भारत में रिटेल लीजिंग 2026 की पहली छमाही में 10.5% उछली, चार साल का उच्चतम स्तर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष सात प्रमुख शहरों में रिटेल लीजिंग ने जनवरी–जून 2026 की छमाही में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 62.7 लाख वर्ग फुट का आंकड़ा छुआ — जो पिछले चार वर्षों में किसी भी छमाही का सर्वोच्च स्तर है। कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म जेएलएल (JLL) की 4 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई बाहरी दबावों के बावजूद भारतीय रिटेल बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।
तिमाही प्रदर्शन: दोनों तिमाहियों में सकारात्मक रुझान
पहली तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) में कुल रिटेल लीजिंग 30.9 लाख वर्ग फुट रही। आपूर्ति की सीमाओं के बावजूद खुदरा विक्रेताओं के विस्तार अभियान ने मांग को स्थिर बनाए रखा। दूसरी तिमाही (अप्रैल–जून 2026) में गति और तेज हुई — लीजिंग क्रमिक रूप से 2.7 प्रतिशत बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट पहुंची। इस विस्तार में घरेलू ब्रांडों की भूमिका निर्णायक रही, जिन्होंने कुल लीजिंग में 79.1 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की।
मुंबई, दिल्ली एनसीआर और बेंगलुरु की अगुवाई
शीर्ष तीन बाजारों ने मिलकर कुल रिटेल लीजिंग का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाला। मुंबई ने 29 प्रतिशत और दिल्ली एनसीआर ने 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मिलकर कुल वॉल्यूम का 53 प्रतिशत योगदान दिया। बेंगलुरु (23 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर रहा। यह ऐसे समय में आया है जब इन तीनों महानगरों में प्रीमियम रिटेल स्पेस की उपलब्धता पहले से सीमित है।
मॉल आपूर्ति में तीव्र गिरावट, वैकल्पिक प्रारूपों की तलाश
2026 की पहली छमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति केवल 8.2 लाख वर्ग फुट रही — जो 2025 की पहली छमाही की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 64 प्रतिशत की गिरावट है। गौरतलब है कि पिछले छह से नौ महीनों से प्रमुख रिटेल ब्रांड मॉल में गुणवत्तापूर्ण स्थान की कमी के कारण विस्तार के लिए वैकल्पिक प्रारूपों का मूल्यांकन करने पर विवश हैं। दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद के बाहरी इलाकों में नए रिटेल स्पेस ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया।
मॉल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि
उपभोक्ताओं की अनुभव-आधारित खरीदारी प्राथमिकताओं ने संगठित रिटेल स्पेस की मांग को बल दिया है। कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही के 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में 43.1 प्रतिशत हो गई है — यह संकेत देता है कि खरीदार अब डिजिटल के साथ-साथ भौतिक अनुभव को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाली छमाहियों में नए मॉल की आपूर्ति बढ़ने पर यह रुझान और मजबूत होने की संभावना है।