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मार्वेल टेक्नोलॉजी का भारत में ₹2,100 करोड़ का निवेश, 3 वर्षों में कर्मचारी संख्या होगी दोगुनी

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मार्वेल टेक्नोलॉजी का भारत में ₹2,100 करोड़ का निवेश, 3 वर्षों में कर्मचारी संख्या होगी दोगुनी

सारांश

मार्वेल टेक्नोलॉजी का भारत में $250 मिलियन का दांव महज़ विस्तार नहीं — यह भारत को वैश्विक चिप डिज़ाइन की धुरी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। 20 वर्षों की उपस्थिति के बाद कंपनी अब कर्मचारी संख्या दोगुनी करने और 2-नैनोमीटर तकनीक पर दाँव लगा रही है।

मुख्य बातें

मार्वेल टेक्नोलॉजी अगले 3 वर्षों में भारत में $250 मिलियन (लगभग ₹2,100 करोड़) का निवेश करेगी।
निवेश का उद्देश्य R&D क्षमता , इंजीनियरिंग प्रतिभा और बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना है।
कंपनी भारत में कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करने की योजना बना रही है।
बेंगलुरु में नए विंग का उद्घाटन; हैदराबाद में भी उपस्थिति बढ़ाई जा रही है।
भारत पहले से ही मार्वेल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा R&D केंद्र है, जो 2006 से सक्रिय है।
टीमें 2-नैनोमीटर और उससे आगे की सेमीकंडक्टर प्रोसेस तकनीक पर कार्यरत हैं।

अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी मार्वेल टेक्नोलॉजी ने 29 जुलाई 2026 को घोषणा की कि वह अगले तीन वर्षों में भारत में $25 करोड़ (250 मिलियन डॉलर) का निवेश करेगी। इस निवेश का लक्ष्य कंपनी की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) क्षमता, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना है। यह घोषणा बेंगलुरु में कंपनी के भारत संचालन के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की गई।

निवेश योजना में क्या शामिल है

मार्वेल ने इस विस्तार के तहत बेंगलुरु कार्यालय में एक नए विंग का उद्घाटन किया है। साथ ही हैदराबाद में भी कंपनी की उपस्थिति बढ़ाई जा रही है। इन केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उन्नत सेमीकंडक्टर समाधानों के डिज़ाइन और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी ने अगले तीन वर्षों में भारत में अपने कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करने की भी योजना बनाई है।

भारत में मार्वेल की मौजूदगी

मार्वेल ने 2006 में बेंगलुरु से भारत में अपना परिचालन शुरू किया था। तब से कंपनी ने भारत को अपना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा R&D केंद्र बना दिया है। वर्तमान में बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद में कंपनी के इंजीनियरिंग केंद्र हैं, जहाँ की टीमें 2-नैनोमीटर और उससे आगे की सेमीकंडक्टर प्रोसेस तकनीक, हाई-स्पीड एनालॉग इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP), सबसिस्टम डिज़ाइन, सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर डेवलपमेंट तथा एंड-टू-एंड सिलिकॉन इंजीनियरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

नेतृत्व का बयान

मार्वेल के वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया कंट्री मैनेजर नवीन बिश्नोई ने कहा, 'भारत मार्वेल के लिए इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का एक रणनीतिक केंद्र बन चुका है। यहाँ की टीम उन इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों के विकास में अहम योगदान दे रही है, जिन पर दुनिया के प्रमुख हाइपरस्केलर और क्लाउड प्रदाताओं की सेवाएँ आधारित हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अपने ग्राहकों, साझेदारों, सरकारी और शैक्षणिक संस्थाओं तथा भारतीय टीम की नवाचार क्षमता और समर्पण की सराहना करती है।

व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जुड़ाव

कंपनी के अनुसार, भारत में कार्यरत इंजीनियरिंग टीमों के नाम अनेक पेटेंट दर्ज हैं और वे उन्नत AI टूल्स का व्यापक उपयोग कर इंजीनियरिंग उत्पादकता और नए उत्पादों के विकास में तेज़ी ला रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार भी सेमीकंडक्टर विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत पहल कर रही है। मार्वेल ने स्पष्ट किया कि वह विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों और सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत के व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मज़बूत करने में भी निवेश जारी रखेगी। गौरतलब है कि यह निवेश भारत में वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों की बढ़ती रुचि की एक बड़ी कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरी इंजीनियरिंग क्षमता का केंद्र मान रही हैं। 2-नैनोमीटर तकनीक पर काम और पेटेंट की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भारत की भूमिका अब 'बैक-ऑफिस' से 'कोर डिज़ाइन' की ओर खिसक रही है। हालाँकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह निवेश उच्च-कौशल रोज़गार सृजन में तब्दील होता है — विशेषकर ऐसे समय में जब AI-आधारित इंजीनियरिंग टूल्स परंपरागत जनशक्ति की माँग को संकुचित कर रहे हैं। भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए यह खबर उत्साहजनक है, लेकिन फैब्रिकेशन क्षमता के बिना डिज़ाइन हब की सीमाएँ भी स्पष्ट हैं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्वेल टेक्नोलॉजी भारत में कितना निवेश करेगी और कब तक?
मार्वेल टेक्नोलॉजी अगले तीन वर्षों में भारत में $250 मिलियन (लगभग ₹2,100 करोड़) का निवेश करेगी। यह घोषणा 29 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में कंपनी के भारत संचालन के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की गई।
मार्वेल टेक्नोलॉजी भारत में किन क्षेत्रों में काम करती है?
मार्वेल की भारतीय टीमें 2-नैनोमीटर और उससे आगे की सेमीकंडक्टर प्रोसेस तकनीक, हाई-स्पीड एनालॉग IP, सबसिस्टम डिज़ाइन, सॉफ्टवेयर-फर्मवेयर डेवलपमेंट और एंड-टू-एंड सिलिकॉन इंजीनियरिंग में कार्यरत हैं। कंपनी के बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद में इंजीनियरिंग केंद्र हैं।
मार्वेल टेक्नोलॉजी भारत में कब से है और इसका क्या महत्व है?
मार्वेल ने 2006 में बेंगलुरु से भारत में परिचालन शुरू किया था। तब से भारत कंपनी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा R&D केंद्र बन चुका है, जो वैश्विक हाइपरस्केलर और क्लाउड प्रदाताओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकें विकसित करता है।
इस निवेश से भारत में रोज़गार पर क्या असर होगा?
मार्वेल ने अगले तीन वर्षों में भारत में अपने कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करने की योजना बनाई है। कंपनी AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उन्नत सेमीकंडक्टर समाधानों के लिए इंजीनियरिंग प्रतिभा की भर्ती करेगी।
मार्वेल भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को कैसे मज़बूत करेगी?
कंपनी विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स, उद्योग संगठनों और सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने में निवेश कर रही है। इसके अलावा, भारतीय इंजीनियरिंग टीमें उन्नत AI टूल्स का उपयोग कर नए उत्पादों के विकास में तेज़ी ला रही हैं और कई तकनीकी प्लेटफॉर्म पर पेटेंट दर्ज कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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