भारत में सर्कुलर पैकेजिंग को मजबूती: 17 रीसाइक्ल्ड पीईटी प्लांट्स को एफएसएसएआई का अनुमोदन
सारांश
Key Takeaways
- एफएसएसएआई ने 17 रीसाइक्ल्ड पीईटी प्लांट्स को मंजूरी दी।
- हर साल 3 लाख टन फूड-ग्रेड आर पीईटी उत्पादन होगा।
- 2026-27 तक 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री का लक्ष्य।
- 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश।
- यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के मानकों के अनुसार स्थापित।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 17 रीसाइक्ल्ड पीईटी (आर पीईटी) प्लांट्स को अंतिम मंजूरी प्रदान की है। उद्योग संगठन पीईटी रीसायकलर्स संघ, भारत (एपीआर भारत) ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत की पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती प्रदान करेगा।
एपीआर भारत के अनुसार, इस निर्णय से हर वर्ष लगभग 3 लाख टन फूड-ग्रेड आर पीईटी उत्पादन क्षमता सुनिश्चित होगी। यह 2026-27 तक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग के सरकारी लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगा।
संस्था के अनुसार, इन मंजूरियों के माध्यम से एफएसएसएआई से प्रमाणित संयंत्र मिलकर हर साल लगभग 3 लाख मीट्रिक टन आर पीईटी का उत्पादन कर सकेंगे, जिसका उपयोग देश के पेय पदार्थ और बोतलिंग उद्योग में खाद्य-संपर्क पैकेजिंग के लिए किया जाएगा।
एपीआर भारत के महानिदेशक गौतम जैन ने कहा कि यह कदम उस समय उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे (वर्जिन) पीईटी बाजार पर ईरान-इजरायल युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का दबाव है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्कुलर इकोनॉमी के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
वास्तव में, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत 2025-26 से कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग में 30 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इसके बाद हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 2028-29 तक इसे 60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योग संगठन के अनुसार, इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देशभर में 15 से 18 फूड-ग्रेड आर पीईटी रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिसमें लगभग 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
इन संयंत्रों में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है और इन्हें यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ईएफएसए) और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के मानकों के अनुसार स्थापित किया गया है।
वहीं, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सितंबर 2021 में आर पीईटी को खाद्य-संपर्क सामग्री के रूप में उपयोग की अनुमति दी थी। इसके बाद जून 2025 में मंत्रालय ने ब्रांड और उत्पादकों को 2025-26 के लिए निर्धारित 30 प्रतिशत आर पीईटी लक्ष्य में कमी होने पर उसे अगले तीन वर्षों में पूरा करने की छूट भी दी थी।