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कच्चा तेल 80 डॉलर से नीचे: HPCL 2%, BPCL 2.46% उछले, IOCL भी चमका

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कच्चा तेल 80 डॉलर से नीचे: HPCL 2%, BPCL 2.46% उछले, IOCL भी चमका

सारांश

कच्चे तेल की कीमतें पाँच दिनों में 16% लुढ़कीं और ब्रेंट 79 डॉलर के करीब आ गया। इसका सीधा फायदा HPCL, BPCL और IOCL को मिला, जिनके शेयर बुधवार को 1.61% से 2.46% तक उछले। अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद ने आपूर्ति का दबाव घटाया और घरेलू बाजार लगातार चौथे सत्र में हरे निशान में बंद हुआ।

मुख्य बातें

एचपीसीएल का शेयर 2% से अधिक उछलकर ₹410.50 के इंट्रा-डे हाई पर पहुँचा।
बीपीसीएल में 2.46% की बढ़त, ₹319.50 का दिन का उच्च स्तर।
आईओसीएल 1.61% चढ़कर ₹147.47 पर पहुँचा।
ब्रेंट क्रूड पाँच सत्रों में करीब 16% गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर; WTI करीब 75 डॉलर पर।
अमेरिका-ईरान प्रस्तावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और ईरानी तेल निर्यात बढ़ने की उम्मीद।
घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में हरे निशान में बंद।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के शेयरों में बुधवार, 17 जून को जोरदार उछाल आया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले तीन महीनों के निचले स्तर तक लुढ़क गईं। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते की संभावनाओं ने वैश्विक आपूर्ति परिदृश्य को बेहतर बनाया और सरकारी तेल विपणन कंपनियों के निवेशकों में नई उम्मीद जगाई।

शेयरों में कितनी आई तेजी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इंट्रा-डे कारोबार में एचपीसीएल का शेयर 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ ₹410.50 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुँचा। बीपीसीएल ने 2.46 प्रतिशत की छलाँग लगाते हुए ₹319.50 का इंट्रा-डे हाई छुआ। आईओसीएल में 1.61 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई और यह शेयर ₹147.47 के दिन के ऊँचे स्तर तक पहुँचा।

कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई और पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले पाँच कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

ईरान समझौते की भूमिका

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत ईरान को फिर से कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिल सकती है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान निकालना है। इसके अलावा, इस प्रस्तावित व्यवस्था से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में सहायता मिलने की उम्मीद है — यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के बढ़ते भुगतान संतुलन (BoP) घाटे की चिंता को काफी हद तक कम करती है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। गौरतलब है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली में भी कमी आई है, जो बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। भारतीय रुपये में लगातार मजबूती और आगे भी मजबूती की संभावना इस सकारात्मक रुझान को बल दे रही है।

बाजार का समग्र प्रदर्शन

बुधवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता कम होने और वैश्विक निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार की धारणा को मजबूती दी। यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है, तो तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन में और सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मुख्यतः बाहरी भू-राजनीतिक घटनाक्रम — अमेरिका-ईरान वार्ता — पर टिका है, न कि घरेलू नीतिगत सुधार पर। अगर यह वार्ता विफल होती है या होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव फिर बढ़ता है, तो यही कंपनियाँ तेज पलटाव का सामना कर सकती हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें न घटाने का निर्णय OMC के मार्जिन को बेहतर बनाता है, लेकिन आम उपभोक्ता को इस गिरावट का कोई सीधा लाभ नहीं मिल रहा — यह एक अनदेखा विरोधाभास है जिस पर मुख्यधारा की बाजार कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HPCL, BPCL और IOCL के शेयरों में 17 जून को तेजी क्यों आई?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते की उम्मीद से सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में उछाल आया। कम कच्चे तेल की कीमतें इन कंपनियों की इनपुट लागत घटाती हैं, जिससे उनका मार्जिन बेहतर होता है।
ब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतें अभी कहाँ हैं?
ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आकर लगभग 79 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर है। WTI क्रूड लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। पाँच कारोबारी सत्रों में ब्रेंट में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट आई है।
अमेरिका-ईरान समझौते का तेल बाजार पर क्या असर होगा?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत ईरान को फिर से कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिल सकती है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही आसान होगी और आपूर्ति की चिंताएँ कम होंगी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए कच्चे तेल की कम कीमतें भुगतान संतुलन (BoP) घाटे की चिंता को कम करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की मजबूती और FII की बिकवाली में कमी के साथ मिलकर यह घटनाक्रम घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक है।
17 जून को घरेलू शेयर बाजार का समग्र प्रदर्शन कैसा रहा?
बुधवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता में कमी और वैश्विक निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार की धारणा को मजबूती प्रदान की।
राष्ट्र प्रेस
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