माइक्रोन के साणंद सेमीकंडक्टर प्लांट को 12 घंटे शिफ्ट की मंजूरी, साप्ताहिक सीमा 48 घंटे तय
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 19 अगस्त 2026 को माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साणंद स्थित प्लांट में 12 घंटे की कार्य शिफ्ट चलाने की ऐतिहासिक मंजूरी दी है — और यह गुजरात में अपनी तरह की पहली ऐसी अनुमति है। इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों का कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे की निर्धारित सीमा के भीतर ही रहेगा। यह निर्णय राज्य को भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग मानचित्र पर और अधिक प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में उठाया गया नीतिगत कदम है।
कानूनी आधार और नीतिगत ढाँचा
यह मंजूरी ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत दी गई है, जो 21 नवंबर 2025 से समूचे देश में लागू हुआ है। यह कोड राज्य सरकारों को आवश्यक सुरक्षा शर्तों के साथ विशेष परिस्थितियों में कुछ फैक्ट्रियों को निर्धारित प्रावधानों से छूट देने का अधिकार देता है, बशर्ते साप्ताहिक कार्य घंटों की सीमा न टूटे।
गुजरात के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा, 'OSH कोड का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ कंप्लायंस को प्रोत्साहन देना है। कोड में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे के कामकाज का प्रावधान है, लेकिन उपयुक्त सरकार को फैक्ट्रियों के संदर्भ में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। गुजरात सरकार ने राज्य के व्यापक सार्वजनिक हित, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान का उपयोग किया है।'
सेमीकंडक्टर उत्पादन की विशेष ज़रूरतें
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे की शिफ्ट विश्वभर की सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों में एक स्वीकृत और प्रचलित कार्य पद्धति है। सेमीकंडक्टर निर्माण परंपरागत फैक्ट्रियों से भिन्न है — यहाँ अत्यंत नियंत्रित क्लीनरूम परिस्थितियों में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। चिप असेंबली और टेस्टिंग के लिए अत्याधुनिक स्वचालित मशीनें 24 घंटे कार्यरत रहती हैं।
लंबी शिफ्ट के कारण शिफ्ट बदलने की संख्या घटती है, क्लीनरूम में प्रवेश कम होता है, मशीनों का उपयोग अधिक कुशल होता है और अरबों रुपये के निवेश वाले प्लांट में उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना संभव होता है। गौरतलब है कि इस व्यवस्था में कर्मचारी सप्ताह में कम दिन काम करते हैं, जिससे उनका कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे ही रहता है।
श्रमिक सुरक्षा की शर्तें
राज्य सरकार ने यह मंजूरी कड़ी शर्तों के साथ दी है। वयस्क कर्मचारी प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे काम कर सकेंगे, परंतु साप्ताहिक सीमा 48 घंटे से अधिक नहीं होगी। शेष दिनों को सवेतन अवकाश माना जाएगा। केवल अपनी स्वैच्छिक लिखित सहमति देने वाले कर्मचारी ही इस शिफ्ट में काम कर सकेंगे।
बावलिया ने स्पष्ट किया, 'किसी भी औद्योगिक इकाई को कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट रखने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। मंजूरी के बिना कोई भी औद्योगिक समूह कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट नहीं करा सकेगा।' कंपनी के लिए ऐसे कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। फैक्ट्रियों के चीफ इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर द्वारा लागू अतिरिक्त शर्तों का पालन भी बाध्यकारी होगा। किसी भी शर्त के उल्लंघन पर मंजूरी रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
माइक्रोन प्लांट का महत्व और उत्पादन लक्ष्य
माइक्रोन टेक्नोलॉजी का साणंद प्लांट कंपनी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में अहम भूमिका निभाएगा। परियोजना के पहले चरण में 5 लाख वर्ग फीट से अधिक क्लीनरूम क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट क्लीनरूम में से एक होगा। वर्ष 2026 के दौरान यहाँ करोड़ों सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली एवं टेस्टिंग शुरू होने की अपेक्षा है, जबकि 2027 से उत्पादन क्षमता हर वर्ष सैकड़ों मिलियन चिप्स तक पहुँचने की संभावना है।
गुजरात का सेमीकंडक्टर नेतृत्व और आगे की राह
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य था। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर हुए छह बड़े प्रोजेक्ट गुजरात को मिले हैं, जिनके माध्यम से लगभग ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश किया गया है। इन परियोजनाओं से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है।
श्रम राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने कहा, 'यह छूट राज्य की औद्योगिक प्रगति को गति देने, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने, नए रोजगार का सृजन करने और विशेष रूप से राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।' मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में निरंतर निवेश आकर्षित कर रहा है। यह नीतिगत कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस संकेत है।