आरकेवीवाई की दूसरी किस्त पाने वाला पहला राज्य बना महाराष्ट्र, ₹260 करोड़ के उपयोग से हासिल की पात्रता
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत दूसरी किस्त प्राप्त करने की पात्रता हासिल करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य ने पहली किस्त के रूप में प्राप्त ₹335 करोड़ में से ₹260 करोड़ से अधिक का उपयोग किया, जो निर्धारित 75 प्रतिशत के बेंचमार्क को पार कर गया। 27 जुलाई 2026 को आयोजित एक वर्चुअल समीक्षा बैठक के बाद दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
समीक्षा बैठक और केंद्र का आकलन
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरकेवीवाई के अंतर्गत जारी राशि के उपयोग का जायज़ा लेने के लिए एक वर्चुअल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महाराष्ट्र की प्रगति को संतोषजनक पाया गया और दूसरी किस्त जारी करने पर सहमति बनी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राशि के समय पर उपयोग के साथ-साथ निरंतर निगरानी भी अनिवार्य है ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए हो।
किन क्षेत्रों में तेज़ी लाने का आग्रह
चौहान ने 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) के तहत हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए राज्य से डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, बीज, तिलहन और एग्रो-फॉरेस्ट्री से जुड़े कार्यों पर व्यय की गति बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बीज से संबंधित लंबित देनदारियों का निपटान शीघ्र किया जाए ताकि समग्र व्यय प्रदर्शन और बेहतर हो सके।
किसानों की सराहना और बाढ़ राहत का उल्लेख
मंत्री ने किसान आईडी निर्माण में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की प्रशंसा की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को राज्य द्वारा दी गई त्वरित वित्तीय सहायता का भी उल्लेख किया, जिसके तहत लगभग ₹14,000 करोड़ का मुआवज़ा पाँच दिनों के भीतर सीधे किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था। यह राज्य की प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर चर्चा
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर भी अलग से विचार-विमर्श हुआ। चौहान ने किसानों से फसल बीमा आवेदन के दौरान सही और पारदर्शी जानकारी देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-KCC, दोनों श्रेणियों के किसान फसल बीमा के पात्र हैं, परंतु किसी अन्य खाते के माध्यम से KCC स्थिति छिपाने से बचना चाहिए। पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को लाभ से वंचित करना।
आगे की राह
महाराष्ट्र की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक मानक स्थापित करती है। केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आरकेवीवाई की अगली किस्त उन्हीं राज्यों को मिलेगी जो निर्धारित समय-सीमा में धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन-आधारित वितरण मॉडल कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को और अनुशासित बना सकता है।