30 अक्टूबर 2026
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राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर 2026 में ₹7.15 लाख करोड़, वित्त वर्ष 27 के लक्ष्य का 42.1% हासिल

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राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर 2026 में ₹7.15 लाख करोड़, वित्त वर्ष 27 के लक्ष्य का 42.1% हासिल

सारांश

भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में ₹7.15 लाख करोड़ — पूरे साल के लक्ष्य का 42.1%। पिछले साल की तुलना में घाटा बढ़ा, पर कैपेक्स में 12% की वृद्धि सरकार की विकास-केंद्रित रणनीति का संकेत है।

मुख्य बातें

अप्रैल-सितंबर 2026 में राजकोषीय घाटा ₹7.15 लाख करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 27 के ₹16.96 लाख करोड़ (GDP का 4.3%) लक्ष्य का 42.1% है।
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में घाटा ₹5.7 लाख करोड़ था।
शुद्ध कर प्राप्तियाँ सालाना 4.06% बढ़कर ₹12.8 लाख करोड़ ; गैर-कर आय ₹4.8 लाख करोड़ ।
कुल सरकारी खर्च ₹25.5 लाख करोड़ (सालाना +10.8% ); पूंजीगत खर्च ₹6.5 लाख करोड़ ( +12% )।
दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ उधारी; ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड शामिल।
पूरे वित्त वर्ष में दिनांकित प्रतिभूतियों से कुल उधारी ₹15.9 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान।

भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2026) में ₹7.15 लाख करोड़ पर पहुँच गया है, जो सरकार के पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित ₹16.96 लाख करोड़ (जीडीपी का 4.3 प्रतिशत) के लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। 30 अक्टूबर 2026 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आँकड़ों में यह जानकारी सामने आई। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में राजकोषीय घाटा ₹5.7 लाख करोड़ था।

राजस्व का ताज़ा हाल

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में देश की शुद्ध कर प्राप्तियाँ ₹12.8 लाख करोड़ रहीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की ₹12.3 लाख करोड़ की तुलना में सालाना आधार पर 4.06 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही गैर-कर आय ₹4.8 लाख करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की ₹4.7 लाख करोड़ से 2.12 प्रतिशत अधिक है। राजस्व वृद्धि की रफ़्तार खर्च की गति की तुलना में सीमित रही है, जो घाटे के विस्तार की एक प्रमुख वजह मानी जा रही है।

खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि

अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि में सरकार का कुल खर्च ₹25.5 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹23 लाख करोड़ के मुकाबले सालाना आधार पर 10.8 प्रतिशत अधिक है। विशेष रूप से पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई — यह वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही के ₹5.8 लाख करोड़ से करीब 12 प्रतिशत बढ़कर ₹6.5 लाख करोड़ हो गया। बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक निवेश पर यह जोर सरकार की विकास-उन्मुख राजकोषीय रणनीति को दर्शाता है।

दूसरी छमाही की उधारी योजना

इससे पहले सरकार ने घोषणा की थी कि वह वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में ₹7.86 लाख करोड़ उधार लेगी। इस उधारी कार्यक्रम में ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल होंगे, और यह राशि 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से जुटाई जाएगी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, दूसरी छमाही की उधारी जुड़ने के बाद पूरे वित्त वर्ष में दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिए कुल उधारी लगभग ₹15.9 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।

बजट अनुमान से तुलना

केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिए ₹17.2 लाख करोड़ उधार लेने का प्रस्ताव रखा था। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार एक तरफ राजकोषीय समेकन की राह बनाए रखने और दूसरी तरफ आर्थिक विकास को गति देने वाले सार्वजनिक निवेश के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। पहली छमाही में लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत घाटा हासिल होना ऐतिहासिक प्रवृत्तियों के अनुरूप माना जा रहा है, और विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे वर्ष का लक्ष्य हासिल करना अभी भी संभव है यदि दूसरी छमाही में राजस्व संग्रह में तेज़ी आती है।

आगे की राह

राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखना सरकार की मध्यावधि राजकोषीय समेकन योजना का हिस्सा है। दूसरी छमाही में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की वसूली, विनिवेश आय तथा पूंजीगत खर्च की गुणवत्ता — ये तीनों मिलकर तय करेंगे कि क्या सरकार वित्त वर्ष के अंत तक निर्धारित सीमा के भीतर रह पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल चिंता यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में घाटा ₹1.45 लाख करोड़ अधिक है — और राजस्व वृद्धि (4-5%) खर्च वृद्धि (10.8%) से काफी पीछे है। कैपेक्स में 12% की बढ़ोतरी निश्चित रूप से सकारात्मक है, लेकिन दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ की भारी उधारी बॉन्ड बाज़ार पर दबाव बना सकती है और ब्याज दरों को प्रभावित कर सकती है। सरकार का 4.3% GDP घाटा लक्ष्य तभी टिकेगा जब दूसरी छमाही में कर संग्रह और विनिवेश आय में उल्लेखनीय तेज़ी आए — जो किसी भी आर्थिक मंदी की स्थिति में कठिन हो सकता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में भारत का राजकोषीय घाटा कितना रहा?
अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि में भारत का राजकोषीय घाटा ₹7.15 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के ₹16.96 लाख करोड़ के लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के ₹5.7 लाख करोड़ से अधिक है।
राजकोषीय घाटा GDP का कितना प्रतिशत है?
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP के 4.3 प्रतिशत पर निर्धारित किया है, जो ₹16.96 लाख करोड़ के बराबर है। यह राजकोषीय समेकन की दिशा में एक क्रमिक कदम है।
सरकार दूसरी छमाही में कितनी उधारी लेगी?
सरकार ने वित्त वर्ष 27 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2026 - मार्च 2027) में ₹7.86 लाख करोड़ उधार लेने की योजना बनाई है। इसमें ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं और यह राशि 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से जुटाई जाएगी।
पहली छमाही में सरकार का पूंजीगत खर्च कितना रहा?
वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में सरकार का पूंजीगत खर्च ₹6.5 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹5.8 लाख करोड़ की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक है। यह बुनियादी ढाँचे में निवेश जारी रखने की सरकारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय बजट में उधारी का क्या लक्ष्य रखा गया था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹17.2 लाख करोड़ की कुल उधारी का प्रस्ताव रखा था। अब वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि दिनांकित प्रतिभूतियों के ज़रिए कुल उधारी लगभग ₹15.9 लाख करोड़ रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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