KPIT टेक्नोलॉजीज के संस्थापक रवि पंडित का 71 वर्ष की आयु में पुणे में निधन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
KPIT टेक्नोलॉजीज के संस्थापक रवि पंडित का 71 वर्ष की आयु में पुणे में निधन

सारांश

भारतीय ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अग्रदूत रवि पंडित अब नहीं रहे। KPIT टेक्नोलॉजीज को 15 देशों में पहुँचाने वाले इस उद्यमी ने सिर्फ कंपनी नहीं बनाई — उन्होंने पुणे को एक वैश्विक मोबिलिटी टेक हब के रूप में पहचान दिलाई। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है।

मुख्य बातें

रवि पंडित का 8 मई 2025 को पुणे में 71 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
वे KPIT टेक्नोलॉजीज और केएंडपी ग्रुप के सह-संस्थापक और चेयरमैन थे।
उनके नेतृत्व में KPIT ने 15 देशों में उपस्थिति दर्ज कराई और ऑटोनॉमस ड्राइविंग, EV व क्लीन एनर्जी में सॉल्यूशन दिए।
KPIT का Q4 FY2026 शुद्ध लाभ 33 प्रतिशत घटकर ₹163 करोड़ रहा; परिचालन राजस्व 12 प्रतिशत बढ़कर ₹1,711 करोड़ पहुँचा।
BSE पर शेयर ₹726 प्रति शेयर पर, 52 सप्ताह का उच्च ₹1,433 और न्यूनतम ₹625 ।

KPIT टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. एस.बी. (रवि) पंडित का शुक्रवार, 8 मई को पुणे में 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कंपनी ने यह जानकारी एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से दी। उनके निधन से भारतीय ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी क्षेत्र ने एक अग्रणी उद्यमी और नीति-चिंतक खो दिया है।

कौन थे रवि पंडित

डॉ. रवि पंडित केएंडपी ग्रुप के चेयरमैन और सह-संस्थापक थे। उन्होंने KPIT टेक्नोलॉजीज को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस पर केंद्रित एक वैश्विक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कंपनी ने 15 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और ऑटोनॉमस ड्राइविंग, इलेक्ट्रिफिकेशन तथा क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी जैसे अग्रणी क्षेत्रों में मोबिलिटी सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन उपलब्ध कराए।

सामाजिक और नीतिगत योगदान

कॉर्पोरेट जगत से परे, पंडित सार्वजनिक नीति, सतत विकास और सामाजिक पहलों में सक्रिय रूप से संलग्न रहे। उन्होंने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और जनवानी जैसे संस्थानों की सह-स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) के सतत विकास केंद्र के माध्यम से नीति अनुसंधान पहलों को सक्रिय समर्थन दिया।

उद्योग जगत में उनकी भूमिका व्यापक थी। उन्होंने मराठा चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (MCCIA) के चेयरमैन के रूप में भारतीय उद्योग का प्रतिनिधित्व किया और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की अनेक समितियों में योगदान दिया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी क्षेत्र वैश्विक मंच पर तेज़ी से विस्तार कर रहा है।

शेयर बाज़ार पर असर

निधन की खबर के बाद, BSE पर KPIT टेक्नोलॉजीज के शेयर सत्र में 0.61 प्रतिशत बढ़कर ₹726 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹1,433 और न्यूनतम स्तर ₹625 रहा है।

कंपनी के ताज़ा वित्तीय नतीजे

इसी सप्ताह कंपनी ने मार्च तिमाही (Q4 FY2026) के वित्तीय नतीजे जारी किए, जिनमें समेकित शुद्ध लाभ में 33 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई। शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की इसी अवधि के ₹245 करोड़ के मुकाबले घटकर ₹163 करोड़ रह गया। हालाँकि, परिचालन राजस्व में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह पिछले वर्ष के ₹1,528 करोड़ से बढ़कर ₹1,711 करोड़ पहुँच गया। गौरतलब है कि लाभ में गिरावट के बावजूद राजस्व वृद्धि कंपनी की परिचालन मजबूती को दर्शाती है। रवि पंडित के बाद कंपनी के नेतृत्व की दिशा पर अब सभी की निगाहें टिकी होंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि पंडित कौन थे और उनका KPIT से क्या संबंध था?
डॉ. रवि पंडित KPIT टेक्नोलॉजीज और केएंडपी ग्रुप के सह-संस्थापक और चेयरमैन थे। उन्होंने कंपनी को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस पर केंद्रित वैश्विक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में खड़ा किया।
रवि पंडित का निधन कब और कहाँ हुआ?
रवि पंडित का निधन 8 मई 2025 को पुणे में हुआ। उनकी आयु 71 वर्ष थी और कंपनी ने यह जानकारी एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए दी।
KPIT टेक्नोलॉजीज किस क्षेत्र में काम करती है?
KPIT टेक्नोलॉजीज ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस में विशेषज्ञ है। कंपनी ऑटोनॉमस ड्राइविंग, इलेक्ट्रिफिकेशन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 15 देशों में सेवाएँ देती है।
KPIT टेक्नोलॉजीज के Q4 FY2026 नतीजे कैसे रहे?
कंपनी का Q4 FY2026 शुद्ध लाभ 33 प्रतिशत घटकर ₹163 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष ₹245 करोड़ था। हालाँकि परिचालन राजस्व 12 प्रतिशत बढ़कर ₹1,711 करोड़ पहुँचा।
रवि पंडित का सामाजिक और नीतिगत योगदान क्या था?
पंडित ने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और जनवानी जैसे संस्थानों की सह-स्थापना की। वे MCCIA के चेयरमैन रहे और CII की अनेक समितियों में योगदान देते हुए GIPE के सतत विकास केंद्र को नीति अनुसंधान में सहयोग दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले