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भारत के जीसीसी 2030 तक एआई 'एजेंटिक ट्रांसफॉर्मेशन इंजन' बनेंगे: डेल-जिनोव रिपोर्ट

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भारत के जीसीसी 2030 तक एआई 'एजेंटिक ट्रांसफॉर्मेशन इंजन' बनेंगे: डेल-जिनोव रिपोर्ट

सारांश

बैक-ऑफिस से ग्लोबल लीडर तक — भारत के जीसीसी का यह सफर अब सिर्फ लागत-दक्षता की कहानी नहीं है। डेल-जिनोव रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक 60% कार्यबल को रिस्किलिंग की ज़रूरत होगी और 55% नियमित काम ऑटोमेट हो सकते हैं — असली दाँव इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर है।

मुख्य बातें

भारत में 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो 23.6 लाख लोगों को रोज़गार देते हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में $98.4 अरब का राजस्व अर्जित किया।
भारत के जीसीसी वैश्विक एआई प्रतिभा का 28 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं; 1,200+ केंद्र एआई व मशीन लर्निंग क्षमताएं विकसित कर चुके हैं।
70% जीसीसी नेताओं के पास स्पष्ट एआई रोडमैप है; 66% राजस्व और कारोबारी प्रभाव को एआई रणनीति की सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं।
एजेंटिक वर्कफ्लो में 10,000 से 5 लाख टोकन्स तक की कंप्यूटिंग जरूरत, जो सामान्य चैट एआई से कई गुना अधिक है।
2030 तक जीसीसी के 55% नियमित कार्य ऑटोमेशन के दायरे में और 60% कार्यबल को रिस्किलिंग की आवश्यकता होगी।

भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) वर्ष 2030 तक महज बैक-ऑफिस या सपोर्ट इकाइयों की पारंपरिक भूमिका से आगे निकलकर वैश्विक कंपनियों के लिए एआई-संचालित 'एजेंटिक ट्रांसफॉर्मेशन इंजन' बन सकते हैं। डेल टेक्नोलॉजीज और शोध संस्था जिनोव की एक नई संयुक्त रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि आने वाले वर्षों में केवल वही जीसीसी आगे बढ़ेंगे जो एआई प्रयोगों की सीमा से परे जाकर डेटा, तकनीक और गवर्नेंस की मज़बूत बुनियाद पर वास्तविक कारोबारी परिणाम सुनिश्चित करेंगे।

भारत के जीसीसी की वर्तमान स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस समय 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं, जो लगभग 23.6 लाख लोगों को रोज़गार देते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इन केंद्रों ने करीब 98.4 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया। इससे भी महत्त्वपूर्ण यह है कि भारत के जीसीसी वैश्विक एआई प्रतिभा का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखते हैं और 1,200 से अधिक जीसीसी केंद्र पहले से ही एआई तथा मशीन लर्निंग क्षमताएं विकसित कर चुके हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कंपनियाँ अपने तकनीकी संचालन को लागत-केंद्रित ढाँचे से हटाकर नवाचार-केंद्रित मॉडल की ओर ले जाने की कोशिश कर रही हैं। गौरतलब है कि 70 प्रतिशत जीसीसी नेताओं के पास पहले से एआई से संबंधित स्पष्ट रोडमैप या चार्टर मौजूद है।

नेतृत्व और रणनीतिक जिम्मेदारी का नया दौर

डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे जीसीसी अधिक रणनीतिक जिम्मेदारियाँ संभालेंगे, डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस जैसी मज़बूत बुनियादी क्षमताएं नवाचार का आधार बनेंगी। उन्होंने कहा कि जो जीसीसी अभी से इन क्षेत्रों में निवेश करेंगे, वे यह तय करेंगे कि वैश्विक कंपनियाँ एआई का उपयोग किस प्रकार करेंगी।

जिनोव के अध्यक्ष सिद्धांत रस्तोगी ने कहा कि पिछले दो दशकों में जीसीसी की चर्चा मुख्य रूप से पैमाने, प्रतिभा और क्षमताओं को लेकर होती थी, लेकिन अब अगला दशक 'स्वामित्व और नेतृत्व' का होगा। रस्तोगी ने यह भी कहा कि एआई और एजेंटिक सिस्टम्स के व्यावसायिक प्रक्रियाओं में शामिल होने के साथ जीसीसी से केवल सेवाएं देने की नहीं, बल्कि उत्पादों, प्लेटफॉर्म्स, बाज़ारों और कारोबारी परिणामों की ज़िम्मेदारी लेने की अपेक्षा की जाएगी।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 64 प्रतिशत जीसीसी नेता पहले से दोहरी वैश्विक जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं — वे न केवल भारत स्थित केंद्रों का संचालन कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर किसी महत्त्वपूर्ण कारोबारी कार्य का नेतृत्व भी कर रहे हैं।

एजेंटिक एआई की इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौती

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एआई-आधारित एजेंटिक वर्कफ्लो पारंपरिक चैट-आधारित एआई सिस्टम्स की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की माँग करते हैं। जहाँ एक सामान्य चैट इंटरैक्शन में लगभग 1,000 से 2,000 टोकन्स की आवश्यकता होती है, वहीं एजेंटिक वर्कफ्लो में 10,000 से 5 लाख टोकन्स तक की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए समय रहते सही इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना अनिवार्य होगा।

यह आँकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि जीसीसी को केवल सॉफ्टवेयर या प्रतिभा नहीं, बल्कि हार्डवेयर और नेटवर्क बुनियाद पर भी बड़ा दाँव लगाना होगा।

कार्यबल पर असर और रिस्किलिंग की अनिवार्यता

अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि जीसीसी में होने वाले 55 प्रतिशत नियमित कार्य एआई-आधारित ऑटोमेशन के दायरे में आ सकते हैं। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक लगभग 60 प्रतिशत कार्यबल को नए कौशल सीखने यानी रिस्किलिंग की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि अनिवार्यता केवल एआई प्रशिक्षण बढ़ाने की नहीं, बल्कि कार्य की मौलिक रूप से पुनर्कल्पना करने की है। साथ ही 66 प्रतिशत जीसीसी नेता अपनी एआई रणनीति में राजस्व और कारोबारी प्रभाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं, जो दर्शाता है कि एआई की बहस अब लागत कटौती से आगे बढ़कर व्यावसायिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त से जुड़ चुकी है।

यह स्पष्ट है कि भारत के जीसीसी अगले पाँच वर्षों में वैश्विक एआई संचालन के केंद्र बिंदु बन सकते हैं — बशर्ते वे इंफ्रास्ट्रक्चर, गवर्नेंस और प्रतिभा विकास में समय पर निवेश करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '2030 तक ट्रांसफॉर्मेशन इंजन' जैसी घोषणाएँ पहले भी आती रही हैं — और जीसीसी अक्सर रणनीतिक केंद्र बनने की बजाय कुशल डिलीवरी यूनिट ही बने रहे। असली सवाल यह है कि क्या मूल कंपनियाँ वास्तव में नीति-निर्माण और उत्पाद स्वामित्व भारत के जीसीसी को सौंपने को तैयार हैं, या यह महज इंफ्रास्ट्रक्चर-अपग्रेड की नई भाषा है। 60% कार्यबल की रिस्किलिंग का लक्ष्य भी तब तक कागजी रहेगा जब तक उद्योग और शिक्षा संस्थान मिलकर सत्यापन-योग्य कौशल ढाँचा नहीं बनाते।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के जीसीसी 2030 तक 'एजेंटिक ट्रांसफॉर्मेशन इंजन' कैसे बनेंगे?
डेल टेक्नोलॉजीज और जिनोव की रिपोर्ट के अनुसार, जो जीसीसी डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस में अभी से निवेश करेंगे, वे एआई-आधारित स्वायत्त वर्कफ्लो चलाने में सक्षम होंगे और वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पाद व कारोबारी परिणामों की ज़िम्मेदारी ले सकेंगे। यह परिवर्तन बैक-ऑफिस सेवाओं से रणनीतिक नेतृत्व की ओर एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
भारत में कितने जीसीसी हैं और वे कितने लोगों को रोज़गार देते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक जीसीसी कार्यरत हैं जो लगभग 23.6 लाख लोगों को रोज़गार देते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इन केंद्रों ने करीब $98.4 अरब का राजस्व उत्पन्न किया।
एजेंटिक एआई वर्कफ्लो के लिए इतना अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों चाहिए?
रिपोर्ट के अनुसार एजेंटिक वर्कफ्लो में 10,000 से 5 लाख टोकन्स तक की कंप्यूटिंग आवश्यकता हो सकती है, जबकि सामान्य चैट एआई में केवल 1,000 से 2,000 टोकन्स की ज़रूरत होती है। यह अंतर दर्शाता है कि जीसीसी को हार्डवेयर और नेटवर्क बुनियाद में भारी पूर्व-निवेश करना होगा।
2030 तक जीसीसी के कार्यबल पर एआई का क्या असर होगा?
रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, जीसीसी के 55% नियमित कार्य एआई-आधारित ऑटोमेशन के दायरे में आ सकते हैं और 2030 तक लगभग 60% कार्यबल को रिस्किलिंग की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट ज़ोर देती है कि यह केवल प्रशिक्षण बढ़ाने का नहीं, बल्कि कार्य की मौलिक पुनर्कल्पना का सवाल है।
भारत में जीसीसी की एआई प्रतिभा की हिस्सेदारी वैश्विक स्तर पर कितनी है?
डेल-जिनोव रिपोर्ट के अनुसार, भारत के जीसीसी वैश्विक एआई प्रतिभा का लगभग 28% हिस्सा रखते हैं और 1,200 से अधिक केंद्र पहले से एआई व मशीन लर्निंग क्षमताएं विकसित कर चुके हैं। यह आँकड़ा भारत को वैश्विक एआई प्रतिभा केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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