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आरकेवीवाई की दूसरी किस्त पाने वाला पहला राज्य बना महाराष्ट्र, ₹260 करोड़ के उपयोग से हासिल की पात्रता

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आरकेवीवाई की दूसरी किस्त पाने वाला पहला राज्य बना महाराष्ट्र, ₹260 करोड़ के उपयोग से हासिल की पात्रता

सारांश

महाराष्ट्र ने आरकेवीवाई की पहली किस्त के ₹335 करोड़ में से ₹260 करोड़ से अधिक खर्च कर 75% का बेंचमार्क पार किया और दूसरी किस्त पाने वाला देश का पहला राज्य बन गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र आरकेवीवाई की दूसरी किस्त के लिए पात्र होने वाला देश का पहला राज्य बना।
राज्य ने पहली किस्त के ₹335 करोड़ में से ₹260 करोड़ से अधिक खर्च किए — निर्धारित 75% बेंचमार्क से अधिक।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 27 जुलाई 2026 को वर्चुअल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू की।
बाढ़ प्रभावित किसानों को ₹14,000 करोड़ का मुआवज़ा पाँच दिनों में सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
PMFBY के तहत KCC और गैर-KCC दोनों किसान पात्र, लेकिन आवेदन में पारदर्शिता अनिवार्य।

महाराष्ट्र राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत दूसरी किस्त प्राप्त करने की पात्रता हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य ने पहली किस्त के रूप में प्राप्त ₹335 करोड़ में से ₹260 करोड़ से अधिक का उपयोग किया, जो निर्धारित 75 प्रतिशत के बेंचमार्क को पार कर गया। 27 जुलाई 2026 को आयोजित एक वर्चुअल समीक्षा बैठक के बाद दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।

समीक्षा बैठक और केंद्र का आकलन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरकेवीवाई के अंतर्गत जारी राशि के उपयोग का जायज़ा लेने के लिए एक वर्चुअल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महाराष्ट्र की प्रगति को संतोषजनक पाया गया और दूसरी किस्त जारी करने पर सहमति बनी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राशि के समय पर उपयोग के साथ-साथ निरंतर निगरानी भी अनिवार्य है ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए हो।

किन क्षेत्रों में तेज़ी लाने का आग्रह

चौहान ने 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) के तहत हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए राज्य से डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, बीज, तिलहन और एग्रो-फॉरेस्ट्री से जुड़े कार्यों पर व्यय की गति बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बीज से संबंधित लंबित देनदारियों का निपटान शीघ्र किया जाए ताकि समग्र व्यय प्रदर्शन और बेहतर हो सके।

किसानों की सराहना और बाढ़ राहत का उल्लेख

मंत्री ने किसान आईडी निर्माण में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की प्रशंसा की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को राज्य द्वारा दी गई त्वरित वित्तीय सहायता का भी उल्लेख किया, जिसके तहत लगभग ₹14,000 करोड़ का मुआवज़ा पाँच दिनों के भीतर सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था। यह राज्य की प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर चर्चा

बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर भी अलग से विचार-विमर्श हुआ। चौहान ने किसानों से फसल बीमा आवेदन के दौरान सही और पारदर्शी जानकारी देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-KCC, दोनों श्रेणियों के किसान फसल बीमा के पात्र हैं, परंतु किसी अन्य खाते के माध्यम से KCC स्थिति छिपाने से बचना चाहिए। पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को लाभ से वंचित करना।

आगे की राह

महाराष्ट्र की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक मानक स्थापित करती है। केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आरकेवीवाई की अगली किस्त उन्हीं राज्यों को मिलेगी जो निर्धारित समय-सीमा में धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन-आधारित वितरण मॉडल कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को और अनुशासित बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹260 करोड़ का उपयोग ज़मीनी स्तर पर किसानों तक कितना पहुँचा — केवल बजट खर्च होना पर्याप्त नहीं है। केंद्र का प्रदर्शन-आधारित वितरण मॉडल सही दिशा में है, परंतु बिना स्वतंत्र तृतीय-पक्ष मूल्यांकन के 'प्रभावी क्रियान्वयन' का दावा अधूरा रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में कृषि योजनाओं का धन अंतिम लाभार्थी तक पहुँचने से पहले ही खर्च दिखाया जाता है। महाराष्ट्र मॉडल को वास्तविक मानक बनाने के लिए परिणाम-आधारित रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना होगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरकेवीवाई की दूसरी किस्त के लिए महाराष्ट्र कैसे पात्र बना?
महाराष्ट्र ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की पहली किस्त के रूप में प्राप्त ₹335 करोड़ में से ₹260 करोड़ से अधिक का उपयोग किया, जो निर्धारित 75% बेंचमार्क से अधिक है। इसी आधार पर वह दूसरी किस्त के लिए पात्र होने वाला देश का पहला राज्य बना।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) क्या है?
आरकेवीवाई केंद्र सरकार की एक प्रमुख कृषि विकास योजना है जो राज्यों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। राशि का वितरण राज्यों के व्यय प्रदर्शन के आधार पर किस्तों में किया जाता है।
महाराष्ट्र को बाढ़ राहत के तहत किसानों को कितना मुआवज़ा दिया गया?
महाराष्ट्र ने बाढ़ प्रभावित किसानों को लगभग ₹14,000 करोड़ का मुआवज़ा पाँच दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस त्वरित वित्तीय सहायता की समीक्षा बैठक में सराहना की।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में KCC और गैर-KCC किसानों की स्थिति क्या है?
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-KCC दोनों श्रेणियों के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत लाभ के पात्र हैं। हालाँकि, आवेदन में KCC स्थिति को किसी अन्य खाते के माध्यम से छिपाना उचित नहीं है और पोर्टल पर पारदर्शी जानकारी देना अनिवार्य है।
आरकेवीवाई के तहत महाराष्ट्र को किन क्षेत्रों में और तेज़ी लाने को कहा गया?
केंद्रीय मंत्री ने महाराष्ट्र से डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, बीज, तिलहन और एग्रो-फॉरेस्ट्री से जुड़े कार्यों पर व्यय की गति बढ़ाने का आग्रह किया। साथ ही बीज से संबंधित लंबित देनदारियों का शीघ्र निपटान करने का सुझाव भी दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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