1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महावितरण का निजीकरण नहीं होगा: CM फडणवीस का विधानसभा में ऐलान, भिवंडी में AT&C नुकसान 41% से घटकर 10% हुआ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महावितरण का निजीकरण नहीं होगा: CM फडणवीस का विधानसभा में ऐलान, भिवंडी में AT&C नुकसान 41% से घटकर 10% हुआ

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा में CM फडणवीस ने साफ कर दिया — महावितरण बिकेगी नहीं। भिवंडी में टोरेंट पावर की फ्रैंचाइजी ने AT&C नुकसान 41% से 10% पर लाकर और वसूली 98% तक पहुँचाकर साबित किया कि सरकारी स्वामित्व बनाए रखते हुए भी सुधार संभव है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में घोषित किया कि महावितरण का निजीकरण नहीं होगा।
भिवंडी सर्कल में टोरेंट पावर लिमिटेड की फ्रैंचाइजी से AT&C नुकसान 41% से घटकर लगभग 10% रह गया।
बिजली बिल वसूली दर बढ़कर 98% तक पहुँची — फ्रैंचाइजी से पहले की तुलना में बड़ा सुधार।
सदस्य रईस शेख ने मोबाइल की तर्ज पर बिजली के लिए प्रीपेड सिस्टम और पुराने ब्याज माफी की माँग रखी।
सरकार ने विशेष प्रोत्साहन देने की माँग नियमों का हवाला देते हुए अस्वीकार की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून 2026 को राज्य विधानसभा में स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी महावितरण (महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड) का निजीकरण नहीं किया जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान सदस्य रईस शेख के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने डिस्ट्रीब्यूशन फ्रैंचाइजी मॉडल का बचाव करते हुए भिवंडी सर्कल में टोरेंट पावर लिमिटेड के अनुभव को सफलता की मिसाल बताया।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट रुख

फडणवीस ने सदन को भरोसा दिलाया कि फ्रैंचाइजी मॉडल और निजीकरण में बुनियादी फर्क है। उन्होंने कहा, 'कामकाज के नेटवर्क को बेहतर बनाने और रेवेन्यू के नुकसान को रोकने के लिए लोकल डिस्ट्रीब्यूशन फ्रैंचाइजी लाने का मतलब सरकारी संपत्ति बेचना नहीं है। महावितरण एक मजबूत, राज्य द्वारा संचालित कंपनी बनी रहेगी।' उनके अनुसार, फ्रैंचाइजी व्यवस्था में संपत्ति और स्वामित्व सरकार के पास ही रहता है — केवल परिचालन की जिम्मेदारी निजी संस्था को दी जाती है।

भिवंडी मॉडल: नुकसान से सफलता तक का सफर

मुख्यमंत्री फडणवीस ने भिवंडी सर्कल का विस्तृत तुलनात्मक ब्यौरा सदन के सामने रखा। टोरेंट पावर लिमिटेड के फ्रैंचाइजी के रूप में आने से पहले इस क्षेत्र में बिजली चोरी, लीकेज और खराब बिलिंग व्यवस्था की गंभीर समस्याएँ थीं।

फ्रैंचाइजी एग्रीमेंट के बाद कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) नुकसान 41 प्रतिशत से घटकर लगभग 10 प्रतिशत रह गया। साथ ही बिजली बिल वसूली 98 प्रतिशत तक पहुँच गई — जो पहले की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार है। गौरतलब है कि 2006 से 2026 के बीच दो दशकों में यह मॉडल न केवल सफल रहा, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु भी बना।

फ्रैंचाइजी मॉडल का उद्देश्य

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पब्लिक-प्राइवेट सहयोग का मकसद विशेष रूप से उन इलाकों में 24 घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है जहाँ नुकसान अधिक रहा है। इसके साथ ही सरकारी खजाने को वित्तीय क्षति से बचाना भी इस व्यवस्था का अहम लक्ष्य है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत को लेकर बहस तेज है।

विपक्ष की माँगें और सरकार का जवाब

सदस्य रईस शेख ने भिवंडी मॉडल को रोल मॉडल मानते हुए वहाँ परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की माँग की, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमों और प्रक्रियाओं के कारण यह संभव नहीं होगा। शेख ने मोबाइल सेवा की तर्ज पर बिजली उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड सिस्टम लागू करने की भी पुरजोर वकालत की, जिसमें उपभोक्ता नंबर वही रहे और किसी भी सर्विस प्रोवाइडर से सेवा ली जा सके। इसके अलावा उन्होंने फ्रैंचाइजी मॉडल लागू होने से पहले के बकाया ब्याज को माफ करने की भी माँग रखी।

आगे की राह

महावितरण के निजीकरण को लेकर जो आशंकाएँ थीं, मुख्यमंत्री के बयान से उन्हें फिलहाल विराम मिला है। हालाँकि प्रीपेड बिजली व्यवस्था और पुराने ब्याज माफी जैसी माँगों पर सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भिवंडी मॉडल को अन्य उच्च-नुकसान वाले सर्किलों में विस्तारित किया जाए, तो महावितरण की समग्र वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'फ्रैंचाइजी बनाम निजीकरण' की यह बहस असली सवाल से ध्यान भटका सकती है — वह सवाल यह है कि भिवंडी मॉडल दो दशकों में सफल रहा, तो अन्य उच्च-नुकसान वाले सर्किलों में इसे क्यों नहीं दोहराया गया? AT&C नुकसान में 31 प्रतिशत अंकों की कमी और 98% वसूली दर प्रभावशाली आँकड़े हैं, लेकिन इनका लाभ अभी भी सीमित भूगोल तक है। प्रीपेड बिजली की माँग और पुराने ब्याज माफी के सवाल अनुत्तरित हैं — सरकार को इन पर ठोस नीतिगत स्थिति लेनी होगी, अन्यथा यह घोषणा केवल आश्वासन बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या महावितरण का निजीकरण होने वाला है?
नहीं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में स्पष्ट किया कि महावितरण का निजीकरण नहीं किया जाएगा और यह राज्य-संचालित कंपनी बनी रहेगी। फ्रैंचाइजी मॉडल में स्वामित्व सरकार के पास रहता है, केवल परिचालन निजी संस्था को सौंपा जाता है।
भिवंडी फ्रैंचाइजी मॉडल क्या है और यह कैसे काम करता है?
भिवंडी सर्कल में टोरेंट पावर लिमिटेड को डिस्ट्रीब्यूशन फ्रैंचाइजी के रूप में नियुक्त किया गया है, जहाँ बिजली वितरण का परिचालन निजी कंपनी करती है लेकिन नेटवर्क का स्वामित्व महावितरण के पास रहता है। यह मॉडल 2006 से चल रहा है और AT&C नुकसान 41% से घटाकर 10% तक लाने में सफल रहा है।
भिवंडी में बिजली वितरण में कितना सुधार हुआ?
टोरेंट पावर के फ्रैंचाइजी बनने के बाद भिवंडी में AT&C (तकनीकी एवं वाणिज्यिक) नुकसान 41% से घटकर लगभग 10% रह गया। बिजली बिल वसूली दर 98% तक पहुँच गई, जो पहले की तुलना में बड़ा सुधार है।
सदस्य रईस शेख ने विधानसभा में क्या माँगें रखीं?
सदस्य रईस शेख ने भिवंडी मॉडल के विस्तार के लिए विशेष प्रोत्साहन, मोबाइल सेवा की तर्ज पर बिजली उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड सिस्टम, और फ्रैंचाइजी लागू होने से पहले के बकाया ब्याज को माफ करने की माँग रखी। सरकार ने विशेष प्रोत्साहन की माँग नियमों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दी।
क्या महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी यह फ्रैंचाइजी मॉडल लागू होगा?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस बारे में कोई ठोस घोषणा नहीं की। हालाँकि उन्होंने संकेत दिया कि फ्रैंचाइजी मॉडल का उद्देश्य उच्च-नुकसान वाले क्षेत्रों में 24 घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे भविष्य में इसके विस्तार की संभावना बनी रहती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले