कच्चा तेल 80 डॉलर से नीचे: HPCL 2%, BPCL 2.46% उछले, IOCL भी चमका
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के शेयरों में बुधवार, 17 जून को जोरदार उछाल आया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले तीन महीनों के निचले स्तर तक लुढ़क गईं। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक आपूर्ति परिदृश्य को बेहतर बनाया और सरकारी तेल विपणन कंपनियों के निवेशकों में नई उम्मीद जगाई।
शेयरों में कितनी आई तेजी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इंट्रा-डे कारोबार में एचपीसीएल का शेयर 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ ₹410.50 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुँचा। बीपीसीएल ने 2.46 प्रतिशत की छलाँग लगाते हुए ₹319.50 का इंट्रा-डे हाई छुआ। आईओसीएल में 1.61 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई और यह शेयर ₹147.47 के दिन के ऊँचे स्तर तक पहुँचा।
कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई और पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले पाँच कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
ईरान समझौते की भूमिका
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत ईरान को फिर से कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिल सकती है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान निकालना है। इसके अलावा, इस प्रस्तावित व्यवस्था से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में सहायता मिलने की उम्मीद है — यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के बढ़ते भुगतान संतुलन (BoP) घाटे की चिंता को काफी हद तक कम करती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। गौरतलब है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली में भी कमी आई है, जो बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। भारतीय रुपये में लगातार मजबूती और आगे भी मजबूती की संभावना इस सकारात्मक रुझान को बल दे रही है।
बाजार का समग्र प्रदर्शन
बुधवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता कम होने और वैश्विक निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार की धारणा को मजबूती दी। यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है, तो तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन में और सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।