4 अगस्त 2026
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भारत में रिटेल लीजिंग 2026 की पहली छमाही में 10.5% उछली, चार साल का उच्चतम स्तर

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भारत में रिटेल लीजिंग 2026 की पहली छमाही में 10.5% उछली, चार साल का उच्चतम स्तर

सारांश

भारत का रिटेल बाजार 2026 की पहली छमाही में चार साल की सबसे तेज रफ्तार पर है — 62.7 लाख वर्ग फुट की लीजिंग और मॉल आपूर्ति में 64% गिरावट के बीच। घरेलू ब्रांड अग्रणी हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण स्पेस की कमी विस्तार की असली बाधा बनती जा रही है।

मुख्य बातें

भारत के शीर्ष सात शहरों में रिटेल लीजिंग जनवरी–जून 2026 में 10.5% बढ़कर 62.7 लाख वर्ग फुट पहुंची — चार वर्षों का उच्चतम स्तर।
दूसरी तिमाही में लीजिंग क्रमिक रूप से 2.7% बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट रही; घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी 79.1% ।
मुंबई (29%) और दिल्ली एनसीआर (24%) ने मिलकर कुल लीजिंग का 53% योगदान दिया; बेंगलुरु (23%) के साथ तीनों ने 75%+ हिस्सा संभाला।
नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति H1 2026 में 8.2 लाख वर्ग फुट — वर्ष-दर-वर्ष 64% की गिरावट।
कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 38.9% (H1 2025) से बढ़कर 43.1% (H1 2026) हुई।

भारत के शीर्ष सात प्रमुख शहरों में रिटेल लीजिंग ने जनवरी–जून 2026 की छमाही में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 62.7 लाख वर्ग फुट का आंकड़ा छुआ — जो पिछले चार वर्षों में किसी भी छमाही का सर्वोच्च स्तर है। कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म जेएलएल (JLL) की 4 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई बाहरी दबावों के बावजूद भारतीय रिटेल बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।

तिमाही प्रदर्शन: दोनों तिमाहियों में सकारात्मक रुझान

पहली तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) में कुल रिटेल लीजिंग 30.9 लाख वर्ग फुट रही। आपूर्ति की सीमाओं के बावजूद खुदरा विक्रेताओं के विस्तार अभियान ने मांग को स्थिर बनाए रखा। दूसरी तिमाही (अप्रैल–जून 2026) में गति और तेज हुई — लीजिंग क्रमिक रूप से 2.7 प्रतिशत बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट पहुंची। इस विस्तार में घरेलू ब्रांडों की भूमिका निर्णायक रही, जिन्होंने कुल लीजिंग में 79.1 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की।

मुंबई, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु की अगुवाई

शीर्ष तीन बाजारों ने मिलकर कुल रिटेल लीजिंग का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाला। मुंबई ने 29 प्रतिशत और दिल्ली एनसीआर ने 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मिलकर कुल वॉल्यूम का 53 प्रतिशत योगदान दिया। बेंगलुरु (23 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर रहा। यह ऐसे समय में आया है जब इन तीनों महानगरों में प्रीमियम रिटेल स्पेस की उपलब्धता पहले से सीमित है।

मॉल आपूर्ति में तीव्र गिरावट, वैकल्पिक प्रारूपों की तलाश

2026 की पहली छमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति केवल 8.2 लाख वर्ग फुट रही — जो 2025 की पहली छमाही की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 64 प्रतिशत की गिरावट है। गौरतलब है कि पिछले छह से नौ महीनों से प्रमुख रिटेल ब्रांड मॉल में गुणवत्तापूर्ण स्थान की कमी के कारण विस्तार के लिए वैकल्पिक प्रारूपों का मूल्यांकन करने पर विवश हैं। दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद के बाहरी इलाकों में नए रिटेल स्पेस ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया।

मॉल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि

उपभोक्ताओं की अनुभव-आधारित खरीदारी प्राथमिकताओं ने संगठित रिटेल स्पेस की मांग को बल दिया है। कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही के 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में 43.1 प्रतिशत हो गई है — यह संकेत देता है कि खरीदार अब डिजिटल के साथ-साथ भौतिक अनुभव को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाली छमाहियों में नए मॉल की आपूर्ति बढ़ने पर यह रुझान और मजबूत होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई में छिपी है — मॉल आपूर्ति में 64% की गिरावट यह बताती है कि विकास जमीन पर नहीं, डिमांड-साइड पर हो रहा है। घरेलू ब्रांडों की 79.1% हिस्सेदारी भारत के उपभोक्ता आत्मविश्वास का संकेत है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण मॉल स्पेस की कमी अगर बनी रही तो यह विस्तार की गति को अगली छमाही में ही थाम सकती है। दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद के बाहरी इलाकों में वैकल्पिक स्पेस की तलाश यह भी दर्शाती है कि प्रीमियम लोकेशन पर रिटेलर्स की पहुंच सीमित होती जा रही है — और यह दीर्घकालिक किरायों पर ऊपर का दबाव बना सकता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 की पहली छमाही में भारत में रिटेल लीजिंग कितनी रही?
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी–जून 2026 में भारत के शीर्ष सात शहरों में कुल रिटेल लीजिंग 10.5% बढ़कर 62.7 लाख वर्ग फुट पहुंची। यह पिछले चार वर्षों में किसी भी छमाही का सर्वोच्च आंकड़ा है।
रिटेल लीजिंग में किन शहरों का सबसे बड़ा योगदान रहा?
मुंबई (29%), दिल्ली एनसीआर (24%) और बेंगलुरु (23%) ने मिलकर H1 2026 की कुल रिटेल लीजिंग का 75% से अधिक हिस्सा संभाला। अकेले मुंबई और दिल्ली एनसीआर की संयुक्त हिस्सेदारी 53% रही।
नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति में इतनी गिरावट क्यों आई?
H1 2026 में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति केवल 8.2 लाख वर्ग फुट रही, जो H1 2025 की तुलना में 64% कम है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह से नौ महीनों से प्रमुख रिटेल ब्रांड गुणवत्तापूर्ण मॉल स्पेस की कमी के कारण वैकल्पिक प्रारूपों की तलाश में हैं।
घरेलू ब्रांडों की रिटेल लीजिंग में क्या भूमिका रही?
H1 2026 की कुल रिटेल लीजिंग में घरेलू ब्रांडों की हिस्सेदारी 79.1% रही, जो उनके आक्रामक विस्तार अभियान को दर्शाता है। विदेशी ब्रांडों की तुलना में घरेलू खिलाड़ी स्पष्ट रूप से इस चक्र में अग्रणी बने हुए हैं।
मॉल लीजिंग की हिस्सेदारी में क्या बदलाव आया है?
कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी H1 2025 के 38.9% से बढ़कर H1 2026 में 43.1% हो गई है। यह वृद्धि उपभोक्ताओं की अनुभव-आधारित खरीदारी की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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