटर कंपनियों को भी प्रशासनिक राहत मिलेगी। अलग-अलग अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त होने से अनावश्यक प्रशासनिक बोझ कम होगा और भारत में संचालित डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग वैश्विक ग्राहकों के लिए और सुगम हो जाएगा।
विदेशी निवेशकों के लिए नई कर छूट
विधेयक में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर नई कर छूट देने का भी प्रस्ताव है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक निवेश आकर्षित करने और डेटा सेंटर तथा डिजिटल बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मज़बूत करने में सहायता मिल सकती है। विधेयक के संसद से पारित होने के बाद उद्योग को और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।