जल संचय जन भागीदारी अभियान: 1.55 करोड़ से अधिक जल संरचनाएँ बनीं, 2.43 अरब घन मीटर भू-जल रिचार्ज का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान के तहत देशभर में अब तक 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम जल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। 26 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच वर्षा-आधारित आँकड़ों के आधार पर मूल्यांकन की गई 23 लाख जल संरचनाओं से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भू-जल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) का अनुमान लगाया गया है।
अभियान की मुख्य उपलब्धियाँ
सरकार के अनुसार, इस पहल ने सामुदायिक भागीदारी, संसाधनों के समन्वित उपयोग और डिजिटल निगरानी को एकजुट कर जल सुरक्षा की दिशा में एक मज़बूत ढाँचा खड़ा किया है। जल संचय जन भागीदारी को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन कार्यक्रम के साथ एकीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भू-जल रिचार्ज, जल परिसंपत्तियों का निर्माण और जन-सहभागिता को बढ़ावा देना है।
अभियान के तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कम लागत वाले उपायों को प्रोत्साहित किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इससे टिकाऊ जल प्रबंधन के ज़रिए जलवायु परिवर्तन से निपटने की सामूहिक क्षमता भी सुदृढ़ हुई है।
किन संस्थाओं की भागीदारी रही
इस राष्ट्रव्यापी अभियान में पंचायत राज संस्थाएँ, शहरी स्थानीय निकाय, महिला स्व-सहायता समूह, युवा संगठन, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज और स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से जुड़े हैं। ये सभी योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन और ज़मीनी भागीदारी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई राज्य गहराते भू-जल संकट से जूझ रहे हैं।
डिजिटल निगरानी की भूमिका
सरकार ने बताया कि जेएसजेबी: कैच द रेन पोर्टल और उससे जुड़ी मोबाइल एप्लीकेशन ने अभियान की पारदर्शिता और निगरानी को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके ज़रिये आम नागरिक भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जो जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह अभियान वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल शक्ति अभियान की नींव पर खड़ा है। उस मूल अभियान के तहत देश के 256 ज़िलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, जलग्रहण क्षेत्र विकास, जल निकायों के पुनर्जीवन, वनीकरण और जन-भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
आगे की राह
आधिकारिक फैक्टशीट में रेखांकित किया गया है कि जल संरक्षण अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक समुदाय-आधारित जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक योजना, स्थानीय स्वामित्व और विभिन्न संसाधनों के प्रभावी समन्वय से न केवल जल सुरक्षा मज़बूत हो रही है, बल्कि ग्रामीण आजीविका को समर्थन और जलवायु संबंधी चुनौतियों से मुकाबले की क्षमता भी बढ़ रही है। यदि यह गति बरकरार रही, तो देश के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में दीर्घकालिक बदलाव की उम्मीद और प्रबल होगी।