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आरबीआई का रिकॉर्ड डिविडेंड: सरकार को ₹2.8–3.3 लाख करोड़ मिलने की उम्मीद, पिछला रिकॉर्ड टूटेगा

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आरबीआई का रिकॉर्ड डिविडेंड: सरकार को ₹2.8–3.3 लाख करोड़ मिलने की उम्मीद, पिछला रिकॉर्ड टूटेगा

सारांश

आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड शुक्रवार को रिकॉर्ड डिविडेंड तय करेगा — अनुमान ₹2.8 से ₹3.3 लाख करोड़ के बीच। यह पिछले साल के ₹2.69 लाख करोड़ के रिकॉर्ड को तोड़ेगा और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सरकार की राजकोषीय स्थिति को मज़बूत करेगा।

मुख्य बातें

RBI का केंद्रीय बोर्ड 22 मई 2026 को मुंबई में सरकार को सरप्लस हस्तांतरण को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहा है।
अनुमानित डिविडेंड ₹2.8 लाख करोड़ से ₹3.3 लाख करोड़ के बीच — पिछले वर्ष के ₹2.69 लाख करोड़ के रिकॉर्ड से अधिक।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस का अनुमान ₹3–3.2 लाख करोड़ ; एमके ग्लोबल की माधवी अरोरा का अनुमान ₹2.8–3.3 लाख करोड़ ।
इस वर्ष सरप्लस वृद्धि का मुख्य कारण कंटीजेंसी बफर आवश्यकता में कमी और उच्च ब्याज आय।
सरकार ने बजट में ₹3.16 लाख करोड़ के कुल डिविडेंड (RBI + सार्वजनिक कंपनियाँ) का अनुमान लगाया था।
यह अतिरिक्त राजस्व सरकार को बाज़ार ऋण बढ़ाए बिना राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में मदद करेगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का केंद्रीय बोर्ड शुक्रवार, 22 मई 2026 को मुंबई में संशोधित आर्थिक पूंजी ढाँचे (Revised Economic Capital Framework) के अंतर्गत केंद्र सरकार को सरप्लस फंड के हस्तांतरण को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहा है। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार, इस वर्ष का डिविडेंड ₹2.8 लाख करोड़ से ₹3.3 लाख करोड़ के बीच रह सकता है — जो पिछले वर्ष के ₹2.69 लाख करोड़ के रिकॉर्ड भुगतान को पार कर जाएगा।

विश्लेषकों का अनुमान

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोरा ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि आरबीआई का डिविडेंड इस वर्ष ₹2.8 लाख करोड़ से ₹3.3 लाख करोड़ के बीच रहेगा, जो पूंजी के उपयोग के स्तर पर निर्भर करेगा। उच्च ब्याज आय और संभावित रूप से कम बफर आवश्यकता के चलते पिछले वर्ष के ₹2.7 लाख करोड़ के डिविडेंड की तुलना में अधिक भुगतान संभव है।'

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस का अनुमान है कि डिविडेंड ₹3 लाख करोड़ से ₹3.2 लाख करोड़ के बीच रहेगा। उनके अनुसार, इस बार सरप्लस वृद्धि का मुख्य कारण कंटीजेंसी बफर आवश्यकता में कमी है। सबनाविस ने कहा, 'पिछले वर्ष डिविडेंड ₹2.7 लाख करोड़ था, इसलिए इस वर्ष यह लगभग ₹50,000 करोड़ अधिक होगा।'

कंटीजेंसी बफर क्या है और इसका असर

कंटीजेंसी बफर वह आरक्षित निधि है जिसे RBI मौद्रिक नीति झटकों, क्रेडिट जोखिम और प्रतिभूतियों में मूल्यह्रास से निपटने के लिए बनाए रखता है। यह बफर आरबीआई की बैलेंसशीट के 4.5% से 7.5% के बीच होता है। सबनाविस के अनुसार, इस बार बफर आवश्यकता में संभावित कमी से सरप्लस अधिक होगा — जो सीधे सरकार को हस्तांतरित होगा।

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई के डिविडेंड में भारी वृद्धि विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग से अधिक आय के कारण हुई थी। 2025-26 के सरप्लस के कारक उससे भिन्न होंगे — इस बार उच्च ब्याज आय और बफर में कमी प्रमुख भूमिका निभाएगी।

सरकारी वित्त पर असर

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों और केंद्रीय बैंक से मिलाकर ₹3.16 लाख करोड़ के डिविडेंड का अनुमान लगाया था। RBI का यह रिकॉर्ड डिविडेंड गैर-कर राजस्व में अप्रत्याशित वृद्धि के रूप में काम करेगा। यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार को बाज़ार से अतिरिक्त ऋण लिए बगैर राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने में सहायक होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के चलते भारत के निर्यात पर दबाव है और सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रही है।

पिछले वर्षों से तुलना

पिछले वर्ष RBI ने सरकार को ₹2.68 लाख करोड़ डिविडेंड दिया था, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 27% अधिक था। यदि इस वर्ष का भुगतान ₹3 लाख करोड़ को पार करता है, तो यह लगातार दूसरा वर्ष होगा जब आरबीआई ने अपने स्वयं के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा होगा।

केंद्रीय बोर्ड की बैठक के नतीजे शुक्रवार को सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद आधिकारिक डिविडेंड राशि की पुष्टि होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भरता एक संरचनात्मक चिंता है — केंद्रीय बैंक का सरप्लस कर-संग्रह का विकल्प नहीं हो सकता। पिछले वर्ष विदेशी मुद्रा लेनदेन से असाधारण आय हुई थी; इस बार कंटीजेंसी बफर में कमी का सहारा लिया जा रहा है, जो दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिहाज़ से बारीकी से देखा जाना चाहिए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सरकार ने बजट में ₹3.16 लाख करोड़ का अनुमान पहले ही लगा लिया था — यानी यह 'अप्रत्याशित' लाभ नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित राजस्व है। असली सवाल यह है कि इस राशि का उपयोग पूँजीगत व्यय में होगा या राजकोषीय घाटे की भरपाई तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई सरकार को डिविडेंड क्यों देता है?
RBI अपने परिचालन से होने वाले सरप्लस को संशोधित आर्थिक पूंजी ढाँचे के तहत केंद्र सरकार को हस्तांतरित करता है। यह गैर-कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है जो सरकार के वित्त को मज़बूत करता है।
इस वर्ष आरबीआई का डिविडेंड कितना रहने का अनुमान है?
विश्लेषकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 का डिविडेंड ₹2.8 लाख करोड़ से ₹3.3 लाख करोड़ के बीच रह सकता है। यह पिछले वर्ष के ₹2.69 लाख करोड़ के रिकॉर्ड से अधिक होगा।
कंटीजेंसी बफर क्या है और इसका डिविडेंड से क्या संबंध है?
कंटीजेंसी बफर वह आरक्षित निधि है जो RBI मौद्रिक झटकों, क्रेडिट जोखिम और प्रतिभूतियों में मूल्यह्रास से निपटने के लिए रखता है। यह बैलेंसशीट के 4.5% से 7.5% के बीच होता है। बफर आवश्यकता कम होने पर अधिक राशि सरप्लस के रूप में सरकार को हस्तांतरित होती है।
इस डिविडेंड से सरकार के राजकोषीय घाटे पर क्या असर पड़ेगा?
रिकॉर्ड डिविडेंड से गैर-कर राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे सरकार बाज़ार से अतिरिक्त ऋण लिए बगैर राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रख सकेगी। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में सहायक होगा।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का डिविडेंड अधिक क्यों होगा?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस के अनुसार, इस वर्ष उच्च ब्याज आय और कंटीजेंसी बफर आवश्यकता में कमी के कारण सरप्लस अधिक होगा। पिछले वर्ष विदेशी मुद्रा भंडार से असाधारण आय ने डिविडेंड बढ़ाया था; इस बार कारण अलग हैं।
राष्ट्र प्रेस
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