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जल संचय जन भागीदारी अभियान: 1.55 करोड़ से अधिक जल संरचनाएँ बनीं, 2.43 अरब घन मीटर भू-जल रिचार्ज का अनुमान

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जल संचय जन भागीदारी अभियान: 1.55 करोड़ से अधिक जल संरचनाएँ बनीं, 2.43 अरब घन मीटर भू-जल रिचार्ज का अनुमान

सारांश

जल संचय जन भागीदारी अभियान ने 1.55 करोड़ से अधिक जल संरचनाएँ खड़ी की हैं और 2.43 अरब घन मीटर भू-जल रिचार्ज का अनुमान सामने आया है — लेकिन असली परीक्षा इन संरचनाओं के दीर्घकालिक रखरखाव और स्वतंत्र सत्यापन में है।

मुख्य बातें

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान के तहत अब तक 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम जल रिचार्ज और भंडारण संरचनाओं का निर्माण हो चुका है।
जून से दिसंबर 2025 के बीच मूल्यांकित 23 लाख जल संरचनाओं से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भू-जल पुनर्भरण का अनुमान।
अभियान को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन कार्यक्रम के साथ एकीकृत किया गया है।
पंचायत राज संस्थाएँ, महिला समूह, युवा संगठन और नागरिक समाज सहित व्यापक सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
यह अभियान वर्ष 2019 में शुरू जल शक्ति अभियान की बुनियाद पर टिका है, जो 256 ज़िलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों में संचालित था।
जेएसजेबी पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन डिजिटल निगरानी और नागरिक-प्रतिक्रिया का माध्यम बन रहे हैं।

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान के तहत देशभर में अब तक 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम जल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। 26 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच वर्षा-आधारित आँकड़ों के आधार पर मूल्यांकन की गई 23 लाख जल संरचनाओं से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भू-जल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) का अनुमान लगाया गया है।

अभियान की मुख्य उपलब्धियाँ

सरकार के अनुसार, इस पहल ने सामुदायिक भागीदारी, संसाधनों के समन्वित उपयोग और डिजिटल निगरानी को एकजुट कर जल सुरक्षा की दिशा में एक मज़बूत ढाँचा खड़ा किया है। जल संचय जन भागीदारी को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन कार्यक्रम के साथ एकीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भू-जल रिचार्ज, जल परिसंपत्तियों का निर्माण और जन-सहभागिता को बढ़ावा देना है।

अभियान के तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कम लागत वाले उपायों को प्रोत्साहित किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इससे टिकाऊ जल प्रबंधन के ज़रिए जलवायु परिवर्तन से निपटने की सामूहिक क्षमता भी सुदृढ़ हुई है।

किन संस्थाओं की भागीदारी रही

इस राष्ट्रव्यापी अभियान में पंचायत राज संस्थाएँ, शहरी स्थानीय निकाय, महिला स्व-सहायता समूह, युवा संगठन, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज और स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से जुड़े हैं। ये सभी योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन और ज़मीनी भागीदारी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई राज्य गहराते भू-जल संकट से जूझ रहे हैं।

डिजिटल निगरानी की भूमिका

सरकार ने बताया कि जेएसजेबी: कैच द रेन पोर्टल और उससे जुड़ी मोबाइल एप्लीकेशन ने अभियान की पारदर्शिता और निगरानी को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके ज़रिये आम नागरिक भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जो जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह अभियान वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल शक्ति अभियान की नींव पर खड़ा है। उस मूल अभियान के तहत देश के 256 ज़िलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, जलग्रहण क्षेत्र विकास, जल निकायों के पुनर्जीवन, वनीकरण और जन-भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

आगे की राह

आधिकारिक फैक्टशीट में रेखांकित किया गया है कि जल संरक्षण अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक समुदाय-आधारित जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक योजना, स्थानीय स्वामित्व और विभिन्न संसाधनों के प्रभावी समन्वय से न केवल जल सुरक्षा मज़बूत हो रही है, बल्कि ग्रामीण आजीविका को समर्थन और जलवायु संबंधी चुनौतियों से मुकाबले की क्षमता भी बढ़ रही है। यदि यह गति बरकरार रही, तो देश के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में दीर्घकालिक बदलाव की उम्मीद और प्रबल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये संरचनाएँ दीर्घकाल में कितना जल धारण कर पाती हैं और स्थानीय समुदाय इनका रखरखाव कर पाते हैं या नहीं। भारत में बड़े पैमाने पर बनाई गई जल संरचनाएँ अक्सर रखरखाव के अभाव में कुछ वर्षों में बेकार हो जाती हैं — यह पैटर्न पिछले दशकों में बार-बार देखा गया है। 2.43 अरब घन मीटर रिचार्ज का अनुमान वर्षा-आधारित आँकड़ों पर आधारित है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित भू-जल माप पर — यह अंतर महत्वपूर्ण है। जब तक पंचायत स्तर पर दीर्घकालिक निगरानी और स्वतंत्र मूल्यांकन का तंत्र नहीं बनता, ये संख्याएँ नीतिगत सफलता की पूरी तस्वीर नहीं देतीं।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल संचय जन भागीदारी अभियान क्या है?
जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में कृत्रिम जल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण, भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना है। इसे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन कार्यक्रम के साथ एकीकृत किया गया है।
अभियान के तहत अब तक कितनी जल संरचनाएँ बनी हैं?
अब तक 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम जल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण हो चुका है। जून से दिसंबर 2025 के बीच मूल्यांकित 23 लाख संरचनाओं से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भू-जल पुनर्भरण का अनुमान लगाया गया है।
इस अभियान में कौन-कौन सी संस्थाएँ भागीदार हैं?
इस अभियान में पंचायत राज संस्थाएँ, शहरी स्थानीय निकाय, महिला स्व-सहायता समूह, युवा संगठन, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन और स्थानीय समुदाय शामिल हैं। ये सभी जल संरचनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन और सामुदायिक जागरूकता में योगदान दे रहे हैं।
जल शक्ति अभियान और जल संचय जन भागीदारी में क्या संबंध है?
जल संचय जन भागीदारी, वर्ष 2019 में आरंभ जल शक्ति अभियान की नींव पर विकसित हुई है। जल शक्ति अभियान देश के 256 ज़िलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों में भू-जल पुनर्भरण, वनीकरण और जन-भागीदारी पर केंद्रित था, जिसे अब JSJB के ज़रिये और विस्तार दिया गया है।
अभियान की डिजिटल निगरानी कैसे होती है?
सरकार ने जेएसजेबी: कैच द रेन पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन विकसित की है, जिससे अभियान की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित होती है। इन माध्यमों से आम नागरिक भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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