10 अगस्त 2026
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नौसेना के लिए ₹425 करोड़ का अनुबंध: भारत फोर्ज बनाएगी 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर

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नौसेना के लिए ₹425 करोड़ का अनुबंध: भारत फोर्ज बनाएगी 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर

सारांश

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने भारत फोर्ज के साथ ₹425 करोड़ का अनुबंध किया — 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर में 60% स्वदेशी सामग्री के साथ। यह उस वक्त आया है जब देश का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने 19 जून 2026 को भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ ₹425 करोड़ के मरीन गैस टरबाइन जनरेटर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
कुल 12 जनरेटर सेट , प्रत्येक 1.25 मेगावाट क्षमता के, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए तैयार किए जाएंगे।
अनुबंध 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के तहत है; न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में अनुबंध संपन्न हुआ।
देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा — वित्त वर्ष 2024-25 से 15.6% अधिक।
वित्त वर्ष 2013-14 के ₹43,746 करोड़ से तुलना करें तो रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ा।

रक्षा मंत्रालय ने 19 जून 2026 को भारतीय नौसेना के लिए 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर सेट की खरीद हेतु भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ ₹425 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। प्रत्येक जनरेटर की क्षमता 1.25 मेगावाट है और इनमें न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। यह अनुबंध रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के अंतर्गत संपन्न हुआ।

अनुबंध की मुख्य विशेषताएँ

यह परियोजना रक्षा खरीद की 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के तहत आती है, जो घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देती है। मंत्रालय के अनुसार, इन जनरेटर सेटों का उपयोग आधुनिक नौसैनिक युद्धपोतों पर महत्वपूर्ण युद्ध प्रणालियों, उन्नत हथियारों और सेंसरों को विद्युत आपूर्ति के लिए किया जाएगा। स्वदेशी उत्पादन और संपूर्ण जीवनचक्र समर्थन के ज़रिए भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को मजबूती मिलेगी।

रणनीतिक महत्व

मंत्रालय ने कहा कि यह अनुबंध समुद्री गैस टरबाइन जनरेटरों के निर्माण में स्वदेशी क्षमता स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। गौरतलब है कि इस तरह की महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रौद्योगिकी अब तक मुख्यतः आयात पर निर्भर रही है। इस परियोजना के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस पहल की जा रही है।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

यह अनुबंध ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने घोषणा की कि देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। रक्षा मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 के ₹84,643 करोड़ की तुलना में यह वृद्धि 110 प्रतिशत से अधिक है।

मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 में घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र ₹43,746 करोड़ था, जो अब लगभग चार गुना बढ़ चुका है।

सरकार की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन में इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। मंत्रालय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया की नीतियों के तहत घरेलू रक्षा उद्योग को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में और अधिक रणनीतिक प्रणालियों के स्वदेशीकरण की योजना पर काम जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रणनीतिक रूप से यह बड़ा संकेत है — मरीन गैस टरबाइन जनरेटर जैसी जटिल प्रणाली का स्वदेशीकरण भारत की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की परिपक्वता दर्शाता है। हालाँकि, '60% स्वदेशी सामग्री' की सीमा को लेकर सवाल उठते हैं — शेष 40% आयातित घटकों की निर्भरता कहाँ से है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। रक्षा उत्पादन के ₹1.78 लाख करोड़ के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का हिस्सा और निजी क्षेत्र की वास्तविक भागीदारी का विभाजन सामने आना चाहिए — तभी 'आत्मनिर्भरता' की असली तस्वीर उभरेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत फोर्ज और रक्षा मंत्रालय के बीच क्या अनुबंध हुआ है?
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 12 मरीन गैस टरबाइन जनरेटर सेट (प्रत्येक 1.25 मेगावाट) की खरीद हेतु भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ ₹425 करोड़ का अनुबंध किया है। यह अनुबंध 19 जून 2026 को 'बाय (इंडियन)' श्रेणी के तहत संपन्न हुआ।
मरीन गैस टरबाइन जनरेटर का नौसेना में क्या उपयोग होता है?
ये जनरेटर आधुनिक नौसैनिक युद्धपोतों पर महत्वपूर्ण युद्ध प्रणालियों, उन्नत हथियारों और सेंसरों को विद्युत आपूर्ति करते हैं। ये युद्धपोत की परिचालन तत्परता का आधार माने जाते हैं।
इस अनुबंध में स्वदेशी सामग्री की क्या शर्त है?
अनुबंध की शर्तों के अनुसार इन जनरेटरों में न्यूनतम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग अनिवार्य है। यह 'बाय (इंडियन)' श्रेणी की मुख्य आवश्यकता है, जो घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देती है।
भारत का रक्षा उत्पादन कितना बढ़ा है?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के ₹1.54 लाख करोड़ से 15.6 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2013-14 के ₹43,746 करोड़ की तुलना में यह लगभग चार गुना वृद्धि है।
'बाय (इंडियन)' श्रेणी क्या होती है?
यह भारत सरकार की रक्षा खरीद नीति की एक श्रेणी है जिसके अंतर्गत केवल भारतीय कंपनियों से उपकरण खरीदे जाते हैं और एक निर्धारित न्यूनतम स्वदेशी सामग्री अनिवार्य होती है। इसका उद्देश्य घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहित करना और आयात निर्भरता घटाना है।
राष्ट्र प्रेस
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